पत्रकारिता जनता को जागरूक कर राष्ट्रहित करती है

प्रा. डॉ. मोना चिमोटे का प्रतिपादन

आईआईएमसी में हिन्दी पखवाडे का समापन
अमरावती/ दि. 1– भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारिता की भूमिका राष्ट्रीय चेतना का निर्माण करने एवं कुरीतियों को समाप्त करने तथा जनचेतना जागृत करने की रही है. इस कार्य में हिन्दी के साथ अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की पत्रकारिता ने भी अतुलनीय योगदान दिया. राष्ट्रहित को केन्द्र में रखकर जनमानस को जागरूक करने का कार्य पत्रकारिता ने पहले भी किया है और आज भी कर रही है. इसलिए पत्रकारिता के मूल्यों और नैतिकता को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रहित को केन्द्र में रखकर पत्रकारिता करनी चाहिए। उपरोक्त बातें प्रो. डॉ. मोना चिमोटे ने भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) अमरावती में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त की.
भारतीय जन संचार संस्थान, अमरावती परिसर की ओर से (15 से 30 सितंबर तक) हिंदी पखवाडे का उत्साहपूर्वक आयोजन किया गया. पखवाडे का समापन बुधवार 30 सितंबर को संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय के मानविकी संकाय की अधिष्ठाता तथा मराठी विभाग प्रो. मोना चिमोटे की उपस्थिति में हुआ. इस अवसर पर उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में हिन्दी पत्रकारिता की भूमिका विषय पर विद्यार्थियों से संवाद किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. राजेशसिंह कुशवाहा ने की. इस अवसर पर विचारमंच पर डॉ. विनोद निताले और रोहन तायडे उपस्थित रहे.
हिन्दी पखवाडे के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम भी इस अवसर पर घोषित किए गए. काव्यपाठ प्रतियोगिता में विद्यार्थी वर्ग से जयश्री आनंद ने प्रथम, वरूडकर ने द्बितीय तथा अश्लेषा चेर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया. पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में नव्या श्रीवास्तव प्रथम, कृष्णा श्रीवास्तव द्बितीय तथा श्रध्दा म्हस्के तृतीय रही. निबंध लेखन प्रतियोगिता में नागेश मगरे ने प्रथम, अजिंक्य कावले ने द्बितीय तथा शुभम कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया. कर्मचारी वर्ग से निबंध लेखन प्रतियोगिता में अनंत नांदुरकर प्रथम, भूषण मोहोकार द्बितीय तथा राजेश झोलेकर तृतीय रहे.
इस अवसर पर अंग्रेजी पत्रकारिता पाठ्यक्रम के विद्यार्थियेां द्बारा तैयार किए गये प्रायोगिक समाचार पत्र ‘द पब्लिक एंगल’ का प्रो. मोना चिमोटे के द्बारा विमोचन किया गया. कार्यक्रम का प्रास्ताविक डॉ.विनोद निताले ने किया.

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