ताड़ोबा की दुनिया में बढ़ी दीवानगी

91 देशों से पहुंचे 21 हजार विदेशी पर्यटक

पिछले वर्ष 3.89 लाख पर्यटकों ने किया ताड़ोबा-अंधारी का भ्रमण
विदेशी मेहमानों को बेहतर अनुभव देने गाइडों को अब जर्मन भाषा का प्रशिक्षण
चंद्रपुर/दि.29 – बाघों के रोमांचक दर्शन, घने जंगल, समृद्ध जैवविविधता और प्राकृतिक अधिवास का अनुभव लेने के लिए दुनिया भर से पर्यटक ताड़ोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प का रुख कर रहे हैं. पिछले वर्ष इस व्याघ्र प्रकल्प में 3 लाख 89 हजार 700 पर्यटक पहुंचे. इनमें 91 देशों के 20 हजार 939 विदेशी पर्यटक शामिल रहे. विदेशी पर्यटकों की यह संख्या ताड़ोबा की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है.
उल्लेखनीय है कि, ताड़ोबा की पहचान केवल बाघों के लिए नहीं है. यहां विविध वन्यजीवों, पक्षियों, वनस्पतियों और प्राकृतिक अधिवास की समृद्धता पर्यटकों को आकर्षित करती है. जंगल सफारी के दौरान प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवन का अनुभव विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण बना हुआ है. विदेशी पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ताड़ोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प ने अपने प्राकृतिक मार्गदर्शकों के भाषाई कौशल को बढ़ाने पर भी जोर दिया है. वनसंरक्षक तथा क्षेत्र संचालक डॉ. प्रभु काय शुक्ला के मार्गदर्शन में गाइडों के लिए अंग्रेजी और जर्मन भाषा का विशेष संवादात्मक प्रशिक्षण आयोजित किया गया. कोर क्षेत्र के महिला प्राकृतिक मार्गदर्शकों के लिए 2 जुलाई से 8 अगस्त तक मोहर्ली में अंग्रेजी संवादात्मक प्रशिक्षण आयोजित किया गया. इसमें 14 महिला गाइड शामिल हुईं. इसके बाद 17 से 27 अगस्त तक मोहर्ली और मदनापुर में महिला एवं पुरुष प्राकृतिक मार्गदर्शकों के लिए जर्मन भाषा का प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें 42 गाइड सहभागी हुए.
जर्मन भाषा के प्रशिक्षण का उद्देश्य विदेशी पर्यटकों के साथ संवाद को सहज बनाना और उन्हें जंगल, वन्यजीव तथा ताड़ोबा की जैवविविधता के बारे में उनकी परिचित भाषा में अधिक प्रभावी जानकारी उपलब्ध कराना है. इससे गाइड और पर्यटकों के बीच संवाद बेहतर होने के साथ सफारी का अनुभव भी अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है. ताड़ोबा में पर्यटकों की बढ़ती संख्या जहां क्षेत्र की पर्यटन क्षमता और लोकप्रियता को दर्शाती है, वहीं इसके साथ वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है. पर्यटन को बढ़ावा देते समय जंगल के प्राकृतिक अधिवास पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और वन्यजीवों की सुरक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए शाश्वत पर्यटन की दिशा में संतुलित प्रयास जरूरी होंगे.
दुनिया के अलग-अलग देशों से बढ़ती पर्यटकों की आमद ने ताड़ोबा को अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव पर्यटन के प्रमुख केंद्रों में और मजबूती से स्थापित किया है. अब विदेशी पर्यटकों की संख्या के साथ उन्हें स्थानीय स्तर पर बेहतर और जिम्मेदार पर्यटन अनुभव उपलब्ध कराने पर भी प्रकल्प का जोर है.

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