प्रा. मनोहर कवीश्वर का ‘गीत गोविंद’ नए रूप में अमरावती में
‘गीत मनोहर’ का सातवां प्रयोग 11 सितंबर को

* अब तक 2000 से अधिक दर्शकों ने सराहा
अमरावती/दि.8- अमरावती के प्रसिद्ध संगीतगुरु, गीतकार एवं संगीतकार दिवंगत प्रा. मनोहर कवीश्वर की लोकप्रिय सांगीतिक रचना ‘गीत गोविंद’ को कई दशकों बाद नए रूप में फिर से मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है. ‘कलावधान आर्ट्स, पुणे’ के माध्यम से पुनर्जीवित की गई इस प्रस्तुति का ‘गीत मनोहर’ नाम से सातवां प्रयोग 11 सितंबर को अमरावती में होगा. कार्यक्रम शुक्रवार, 11 सितंबर को शाम 6.30 बजे पीडीएमसी कॉलेज परिसर स्थित श्री छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह, पंचवटी, अमरावती में आयोजित किया जाएगा. कार्यक्रम सभी संगीतप्रेमियों के लिए खुला रहेगा. प्रा. मनोहर कवीश्वर मराठी सांस्कृतिक, भाषाई, संगीत और नाट्य क्षेत्र में बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे. उनकी अनेक लोकप्रिय रचनाओं में ‘गीत गोविंद’ का विशेष स्थान है. वर्ष 1960 से इस सांगीतिक रचना ने रसिकों के मन पर अपनी छाप छोड़ी. योगेश्वर श्रीकृष्ण के जीवन और व्यक्तित्व को संगीत, काव्य एवं नाट्य के माध्यम से प्रस्तुत करने वाली इस संहिता को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास अब किया जा रहा है.
* 25 वर्ष पुराना संस्कार बना प्रेरणा
इस पुनरुज्जीवन के पीछे अमरावती से जुड़े कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है. आल्हाद आलशी, आलोक आलशी और सृजना मुले-कथलकर मूल रूप से अमरावती के हैं. तीनों ने करीब 25 वर्ष पहले स्कूल के दिनों में प्रा. कवीश्वर का ‘गीत गोविंद’ का प्रयोग देखा था. उस समय पड़ा सांगीतिक संस्कार वर्षों बाद इस पुनरुज्जीवन के रूप में सामने आया. अमरावती की वरिष्ठ गायिका कुमुदताई हिरूरकर का भी इस प्रकल्प में महत्वपूर्ण योगदान रहा. उन्होंने ‘गीत गोविंद’ के पहले प्रयोग से लेकर करीब 20 वर्षों तक प्रा. कवीश्वर के साथ इसके प्रयोग प्रस्तुत किए. वर्ष 2008 से आल्हाद और आलोक उनसे संगीत सीखने लगे. इसी दौरान कुमुदताई ने उन्हें ‘गीत गोविंद’ की कुछ रचनाएं सिखाईं, जिससे दोनों भाइयों के मन में इस संहिता को दोबारा मंच पर लाने की इच्छा मजबूत हुई. वर्ष 2015 में अमरावती में आयोजित ‘पाडवा पहाट’ कार्यक्रम में आल्हाद, आलोक और प्रा. डॉ. जयश्री वैष्णव ने ‘गीत गोविंद’ के ‘चिंधी’ प्रवेश को गायन, वादन, नाट्य और नृत्य के साथ प्रस्तुत किया था. इसे रसिकों की अच्छी सराहना मिली थी.
* पुराने रिकॉर्ड और नोटेशन से तैयार हुई प्रस्तुति
आल्हाद और आलोक के पुणे में स्थायिक होने के बाद समान विचारधारा वाले कलाकारों के साथ उनका सांगीतिक संपर्क बढ़ा. इसके बाद ‘गीत गोविंद’ को पुनर्जीवित करने का प्रयास शुरू हुआ. प्रा. कवीश्वर की पुत्री वीणा कवीश्वर-सत्यानाथन से प्रकाशित संहिता की प्रति प्राप्त हुई. साथ ही अमरावती नगर वाचनालय से प्रा. कवीश्वर की आवाज की कुछ वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मिलीं. रिकॉर्डिंग में कुछ हिस्से अधूरे होने के कारण प्रा. डॉ. जयश्री वैष्णव के प्रा. मनोहर कवीश्वर पर किए गए शोधकार्य से आवश्यक नोटेशन प्राप्त की गईं. इसके आधार पर संहिता के अधूरे हिस्सों को पूरा कर प्रस्तुति को नया स्वरूप दिया गया. इस पुनरुज्जीवन प्रक्रिया में हार्मोनियम वादक सौमित्र क्षीरसागर और तबला वादक पार्थ ताराबादकर की महत्वपूर्ण भूमिका रही. सभी कलाकारों ने एक वर्ष से अधिक समय तक अभ्यास कर ‘गीत गोविंद’ को मूल भाव और स्वरूप के साथ नए अंदाज में तैयार किया.
* छह प्रयोगों में 2000 से अधिक दर्शकों की सराहना
मार्च 2024 में पुणे में 300 से अधिक दर्शकों की मौजूदगी में पुनर्जीवित ‘गीत मनोहर’ का पहला प्रयोग हुआ. इसके बाद नागपुर सहित विभिन्न स्थानों पर हुए प्रयोगों को भी उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला. अब तक छह प्रयोगों में 2000 से अधिक रसिकों ने प्रस्तुति का आनंद लिया है, जबकि कई अवसरों पर दर्शकों ने ‘वन्स मोअर’ की मांग भी की. अब प्रा. मनोहर कवीश्वर की जन्मभूमि और कर्मभूमि अमरावती में पहली बार ‘गीत मनोहर’ का प्रयोग प्रस्तुत किया जा रहा है. प्रस्तुति में आल्हाद आलशी, आलोक आलशी, मृण्मयी जोशी, अश्विन चितले, सृजना मुले-कथलकर, सौमित्र क्षीरसागर, पार्थ ताराबादकर, आदित्य आपटे, वेधा पोल, सिद्धी देशपांडे और रिया पितले सहभागी होंगे. सृजना मुले-कथलकर ने प्रा. मनोहर कवीश्वर से संगीत की शिक्षा ली थी और उनके साथ संगीत नाटक में काम करने का अवसर भी उन्हें मिला था. आयोजकों ने अमरावती के संगीतप्रेमियों और प्रा. मनोहर कवीश्वर की कला से जुड़ी यादों को संजोए रसिकों से परिवार एवं मित्रों के साथ कार्यक्रम में उपस्थित रहकर ‘गीत मनोहर’ का अनुभव लेने का आह्वान किया है.





