यशोमती ठाकुर ने वन विभाग को दिया आंदोलन का अल्टीमेटम
वन्य प्राणियों के आतंक से किसान परेशान

* श्यामाप्रसाद मुखर्जी खेत कुंपण योजना का पोर्टल तत्काल शुरू करने की मांग
* फसल नुकसान का मुआवजा देने की भी मांग
अमरावती/दि.9 – तिवसा विधानसभा क्षेत्र में वन्य प्राणियों के बढ़ते उपद्रव से किसान परेशान हैं. खेतों में खड़ी फसलों को वन्य प्राणियों द्वारा नुकसान पहुंचाए जाने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. फसल बचाने के लिए किसानों को दिन-रात खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है. इसके बावजूद वन्य प्राणियों के बढ़ते आतंक के कारण फसलों को नुकसान पहुंच रहा है. इस गंभीर समस्या को लेकर कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर किसानों के साथ अमरावती स्थित मुख्य वनरक्षक कार्यालय पहुंचीं और वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा की.
यशोमती ठाकुर ने मुख्य वनरक्षक ज्योति बॅनर्जी के कक्ष में किसानों के साथ बैठक की. इस दौरान किसानों ने वन्य प्राणियों के कारण फसलों को हो रहे नुकसान और अपनी परेशानियों से अधिकारियों को अवगत कराया. यशोमती ठाकुर ने कहा कि किसानों ने बड़ी मेहनत, समय और पैसा लगाकर फसलें तैयार की हैं, लेकिन वन्य प्राणियों के खेतों में घुसने से उनकी खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ ही खेती को लेकर असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने वन विभाग से मांग की कि वन्य प्राणियों के उपद्रव वाले क्षेत्रों में तत्काल प्रभावी उपाय किए जाएं. किसानों की फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं तथा जिन क्षेत्रों में लगातार वन्य प्राणियों का आवागमन हो रहा है, वहां विशेष निगरानी बढ़ाई जाए.
* खेत कुंपण योजना का पोर्टल कई महीनों से बंद
बैठक के दौरान श्यामाप्रसाद मुखर्जी खेत कुंपण योजना का पोर्टल पिछले कई महीनों से बंद होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया. किसानों का आरोप है कि पोर्टल बंद रहने के कारण वे योजना के तहत खेतों में सुरक्षा बाड़ लगाने के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. एक ओर वन्य प्राणियों का उपद्रव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर खेतों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध योजना का लाभ लेने में किसानों को परेशानी हो रही है. यशोमती ठाकुर ने वन विभाग के अधिकारियों से खेत कुंपण योजना का पोर्टल तत्काल शुरू करने की मांग की. उन्होंने कहा कि वन्य प्राणियों से फसलों को बचाने के लिए खेतों में सुरक्षा बाड़ उपलब्ध कराना आवश्यक है. पात्र किसानों को योजना का लाभ जल्द से जल्द दिया जाना चाहिए, ताकि उनकी फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.
* नुकसानग्रस्त किसानों को मिले उचित भरपाई
यशोमती ठाकुर ने वन्य प्राणियों के हमलों से फसलें बर्बाद होने वाले किसानों को उचित नुकसान भरपाई देने की मांग भी की. उन्होंने कहा कि फसल तैयार करने में किसानों को काफी खर्च करना पड़ता है. ऐसे में वन्य प्राणियों द्वारा फसल नष्ट किए जाने से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है. इसलिए नुकसान का तत्काल आकलन कर प्रभावित किसानों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों से किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण करने और समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई करने की मांग की.
* एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन
वन्य प्राणियों के बढ़ते उपद्रव को लेकर यशोमती ठाकुर ने वन विभाग को आंदोलन का अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर वन्य प्राणियों के उपद्रव को नियंत्रित करने के लिए ठोस उपाय नहीं किए गए, तो किसानों के साथ वन विभाग कार्यालय में आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसानों की समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. किसानों की फसल और आजीविका की सुरक्षा के लिए वन विभाग को तत्काल प्रभावी कदम उठाने होंगे. खेत कुंपण योजना का पोर्टल शुरू करने के साथ ही नुकसानग्रस्त किसानों को राहत देना भी जरूरी है.
* किसानों में भी नाराजगी
इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे. वन्य प्राणियों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने, खेतों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने तथा खेत कुंपण योजना का पोर्टल बंद होने को लेकर किसानों में नाराजगी दिखाई दी. किसानों ने मांग की कि वन विभाग खेतों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था करे और वन्य प्राणियों के कारण हुए नुकसान की भरपाई तत्काल की जाए. किसानों ने उम्मीद जताई कि वन विभाग उनकी समस्याओं पर गंभीरता से कार्रवाई करेगा. हालांकि, एक सप्ताह में ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर आंदोलन की चेतावनी के बाद अब वन विभाग की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं.
इस अवसर पर यशोमति ठाकुर के साथ उपज मंडी के सभापति हरिश मोरे, पंकज देशमुख, श्रीकांत बोंडे, वैभव वानखडे, गजानन देशमुख, रणजीत तिडके, राजू कुर्हेकर, अभय देशमुख, शैलेश कालबांडे, सतीश गोटे, आशुतोष देशमुख, डॉ. नरेंद्र निर्मल, दिलीप सोनवने, रामचंद्र कांडलकर, गंगाधर श्रीखंडे, अरुण तडस, सर्वेश खांडे, हर्षल देशमुख, मुरलीधर डहाणे, अतुल यावलीकर, मनीष धुर्वे, बाबूराव उभाड, राजकुमार इंगले, अल्पेश कालबांडे, मनीष भुयार, दीपक पडलकर, शरद तालन, संजय चौधरी, विश्वजीत बाखडे, वासुदेव चोपकर, यश करडे समेत किसान व कार्यकर्ता बडी संख्या में उपस्थित थे





