सफाई ठेका रिकॉल करना रहेगा सही, वरना मनपा पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

हाईकोर्ट के फैसले पश्चात पार्षद अनिल अग्रवाल ने उठाई मांग

* रेड्डी को ठेका देने पर सालाना 20 से 22 करोड़ रुपए अतिरिक्त भार का दावा
* एकल ठेके की बजाए झोन निहाय सफाई ठेका पद्धती को बताया सही
अमरावती/दि.9- कोणार्क इंफ्रास्ट्रक्चर को दिए गए कचरा संकलन एवं परिवहन से जुड़े ठेके को लेकर नागपुर खंडपीठ के फैसले के बाद अमरावती मनपा में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं. कांग्रेस पार्षद अनिल अग्रवाल ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब कोणार्क के स्थान पर पी. गोपीनाथा रेड्डी को ठेका देना ही एकमात्र विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. उनके अनुसार, मनपा को मौजूदा निविदा प्रक्रिया को रिकॉल कर नए सिरे से निविदा जारी करनी चाहिए, अन्यथा रेड्डी कंपनी की ऊंची दरों के कारण मनपा पर आने वाले वर्षों में भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है. पार्षद अनिल अग्रवाल ने दावा किया कि रेड्डी कंपनी की दरें कोणार्क की तुलना में प्रति टन 2 हजार रुपए से अधिक थीं. उनके अनुसार, यदि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद रेड्डी को ही ठेका दिया जाता है तो मनपा को मौजूदा अनुमानित करीब 350 करोड़ रुपए की बजाय 550 से 600 करोड़ रुपए तक का भुगतान करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि इससे मनपा पर सालाना लगभग 20 से 22 करोड़ रुपए का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ने की संभावना है.
मनपा के सफाई ठेके को लेकर पार्षद अनिल अग्रवाल ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद मनपा को जल्दबाजी में किसी एक कंपनी को ठेका देने के बजाय पूरे मामले को व्यापक दृष्टिकोण से देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा निविदा की प्रक्रिया ही विवादित हो चुकी है और एकमात्र पात्र बोलीदाता को ठेका देने से मनपा पर अत्यधिक आर्थिक भार पड़ने की स्थिति बनती है, तो नए सिरे से निविदा आमंत्रित करना अधिक व्यावहारिक और जनहितकारी विकल्प हो सकता है. उनके अनुसार, नई निविदा में ऐसी शर्तें रखी जानी चाहिए, जो एक ओर शहर की वास्तविक सफाई जरूरतों को पूरा करें और दूसरी ओर मनपा के आर्थिक हितों की भी रक्षा करें. उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धी दरों में निविदा होने से मनपा को बेहतर आर्थिक विकल्प मिल सकता है.
पार्षद अनिल अग्रवाल ने सात वर्षीय एकल एवं संयुक्त सफाई ठेके की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि शहर के पांचों जोन की सफाई व्यवस्था को एक बड़े ठेके में समेटने के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दिया. उन्होंने पुरानी व्यवस्था की तर्ज पर जोनवार सफाई ठेके दिए जाने की मांग की. उनका कहना है कि अलग-अलग जोन के लिए अलग ठेकेदार होने से जिम्मेदारी तय करना आसान होगा, निगरानी अधिक प्रभावी होगी और किसी एक कंपनी पर पूरे शहर की सफाई व्यवस्था निर्भर नहीं रहेगी. पार्षद अग्रवाल के मुताबिक, बड़े और एकल ठेके में किसी एक ठेकेदार की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर उसका असर पूरे शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ सकता है. इसके विपरीत जोनवार व्यवस्था में खराब प्रदर्शन करने वाले ठेकेदार पर स्थानीय स्तर पर तत्काल कार्रवाई की जा सकती है.
पार्षद अनिल अग्रवाल ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद यदि मनपा पी. गोपीनाथ रेड्डी की बोली पर विचार करती है, तो केवल वित्तीय दर देखना पर्याप्त नहीं होगा. कंपनी को निविदा की सभी तकनीकी एवं अनिवार्य शर्तें पूरी करनी होंगी. उन्होंने कहा कि वाहनों की संख्या, उनका प्रकार, आरसी, स्वामित्व, आवश्यक मशीनरी, मनुष्यबल तथा अन्य तकनीकी मानकों की दोबारा जांच करनी होगी. उनके अनुसार, अदालत ने किसी कंपनी को सीधे ठेका देने का आदेश नहीं दिया है, इसलिए मनपा को न्यायालय के निर्देश के अनुरूप प्रत्येक पात्रता का स्वतंत्र रूप से परीक्षण करना होगा.
* पहली आमसभा में उठाए थे सवाल
पार्षद अनिल अग्रवाल ने कहा कि, उन्होंने 28 फरवरी को हुई मनपा की पहली विशेष आमसभा में ही कोणार्क को दिए गए ठेके की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे. उनके अनुसार, उन्होंने उस समय आरोप लगाया था कि सात वर्ष के लिए इतने बड़े संयुक्त सफाई ठेके की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और एक ही कंपनी को इतना बड़ा ठेका दिए जाने के औचित्य पर प्रशासन को स्पष्टीकरण देना चाहिए. उनका कहना है कि उस समय मनपा में निर्वाचित सभागृह अस्तित्व में आने वाला था, इसके बावजूद तत्कालीन मनपा आयुक्त एवं प्रशासक सौम्या शर्मा चांडक के कार्यकाल में जनवरी के अंतिम सप्ताह में प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया. अग्रवाल ने इसे जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताते हुए उस समय भी आपत्ति जताई थी.
* स्वच्छता अभ्यास समिति की रिपोर्ट का हवाला
पार्षद अनिल अग्रवाल ने बताया कि, आमसभा में उठे सवालों के बाद सर्वदलीय स्वच्छता अभ्यास समिति गठित की गई थी और वे स्वयं इस समिति के सदस्य थे. उनका दावा है कि समिति के अध्ययन में निविदा की शर्तों और बाद में किए गए करार के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर सामने आए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों और दायित्वों में बदलाव किया गया तथा इससे ठेकेदार को लाभ पहुंचने की स्थिति बनी. अग्रवाल के अनुसार, समिति ने मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि आमसभा द्वारा समिति की रिपोर्ट स्वीकार किए जाने और कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों या जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
* पार्ट-बी को मंजूरी का भी किया था विरोध
पार्षद अनिल अग्रवाल ने दावा किया कि बाद में स्थायी समिति द्वारा सफाई ठेके के पार्ट-बी को मंजूरी दिए जाने के समय भी उन्होंने और अन्य पार्षदों ने इसका विरोध किया था. उनके अनुसार, विवाद और शिकायतों के बीच पार्ट-बी को मंजूरी मिलने से कोणार्क कंपनी के लंबित भुगतान का रास्ता भी साफ हुआ. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के मौजूदा फैसले के बाद अब पूर्व में उठाए गए सवालों की दोबारा जांच जरूरी हो गई है.
* सिर्फ ठेका रद्द करना पर्याप्त नहीं, जवाबदेही तय हो
पार्षद अनिल अग्रवाल ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद केवल कोणार्क का करार रद्द करना पर्याप्त नहीं होगा. उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों ने निविदा प्रक्रिया से लेकर करार तक महत्वपूर्ण निर्णय लिए, उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई ठेके के माध्यम से करोड़ों रुपए के हित साधने की कोशिश की गई. पार्षद अनिल अग्रवाल ने मांग की कि दस्तावेजों, तकनीकी मूल्यांकन, निविदा प्रक्रिया और अंतिम करार में हुए बदलावों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए.
* मनपा आयुक्त डॉ. गोंदावले पर जताया भरोसा
कांग्रेस पार्षद अनिल अग्रवाल ने मौजूदा मनपा आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले की कार्यशैली की सराहना करते हुए उन्हें उनके पूर्ववर्तियों से अलग बताया. उन्होंने कहा कि वर्तमान आयुक्त प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता और व्यवस्था सुधारने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद आयुक्त गोंदावले पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा करेंगे और जहां भी प्रशासनिक या कानूनी स्तर पर जिम्मेदारी सामने आएगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई करेंगे. उन्होंने कहा कि अब मनपा के सामने केवल यह चुनौती नहीं है कि अगला ठेका किस कंपनी को दिया जाए. असली चुनौती यह है कि ऐसी निविदा व्यवस्था बनाई जाए जिसमें शहर की सफाई बेहतर हो, मनपा पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और भविष्य में निविदा की शर्तों तथा अंतिम करार के बीच विवाद की स्थिति पैदा न हो.

Back to top button