डफरीन अग्निकांड पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सख्त नजर
घटनास्थल का दौरा कर आयोग ने मांगी तीन दिन में रिपोर्ट

* जांच समिति में स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल करने की सिफारिश
अमरावती /दि.26 – अमरावती के जिला महिला अस्पताल (डफरीन) के नवजात शिशु अतिदक्षता विभाग (एसएनसीयू) में सोमवार तड़के हुए भीषण अग्निकांड, जिसमें तीन नवजात शिशुओं की दर्दनाक मौत हो गई, का मामला अब महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक पहुंच गया है. आयोग ने इस घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल संज्ञान लिया है और पूरे मामले की निष्पक्ष तथा पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने की मांग की है.
महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य प्रवीण भुजाडे ने सोमवार को अमरावती पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया. उन्होंने विभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अस्पताल का दौरा कर घटना की परिस्थितियों, बचाव कार्य, सुरक्षा व्यवस्था और अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी ली.
* तीन दिन में मांगी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले ही उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. इस संबंध में आयोग के सदस्य प्रवीण भुजाडे ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि जांच केवल औपचारिकता न रह जाए, बल्कि घटना के हर पहलू की गहराई से पड़ताल होनी चाहिए. इसके लिए तकनीकी, प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी सभी पहलुओं की स्वतंत्र जांच आवश्यक है.
* जांच समिति में स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग
बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया है. आयोग ने मांग की है कि जांच समिति में केवल सरकारी विभागों के अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि अग्नि सुरक्षा, अस्पताल प्रबंधन, विद्युत सुरक्षा और नवजात चिकित्सा क्षेत्र के स्वतंत्र विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए. आयोग का मानना है कि बाहरी विशेषज्ञों की भागीदारी से जांच अधिक निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ होगी तथा किसी भी प्रकार के दबाव या प्रभाव से मुक्त रहकर वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सकेगा.
* बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी घटना अत्यंत संवेदनशील
प्रवीण भुजाडे ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की घटना अत्यंत संवेदनशील और गंभीर होती है. ऐसे मामलों में केवल जिम्मेदारों की पहचान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी और स्थायी उपाय भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस हादसे के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां सामने आना जरूरी है. यदि किसी स्तर पर लापरवाही, सुरक्षा मानकों की अनदेखी या प्रशासनिक चूक हुई है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
* राज्यभर के बालगृहों और निरीक्षण गृहों के फायर ऑडिट के निर्देश
डफरीन अग्निकांड के बाद बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य स्तर पर भी कदम उठाए हैं. आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग को पत्र लिखकर राज्य के सभी बालगृहों, निरीक्षण गृहों और अन्य आवासीय संस्थानों का तत्काल फायर ऑडिट और स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं. इन संस्थानों में बड़ी संख्या में बच्चे निवास करते हैं, इसलिए आयोग का मानना है कि वहां सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना अत्यंत आवश्यक है. आयोग ने यह भी कहा कि आग, विद्युत दुर्घटना या अन्य आपदाओं से बचाव के लिए सभी संस्थानों में नियमित सुरक्षा जांच और मॉक ड्रिल आयोजित की जानी चाहिए.
* निष्पक्ष जांच और जवाबदेही पर रहेगा आयोग का फोकस
बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह इस पूरे मामले पर लगातार नजर रखेगा और जांच की प्रगति की समीक्षा करेगा. आयोग का उद्देश्य केवल घटना के कारणों का पता लगाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि भविष्य में किसी नवजात या बच्चे की जान ऐसी लापरवाही के कारण न जाए. डफरीन अस्पताल में हुई यह त्रासदी अब केवल एक अस्पताल की घटना नहीं रह गई है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य और बाल सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा बन गई है. ऐसे में आयोग की सक्रियता से उम्मीद की जा रही है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों की जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार भी किए जाएंगे.





