दुर्घटना में गर्भवती के मस्तिष्क में रक्तस्राव
पहले कराया सुरक्षित प्रसव, फिर हुई ब्रेन सर्जरी

* डॉक्टरों ने मां और नवजात बच्ची दोनों की बचाई जान
नागपुर/दि.1 – भीषण सड़क दुर्घटना में 34 सप्ताह की गर्भवती महिला के मस्तिष्क में गंभीर रक्तस्राव होने के बाद नागपुर के डॉक्टरों ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए पहले सुरक्षित सिजेरियन प्रसव कराया और उसके तुरंत बाद ब्रेन सर्जरी कर मां और नवजात बच्ची दोनों की जान बचा ली. इस दुर्लभ और जटिल चिकित्सा प्रक्रिया को चिकित्सकीय समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है.
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तुर्कीखापा निवासी 24 वर्षीय योगिता साहू अपने पति के साथ दोपहिया वाहन से यात्रा कर रही थीं. नागपुर-छिंदवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट लगी. उस समय वह 34 सप्ताह की गर्भवती थीं. अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि उनके मस्तिष्क में बड़े पैमाने पर रक्तस्राव हुआ है. स्थिति अत्यंत गंभीर होने के कारण तत्काल ब्रेन सर्जरी आवश्यक थी, लेकिन गर्भावस्था अंतिम चरण में होने से गर्भस्थ शिशु भी खतरे में था. ऐसे में डॉक्टरों के सामने मां और बच्चे दोनों की जान बचाने की चुनौती थी.
चिकित्सकों ने पहले महिला की स्थिति को स्थिर किया और परिजनों की सहमति के बाद आपातकालीन सिजेरियन ऑपरेशन कर 2.1 किलोग्राम वजन की स्वस्थ बच्ची का जन्म कराया. इसके तुरंत बाद गर्भाशय बंद कर न्यूरोसर्जरी टीम ने मस्तिष्क में जमा रक्त निकालने के लिए सफल ब्रेन सर्जरी की. ऑपरेशन के बाद योगिता को तीन दिन तक आईसीयू में रखा गया. कुछ दिनों बाद उन्हें होश आया और उनकी हालत में तेजी से सुधार हुआ. नवजात बच्ची को भी विशेष नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में उपचार दिया गया. लगभग एक सप्ताह बाद मां और बच्ची दोनों की हालत स्थिर होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
न्यूरोसर्जन डॉ. हुसैन भाटी ने बताया कि मस्तिष्क में रक्तस्राव समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता था. वहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. साक्षी बंसल ने कहा कि मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए निर्णय लेना सबसे बड़ी चुनौती थी. नवजात विशेषज्ञ डॉ. कौस्तुभ बहातकर के अनुसार, समय पर विशेष उपचार मिलने से बच्ची पूरी तरह सुरक्षित है. मैक्स सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल, नागपुर के अनुसार, गर्भवती महिला का पहले सिजेरियन प्रसव और उसके तुरंत बाद आपातकालीन ब्रेन सर्जरी कर मां और शिशु दोनों की जान बचाना अत्यंत दुर्लभ चिकित्सकीय उपलब्धि है, जो विभिन्न विशेषज्ञ विभागों के समन्वय से संभव हो सकी.





