शिवतांडव, वॉरियर व जय भोले ने मारी बाजी

 राजकमल चौक की दहीहांडी में दिखा जबरदस्त रोमांच

* कुल 5 टीमों ने 25 फीट की दहीहांडी तक दूसरे राऊंड में बनाई पहुंच
* पहले राऊंड में 31 फीट की चुनौती के आगे झुकीं टीमें, सभी के प्रयास रहे असफल
* दूसरे राऊंड में 25 फीट पर लटकी दहीहांडी तक पहुंचे पांच गोविंदा पथक, छठवां पथक रहा नाकाम
* हजारों दर्शकों की मौजूदगी में गोविंदाओं ने दिखाया दमखम
* नवयुवक विद्यार्थी संगठन का आयोजन रहा बेहद शानदार
* सुरक्षा, अनुशासन और सांस्कृतिक उत्साह का दिखा अनूठा संगम
* दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने संभाली मीडिया पार्टनर की भूमिका
अमरावती/दि.5 – श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गोपालकाला के अवसर पर शहर के ऐतिहासिक राजकमल चौक में नवयुवक विद्यार्थी संगठन द्वारा आयोजित पारंपरिक दहीहांडी उत्सव में इस वर्ष रोमांच, उत्साह और प्रतिस्पर्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला. हजारों नागरिकों की मौजूदगी में विभिन्न गोविंदा पथकों ने ऊंचे मानव पिरामिड बनाकर दहीहांडी फोड़ने के लिए जोरदार प्रयास किए. आयोजन ने एक बार फिर अमरावती की सांस्कृतिक परंपरा और युवाओं की साहसिक भावना को नई ऊंचाई प्रदान की. अमरावती शहर में ऐतिहासिक महत्व रखनेवाले इस आयोजन में पश्चिम विदर्भ क्षेत्र के अग्रणी हिंदी दैनिक ‘अमरावती मंडल’ द्वारा मीडिया पार्टनर की जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन किया गया.
प्रतियोगिता के पहले चरण में दहीहांडी को करीब 31 फीट की ऊंचाई पर बांधा गया था. कई अनुभवी गोविंदा पथकों ने लगातार प्रयास किए, लेकिन कोई भी टीम इस ऊंचाई तक पहुंचकर दहीहांडी फोड़ने में सफल नहीं हो सकी. कई बार मानव पिरामिड अंतिम स्तर तक पहुंचा, किंतु संतुलन बिगड़ने से गोविंदाओं को नीचे उतरना पड़ा. इन प्रयासों ने दर्शकों के बीच रोमांच का माहौल बना दिया.
लगातार असफल प्रयासों के बाद आयोजकों ने दूसरे दौर में दहीहांडी की ऊंचाई घटाकर 25 फीट कर दी. इसके बाद मुकाबले का रंग पूरी तरह बदल गया. शिव तांडव ग्रुप (शिरजगांव) ने शानदार तालमेल और संतुलन का प्रदर्शन करते हुए 14.51 सेकंड में दहीहांडी फोड़ने में सफलता प्राप्त की. इसके तुरंत बाद वॉरियर दहीहांडी पथक ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 15.08 सेकंड में दहीहांडी फोड़कर अपनी क्षमता का परिचय दिया. इसके बाद शिरजगांव कसबा के महाकाल ग्रुप ने 18.79 सेकंड एवं कालभैरव गोविंदा पथक ने 18.12 सेकंड का समय लेते हुए 25 फीट पर लटकी दहीहांडी को फोडा. वहीं इसके उपरांत जय भोले पथक (शिरजगांव कसबा) ने बडी तेजी के साथ प्रदर्शन करते हुए मात्र 17.34 सेकंड में 25 फीट पर लटकी दहीहांंडी को फोड दिया. इन पांचों गोविंदा पथकों द्वारा जैसे ही दहीहांडी फोडी गई, उस समय पूरा राजकमल चौक गोविंदा आला रे और जय कन्हैया लाल की के जयघोष से गूंज उठा. इसके उपरांत स्पर्धा में शामिल छत्रपति गोविंदा पथक द्वारा दहीहांडी तक पहुंचने और हांडी को फोडने के लिए जमकर प्रयास किए गए. परंतु यह टीम निर्धारित दो मिनट का समय समाप्त होने तक अपने प्रयास में असफल रही. जिसके चलते कम से कम समय लेते हुए दहीहांडी फोडने में सफल रहने को लेकर शिवतांडव ग्रुप को प्रथम, वॉरियर ग्रुप को द्वितीय तथा जय भोले पथक को तृतीय स्थान पर विजेता घोषित किया गया.
बता दे कि, इस दहीहांडी प्रतियोगिता में कुल छह गोविंदा पथकों ने भाग लिया, जिनमें शिव तांडव ग्रुप, वॉरियर दहीहांडी पथक, छत्रपति गोविंदा पथक, महाकाल ग्रुप (शिरजगांव कसबा), काल भैरव गोविंदा पथक और जयभोले पथक शामिल थे. सभी टीमों ने साहस और समन्वय का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए दर्शकों की भरपूर वाहवाही बटोरी. इस आयोजन के दौरान गोविंदा टीमों का उत्साह बढाने हेतु मनपा के नेता प्रतिपक्ष व पूर्व महापौर विलास इंगोले तथा पूर्व महापौर व पार्षद संजय नरवने सहित कांग्रेस पदाधिकारी सुरेश रतावा व विनोद मोदी विशेष रूप से मंच पर उपस्थित थे. साथ ही पुरस्कार वितरण समारोह में हिस्सा लेने हेतु पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख, शहर पुलिस आयुक्त राकेश ओला तथा पुलिस उपायुक्त श्याम घुगे व यशवंत सोलंके की उपस्थिती रही. जिनके हाथों प्रथम तीन स्थानों पर रहनेवाले गोविंदा पथकों को नगद पुरस्कार व ट्रॉफी देकर पुरस्कृत किया गया.
* सुरक्षा व्यवस्था रही विशेष आकर्षण
नवयुवक विद्यार्थी संगठन ने इस वर्ष सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी थी. दहीहांडी स्थल पर गोविंदा टीमों की सुरक्षा के लिए दहीहांडी के नीचे घास के करीब 100 बंडल बिछाए गए थे, जिन्हें तिरपाल और पॉलिथीन से सुरक्षित ढंका गया था. इसके अलावा महिलाओं और युवतियों के लिए विशेष दर्शक कक्ष तथा बैरिकेडिंग की व्यवस्था भी की गई थी. मानव पिरामिड के दौरान रोमांच बढ़ाने के लिए दमकल वाहनों के माध्यम से गोविंदा टीमों पर पानी की बौछार भी की गई, जिससे प्रतियोगिता और अधिक आकर्षक बन गई. पुलिस प्रशासन, स्वयंसेवकों और आयोजन समिति के सदस्यों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा.
* 39 वर्षों की परंपरा का भव्य आयोजन
ज्ञात रहे कि, नवयुवक विद्यार्थी संगठन वर्ष 1987 से लगातार जन्माष्टमी के अवसर पर राजकमल चौक में दहीहांडी उत्सव का आयोजन कर रहा है. लगभग चार दशकों में यह आयोजन अमरावती की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है. संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि यह केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवाओं में साहस, अनुशासन, टीम भावना और सामाजिक एकता का संदेश देने वाला उत्सव है.
* प्रथम तीन गोविंदा टीमों के लिए थे आकर्षक पुरस्कार
इस वर्ष के आयोजन में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली टीमों के लिए क्रमशः 51 हजार, 31 हजार और 21 हजार रुपये के नकद पुरस्कार घोषित किए गए थे. परंपरा के अनुसार विजेता टीमों को पुरस्कार पुलिस आयुक्त के हाथों प्रदान किए गए.
* कार्यकर्ताओं की मेहनत रंग लाई
आयोजन की सफलता के पीछे नवयुवक विद्यार्थी संगठन के कार्यकर्ताओं की कई दिनों की मेहनत रही. मंच निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था, दर्शकों के लिए सुविधाएं, गोविंदा टीमों के पंजीयन, यातायात समन्वय और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं में संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लगातार सक्रिय रहे. उनके समन्वित प्रयासों के कारण हजारों लोगों की मौजूदगी के बावजूद कार्यक्रम व्यवस्थित और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. 
इस आयोजन को सफल बनाने हेतु बालकिसन पाण्डेय, संजय देशमुख, बबन रडके, दिलीप मेहरे, पप्पू पाटिल, राजू खरसान, विलास मराठे, राजेंद्र वर्मा, महेश साहू, राजू जाधव, बंडू केतकर, पंकज दिघडे, अतुल टाले, किशन जाधव, मिलींद लेंघे, प्रतिक सवई, सुभाष खोरगडे, सतीश बुनगे, ऐश्वर्या देशमुख, आकाश माहुलकर, आदित्य पोवडे, सिध्देश साहू, निखिल कराले, निनाद खंडोकर, मयूर गरोले, यश कोल्हे, राधेय देशमुख, लालू रावत, लाल साहू, बाबू गजबे, राहुल विरूलकर, सागर माहुलकर, क्रिष्णा कोरडे, श्याम श्रीवास, शुभम शाह, क्रिपाल जोशी, ओम सुर्वा, राजू खैर, स्वप्निल उके, प्रवीण अग्रवाल, दिलीप मेहरे, जगदीश गवली, नंदू देशमुख, बालासाहेब देशपांडे, बी. डी. देशमुख, प्रेम कुचे, छोटू खान व भूषण परिहार  सहित नवयुवक विद्यार्थी संगठन के सभी पदाधिकारियों व सदस्यों ने महत प्रयास किए.
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