सामुदायिक प्रार्थना से राष्ट्रीय एकता की साधना
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज की प्रार्थना सर्वधर्म समन्वय का माध्यम

* ग्रामगीताचार्य प्रा. नरेंद्र राऊत का कथन
तिवसा /दि.1- राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज की सामुदायिक प्रार्थना सर्वधर्म समन्वय के माध्यम से राष्ट्रीय एकता स्थापित करने की साधना है. सामुदायिक प्रार्थना समाज को एकजुट करने के साथ ही विश्व शांति और सामाजिक सुधार का प्रभावी माध्यम है. यह विचार ग्रामगीताचार्य प्रा. नरेंद्र राऊत ने व्यक्त किए.
भारवाड़ी स्थित श्रीसंत सत्यदेव बाबा की पुण्यतिथि के अवसर पर 28 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में ‘सामुदायिक प्रार्थना का महत्व’ विषय पर व्याख्यान देते हुए प्रा. राऊत बोल रहे थे. प्रा. राऊत ने कहा कि राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने हिंदी और मराठी में 150 से अधिक ग्रंथों की रचना की. इनमें ‘ग्रामगीता’ का विशेष महत्व है. राष्ट्रसंत ने ग्रामगीता को अपना हृदय बताया है. इस ग्रंथ में उन्होंने ग्राम विकास के साथ-साथ मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन किया है. उन्होंने ग्रामगीता में सामुदायिक प्रार्थना के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि गांव का कल्याण करना है तो सामुदायिक प्रार्थना को जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है. राष्ट्रसंत ने सामुदायिक प्रार्थना को सभी धर्मों के समन्वय, विश्व शांति और समाज सुधार का माध्यम बताया है. प्रा. राऊत ने ग्रामगीता में दिए गए विभिन्न विचारों, उदाहरणों और दृष्टांतों के माध्यम से उपस्थित गुरुदेव भक्तों को सामुदायिक प्रार्थना के सामाजिक महत्व से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि सामुदायिक प्रार्थना किसी धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सभी धर्मों के प्रति सम्मान और मानवता की भावना निहित है.
* विद्यार्थियों को मोबाइल से दूर रहने की सलाह
कार्यक्रम में श्रीसंत सत्यदेव बाबा आश्रमशाला के विद्यार्थी भी उपस्थित थे. इस अवसर पर शिक्षक के रूप में प्रा. राऊत ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया. उन्होंने ग्रामगीता के ‘जीवन शिक्षण’ अध्याय का संदर्भ देते हुए शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने व्यावसायिक शिक्षा, मूल्य आधारित शिक्षा, महिला शिक्षा और अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे थे. वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इन विषयों को महत्व दिया गया है. प्रा. राऊत ने विद्यार्थियों से मोबाइल के अत्यधिक उपयोग और उसकी लत से दूर रहने तथा पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गुरुदेव भक्त, ग्रामीण और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे. कार्यक्रम के





