साहिल वाकोडे आत्महत्या प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग

समाजभूषण राजूजी नन्नावरे ने मुख्यमंत्री व केंद्र सरकार को सौंपा ज्ञापन

पासपोर्ट नन्नावरे नाम से पंड्या मेल पर
अमरावती/दि.1 – मुंबई आईआईटी के बी.टेक. द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाने तथा जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग समाजभूषण राजूजी नन्नावरे ने की है. नन्नावरे एकता रैली आयोजन समिति, अमरावती के मुख्य संयोजक तथा ‘भीमपर्व’ के प्रधान संपादक हैं.
इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा केंद्र सरकार को लिखित ज्ञापन सौंपा गया है. ज्ञापन में कहा गया है कि इस मामले को केवल एक छात्र की आत्महत्या की घटना तक सीमित न रखते हुए देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक दबाव और कथित जातीय भेदभाव जैसे व्यापक मुद्दों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए.
* 18 सितंबर को हुई थी साहिल की मौत
ज्ञापन के अनुसार साहिल वाकोडे की 18 सितंबर 2026 को आईआईटी मुंबई के पवई परिसर में मौत हुई थी. परिवार की ओर से जातीय उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और धमकाए जाने के आरोप लगाए गए हैं. परिवार ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला सहित संस्थान से जुड़े अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. नन्नावरे ने कहा कि इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामले में पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया है और जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है. साहिल की मौत से पहले परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल का मुद्दा भी सामने आया था. सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है. ऐसे में पूरे घटनाक्रम की वस्तुनिष्ठ जांच किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है.
* आरोपों की सच्चाई निष्पक्ष जांच से सामने आए
नन्नावरे ने कहा कि परिवार द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, इसका अंतिम निर्णय निष्पक्ष जांच के बाद ही होना चाहिए. किसी भी विद्यार्थी को जाति, सामाजिक पृष्ठभूमि अथवा किसी अन्य कारण से अन्याय का सामना न करना पड़े, इसके लिए प्रभावी व्यवस्था आवश्यक है. उन्होंने कहा कि देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को सुरक्षित, भेदभावमुक्त और मानसिक रूप से सहयोग देने वाला वातावरण मिलना चाहिए. विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, प्रतिस्पर्धा, मानसिक तनाव तथा कथित सामाजिक या जातीय भेदभाव से जुड़ी शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को प्रभावी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए.
* निष्पक्ष समिति गठित करने की मांग
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि साहिल वाकोडे मामले की मौजूदा जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, तो संबंधित पक्षों से स्वतंत्र व्यक्तियों को शामिल कर नई जांच समिति गठित की जाए. जांच पूरी तरह पारदर्शी तरीके से कराई जाए. परिवार की शिकायत में लगाए गए आरोपों की गहन जांच कर, यदि अनुसंधान के दौरान अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम अथवा भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अपराध सिद्ध करने योग्य साक्ष्य सामने आते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए. हालांकि, किसी को आरोपी ठहराने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पूरा पालन करते हुए निष्पक्ष जांच किए जाने पर भी जोर दिया गया है.
* उच्च शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत
नन्नावरे ने कहा कि देशभर से विद्यार्थी खखढ, विश्वविद्यालयों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा के लिए पहुंचते हैं. कई विद्यार्थी आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों के बावजूद घर से दूर रहकर अपने भविष्य का निर्माण करते हैं. ऐसे में संस्थानों में सुरक्षा, समुपदेशन, शिकायत निवारण, भेदभाव विरोधी व्यवस्था तथा विद्यार्थियों को बिना भय अपनी बात रखने का अवसर देने वाली प्रणाली को मजबूत किया जाना आवश्यक है. उन्होंने केंद्र सरकार से उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी नीति और निगरानी व्यवस्था विकसित करने की मांग की. साथ ही साहिल वाकोडे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता सामने लाने तथा जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की.

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