सुभाष चंद्रा पर एफआईआर

सीधे सीबीआई की कार्रवाई

* बडे घोटाले का आरोप
दिल्ली/दि.5 – एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो ने आखिरकार 980 करोड के बैंक कर्ज घपले में प्राथमिकी अर्थात एफआईआर दर्ज कर ली है. जिससे खलबली मची है. बडे घपले का आरोप किया जा रहा है. सीबीआई ने साजिश और विश्वासघात का अपराध दर्ज किया है. जिससे सुभाष चंद्रा की दिक्कते बढने के आसार बताए जा रहे हैं. उल्लेखनीय है कि, पिछले अनेक दिनों से सोशल मीडिया और समाचारों में सुभाष चंद्रा का विषय चर्चित रहा. उनके 2200 करोड के कथित लोन का केस मात्र 6.5 करोड में निपटारे की चर्चा पीएमएलए कोर्ट के निर्णय से हो रही थी. देशभर में इस समझौते की हर कोई आलोचना कर रहा था.
सीबीआई का आरोप है कि, सुभाष चंद्रा ने अपनी संपत्ति काफी बढा-चढाकर दिखाई थी और इस आधार पर बैंक का कथित रुप से विश्वास तोडते हुए 980 करोड का लोन दो अलग-अलग प्रकरण में लिया था. पहला प्रकरण वसंत सागर प्रॉपर्टी प्रा. लि. का था. जिसमें 500 करोड का ऋण लिया गया था. दूसरा लोन डिजिटल सब्सक्राइबर मॅनेजमेंट कन्सल्टन्सी सर्विस को किराए से हो रही आमदनी का आधार देकर 480 करोड उठाए गए थे. इसमें स्पिरिट इन्फ्रा पॉवर मल्टी व्हेंचर्स को बॉरोवर रही.
सीबीआई के दावे के अनुसार चंद्रा द्वारा दिए गए प्रमाणपत्र के कारण ही लोन मंजूर किया गया था. 500 करोड के लोन हेतु डीआईएम कंपनी के नाम से फर्म ने विगत 28 मार्च 2018 को प्रमाणपत्र दिया था. जिसमें सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ 59,113 करोड दर्शायी गई थी. दूसरी ओर 480 करोड के लोन के समय एमपीजे कंपनी चार्टर्ड अकाउंटंट्स ने 6 जुलाई 2018 को अलग प्रमाणपत्र दिया था. इसमें चंद्रा की नेटवर्थ 40,562 करोड बताई गई थी. दोनों लोन में चंद्रा ने गारंटी दी थी.
लोन देनेवाली कंपनियां डिफॉल्टर होने के बाद प्रकरण इन्सॉल्व्हन्सी अँड बँकरप्सी कोड (आईबीसी) अंतर्गत कार्रवाई शुरु हुई. उसी समय एक बडा सच उजागर हुआ. चंद्रा की कानूनी कार्रवाई शुरु रहते लोन के समय बताई गई नेटवर्थ उन्होंने ही अमान्य की. अपने पास इतना पैसा नहीं होने की बात और शिकायत उन्होंने की. जिससे भांडा फूटा.
सीबीआई की शिकायत में दोनों नेटवर्थ के फर्क पर बडा आक्षेप लिया गया है. चंद्रा ने 2024 में 31.79 करोड नेटवर्थ बताई थी. जिसमें 2017-18 में उनकी नेटवर्थ 40 हजार करोड से अधिक न होने का दावा किया गया था. अब सीबीआई प्रकरण की गहन जांच करनेवाली है. दस्तावेजों में नेटवर्थ की झूठी जानकारी दी गई थी क्या? षडयंत्र में कौन-कौन शामिल है और अन्य कई बातों का केंद्रीय जांच ब्यूरो पता लगाएगा.

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