निजी अस्पतालों को भी इच्छामृत्यु देने का अधिकार

राज्य सरकार का निर्णय

मुंबई /दि.23 – गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों को इच्छामृत्यु पत्र के अनुसार उपचार रोके जाने की प्रक्रिया के लिए शासकीय व अर्धशासकीय अस्पतालों की तर्ज पर निजी अस्पतालों में भी प्राथमिक वैद्यकीय मंडल और द्वितीय वैद्यकीय मंडल स्थापित किये जाने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है. उसी के अनुसार अब निजी अस्पतालों में भी गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों को इच्छामृत्यु देने के संदर्भ में अधिकार प्राप्त होगा.
सर्वोच्च न्यायालय ने 11 मार्च 2026 को हरीश राणा प्रकरण के फैसले की पार्श्वभूमि पर सार्वजनिक आरोग्य विभाग द्वारा यह निर्णय लेकर उस संदर्भ में शासन का जीआर निकाला है. निजी अस्पतालों में भी वैद्यकीय मंडल स्थापन करने के राज्य सरकार के इस निर्णय की वजह से सरकारी व अर्धसरकारी अस्पताल के अनुसार निजी अस्पतालों में भी इस पर अमल करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है. इस निर्णय के अनुसार निजी अस्पताल में प्राथमिक वैद्यकीय मंडल के अध्यक्ष पद पर संबंधित अस्पताल का प्रशासक रहेगा तथा उपचार करने वाले वैद्यकीय तज्ञ, गंभीर बीमारी पर उपचार करने वाले तज्ञ वरिष्ठ फिजिशियन व सर्जन का इसमें समावेश रहेगा.
मंडल की रचना अस्पताल के वैद्यकीय संचालक, सीईओ, वैद्यकीय अधीक्षक द्वारा की जाएगी. द्वितीय वैद्यकीय मंडल के अध्यक्ष के तौर पर संबंधित अस्पताल के वैद्यकीय संचालक रहेंगे तथा वैद्यकीय तज्ञ, 5 वर्ष से अधिक अनुभव रहने वाले संबंधित विषय के दो तज्ञ, जिला शल्यचिकित्सकों द्वारा नाम निर्देशित किये गये. सूचिबद्ध बाह्य विशेषज्ञ, जिला शल्यचिकित्सक का समावेश रहेगा.
इस समिति की रचना जिला शल्सचिकित्सक द्वारा की जाएगी. मुंबई और मुंबई उपनगर को छोडकर शेष जिलों के लिए यह समिति लागू रहेगी. मुंबई व मुंबई उपनगर के लिए जे. जे. अस्पताल के वैद्यकीय अधीक्षक समिति के सदस्य रहेंगे. द्वितीय वैद्यकीय मंडल पर तज्ञ सदस्यों के नामनिर्देशन करने के लिए जिला शल्यचिकित्सक अपने-अपने जिलों के पंजीकृत वैद्यकीय व्यवसायिकों के पैनल तैयार करें, ऐसे निर्देश भी शासन द्वारा दिये गये है. यह शासन निर्णय राज्य के सभी निजी अस्पतालों के निदर्शन में लाने की सूचना भी दी गई है.

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