आजाद समाज पार्टी का कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन
नीट पेपर लीक और जंतर-मंतर लाठीचार्ज का किया विरोध

* राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
अमरावती/दि.25 – आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की ओर से शनिवार 25 जुलाई को जिलाध्यक्ष प्रवीण सु. मोहोड के नेतृत्व में अमरावती जिलाधिकारी कार्यालय के सामने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया. यह आंदोलन 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान हुए कथित पुलिस लाठीचार्ज तथा नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित किया गया. आंदोलन के बाद राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग की गई.
धरने में महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष मनीष साठे, प्रदेश उपाध्यक्ष सिद्धार्थ देवरे, प्रदेश सचिव सुदान बोरकर, विदर्भ (पश्चिम) अध्यक्ष उमेश हिवराले, प्रदेश प्रवक्ता प्रा. प्रमोद मेश्राम, विदर्भ उपाध्यक्ष रवींद्र फुले, पूर्व अमरावती जिलाध्यक्ष उमेश दुर्योधन, जिला महासचिव विक्रम तसरे, बडनेरा विधानसभा अध्यक्ष शरद वाकड़े, अचलपुर विधानसभा अध्यक्ष एवं जिला सचिव अमोल खंडारे, शहर सचिव प्रवीण वानखड़े सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे. ज्ञापन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने, छात्र आंदोलन में जान गंवाने वाले प्रत्येक छात्र के परिवार को 1 करोड़ की आर्थिक सहायता देने, संसद में पेपर लीक और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर चर्चा कराने तथा आंदोलन में शामिल छात्रों पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने की मांग की गई. साथ ही शिक्षा माफिया और पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ सख्त एवं समयबद्ध कार्रवाई की भी मांग उठाई गई.
पार्टी ने छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच, सादी वर्दी में मौजूद लोगों की पहचान सार्वजनिक करने, आंसू गैस के इस्तेमाल, क्षतिग्रस्त वाहनों और पुलिस द्वारा कथित रूप से कीलों वाली लाठियों के उपयोग की जांच कराने की मांग भी की. इसके अलावा भविष्य में सभी पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों की वर्दी पर स्पष्ट नेम प्लेट अनिवार्य करने का आग्रह किया गया. शिक्षा एवं भर्ती सुधार संबंधी मांगों में नीट-यूजी, जेईई मेन सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू करने, परीक्षा शुल्क समाप्त करने, अभ्यर्थियों को गृह या निकटवर्ती जिले में परीक्षा केंद्र देने, रिक्त सरकारी पदों पर समयबद्ध भर्ती, वार्षिक भर्ती कैलेंडर जारी करने, भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने, नॉर्मलाइजेशन प्रणाली समाप्त करने तथा सभी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों के अंक सार्वजनिक करने की मांग शामिल है. धरना-प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने कहा कि शिक्षा, रोजगार और न्याय देश के प्रत्येक युवा का संवैधानिक अधिकार है तथा सरकार को युवाओं के हितों की रक्षा के लिए शीघ्र प्रभावी कदम उठाने चाहिए.
इस आंदोलन में सुदाम बोरकर, चंद्रकांत मेश्राम, स्वप्नील खडसे, सिद्धार्थ देवरे, आनंद बारसे, रवि बागडे, अजीत गडपाल, डॉ. हर्षद हिवराले, रवि वानखडे, शैलेश आठवले, प्राण अभ्यंकर, श्रावण सुभेदार, सैयद समीर, संघर्ष फुले, एड. मंगेश वानखडे, रवि फुले, मोंटो थोरात, लखन चव्हाण,रवि हजारे, अमन दाभाडे, शैलेश आठवले, सागर खंडारे, शरद वाकोडे, विजय मोहोड, चंदू मोहोड, कपिल गायगोले, प्रज्वल गवई, बब्बू भाई, उमेश दुर्योधन, अमोल खंडारे, नितिन काले, आशीष काले, स्वप्नील खडसे, प्रवीण वानखडे, अश्वीन थोरात, सचिन दांडगे, शरद वाकोडे, रोशन गडलिंग, रोशन वानखडे, मनोज बोरखडे, सतीश दुर्योधन, प्रवीण मोहोड, विक्रम तसरे, अमित साठे, प्रीतम मस्के, जया चौधरी, माधुरी मेश्राम, आरती स्थुल, रेखा सोनोने, सविता सोनोने, वनमाला मांडवधरे, सुमित्रा इंगले, काजल मस्के, नावेद अली, अर्शद अली, फिरोज खान, अशफाक बेनिवाले, जंजीरसिंग टाक, कुणाल गजभिये, राज सैयद, जुबेर सैयद, अमन दाभाडे, प्रकाश खरुले, अभिषेक वानखडे, अक्षय पांडे आदि का समावेश था.





