आश्रमशालाओं के कायाकल्प में विदर्भ फिर पीछे, 89 में से केवल 33 प्रस्तावों को मंजूरी
गड़चिरोली में सर्पदंश से तीन छात्राओं की मौत के बाद भी नहीं बदली तस्वीर, आदिवासी बहुल क्षेत्र को अपेक्षा से कम मिला लाभ

नागपुर/दि. 1 – गड़चिरोली जिले की एक आश्रमशाला में सर्पदंश से तीन छात्राओं की मौत के बाद राज्यभर में आश्रमशालाओं की बदहाल स्थिति चर्चा का विषय बनी थी. इसके बावजूद आश्रमशालाओं के उन्नयन और कायाकल्प (मेकओवर) के लिए मंजूर प्रस्तावों में विदर्भ को अपेक्षाकृत कम प्राथमिकता मिलने का आरोप सामने आया है. राज्य सरकार ने आश्रमशालाओं के आधुनिकीकरण के लिए कुल 89 प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिनमें से केवल 33 प्रस्ताव विदर्भ क्षेत्र के हिस्से में आए हैं, जबकि शेष 56 प्रस्ताव राज्य के अन्य क्षेत्रों को दिए गए हैं.
विदर्भ आदिवासी आबादी के लिहाज से राज्य का महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है. आदिवासी विकास विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार गड़चिरोली जिले में आदिवासी आबादी का प्रतिशत 38.68 है. इसके अलावा चंद्रपुर में 17.65, गोंदिया में 16.18, यवतमाल में 18.54, अमरावती में 13.98 और वर्धा में 11.53 प्रतिशत आदिवासी जनसंख्या निवास करती है. इसके बावजूद आश्रमशालाओं के विकास कार्यों में विदर्भ को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर सवाल उठ रहे हैं.
* किन जिलों को कितनी मंजूरी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार नंदुरबार जिले की 10, नाशिक की 9, अमरावती की 8, गोंदिया की 8 तथा गड़चिरोली की 4 आश्रमशालाओं के कायाकल्प प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है. यवतमाल और वर्धा जिले को भी केवल 4-4 प्रस्ताव मिले हैं. अकोला और वाशिम को 2-2, जबकि नागपुर और चंद्रपुर को सीमित संख्या में प्रस्ताव स्वीकृत हुए हैं. दूसरी ओर पालघर जिले को सर्वाधिक 13 प्रस्तावों की मंजूरी मिली है. इसके अलावा ठाणे, धुले, रायगढ़, पुणे, रत्नागिरी, अहिल्यानगर, छत्रपति संभाजीनगर, हिंगोली और परभणी जैसे जिलों को भी पर्याप्त संख्या में प्रस्ताव स्वीकृत किए गए हैं.
* यवतमाल को केवल चार प्रस्ताव मिलने पर सवाल
विशेष रूप से यवतमाल जिले को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके और राज्य मंत्री इंद्रनील नाईक दोनों इसी जिले से आते हैं. इसके बावजूद यवतमाल की केवल चार आश्रमशालाओं के प्रस्तावों को मंजूरी मिली है. इस मुद्दे को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ताओं ने असंतोष व्यक्त किया है. महाविदर्भ जनजागरण मंच के नितीन रोधे ने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आश्रमशालाओं का आधुनिकीकरण अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने आरोप लगाया कि विदर्भ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी गई.
* सुविधाओं के अभाव पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
गड़चिरोली की घटना के बाद आश्रमशालाओं में सुरक्षा, छात्रावास व्यवस्था, भवनों की स्थिति, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाओं और मूलभूत ढांचे को लेकर गंभीर प्रश्न उठे थे. ऐसे में आश्रमशालाओं के कायाकल्प कार्यक्रम से बड़ी उम्मीदें थीं. हालांकि मंजूर प्रस्तावों के वितरण को लेकर अब क्षेत्रीय संतुलन और प्राथमिकताओं पर बहस शुरू हो गई है. सामाजिक संगठनों का कहना है कि आदिवासी विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि वास्तविक आवश्यकता वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर संसाधनों का न्यायसंगत वितरण किया जाना चाहिए.





