डफरीन में फायर ऑडिट के बावजूद कैसे लगी आग?
अग्निकांड ने खोली अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की परतें

* वेंटिलेटर से लेकर स्प्रिंकलर व इलेक्ट्रिक ऑडिट तक जांच के घेरे में
अमरावती/दि.26- अमरावती के जिला महिला अस्पताल (डफरीन) के नवजात शिशु अतिदक्षता विभाग (एनआईसीयू/एसएनसीयू) में सोमवार तड़के लगी भीषण आग ने केवल तीन नवजात मासूमों की जान ही नहीं ली, बल्कि सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था, फायर ऑडिट, इलेक्ट्रिक ऑडिट, उपकरणों के रखरखाव और आपदा प्रबंधन प्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है. हादसे के बाद सभी के मन में यह सवाल गूंज रहा है कि यदि अस्पताल में फायर ऑडिट हुआ था तो आखिर तीन मासूमों की जान क्यों नहीं बच सकी?
ज्ञात रहे कि, आग लगने के कुछ ही मिनटों में एनआईसीयू धुएं और लपटों से भर गया. तीन नवजातों की मौत हो गई, जबकि 36 अन्य बच्चों को तत्काल विभिन्न अस्पतालों में स्थानांतरित कर उनकी जान बचाई गई. अब इस घटना की जांच कई स्तरों पर शुरू हो चुकी है और प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक जवाबदेही के घेरे में है.
* सबसे बड़ा सवाल, फायर ऑडिट था तो सुरक्षा व्यवस्था विफल क्यों हुई?
डफरीन अस्पताल प्रशासन का दावा है कि अस्पताल में समय-समय पर फायर ऑडिट किए जाते रहे हैं. लेकिन यदि ऐसा था तो आग लगने के बाद सुरक्षा तंत्र प्रभावी ढंग से काम क्यों नहीं कर पाया? विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आधुनिक अस्पताल में केवल फायर ऑडिट कर लेना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि ऑडिट में बताई गई कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर करना भी उतना ही जरूरी होता है. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अस्पताल में किए गए फायर ऑडिट में कौन-कौन सी टिप्पणियां दर्ज थीं, क्या उन पर कार्रवाई की गई थी और दुर्घटना के समय सुरक्षा उपकरण किस स्थिति में थे.
* स्प्रिंकलर सिस्टम और फायर अलार्म ने क्यों नहीं दी चेतावनी?
घटना के बाद सबसे अधिक सवाल अस्पताल में स्थापित अग्नि सुरक्षा उपकरणों को लेकर उठ रहे हैं. यदि एनआईसीयू में स्प्रिंकलर सिस्टम स्थापित था तो आग लगते ही वह स्वतः सक्रिय क्यों नहीं हुआ? क्या स्प्रिंकलर तकनीकी रूप से खराब था या उसका रखरखाव समय पर नहीं किया गया था? इसी तरह फायर अलार्म सिस्टम को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं. यदि अलार्म समय पर बजता तो क्या डॉक्टरों और कर्मचारियों को कुछ अतिरिक्त मिनट मिल सकते थे? क्या इससे नवजातों को और तेजी से बाहर निकाला जा सकता था? जांच में यह भी देखा जा रहा है कि अस्पताल में उपलब्ध अग्निशमन यंत्र, फायर एक्सटिंग्विशर और अन्य सुरक्षा उपकरण पूरी तरह कार्यरत थे या नहीं.
* वेंटिलेटर में विस्फोट या शॉर्ट सर्किट?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार एनआईसीयू में आग लगने से पहले एक वेंटिलेटर में तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी थी. कई प्रत्यक्षदर्शियों ने भी वेंटिलेटर में विस्फोट की आशंका जताई है. हालांकि प्रशासन ने अभी तक आग के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. तकनीकी विशेषज्ञ अब यह जांच कर रहे हैं कि आग का स्रोत वेंटिलेटर था, बैटरी आधारित उपकरण था, विद्युत तारों में शॉर्ट सर्किट हुआ था या फिर कोई अन्य तकनीकी कारण था. जांच टीम संबंधित उपकरणों की मेंटेनेंस हिस्ट्री, सर्विस रिकॉर्ड और तकनीकी रिपोर्ट भी खंगाल रही है.





