दिनेश आवारे का अंतिम संस्कार पुलिस सुरक्षा में हुआ
बेटी को वन विभाग में कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी मिलने के बाद ग्रामीणों ने उठाया शव

अमरावती/दि.9 – बाघ के हमले में मारे गए शिरजगांव कस्बा निवासी किसान दिनेश आवारे के अंतिम संस्कार को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों ने वन विभाग के परतवाड़ा फॉरेस्ट रेंज ऑफिस में करीब डेढ़ घंटे तक धरना दिया. ग्रामीणों की मांग थी कि मृतक की बेटी विशाखा को वन विभाग में नौकरी दी जाए. मांग पूरी होने तक पोस्टमार्टम के बाद दिनेश आवारे का शव अचलपुर उपजिला अस्पताल से नहीं ले जाने और अंतिम संस्कार नहीं करने का निर्णय ग्रामीणों ने लिया था. आखिरकार वनविभाग ने मृतक किसान की बेटी को वनविभाग में नौकरी देने का नियुक्ति पत्र सौंपा, तब मामला शांत हुआ और ग्र्रामीणों ने शव उठाकर शोकाकुल वातावरण में अंत्येष्टि की.
ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को दिनेश आवारे की बेटी विशाखा का नौकरी के लिए आवेदन सौंपा. इस दौरान एनसीपी नेता सुरेखा ठाकरे भी मौजूद थीं. अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद विशाखा को वन विभाग में कॉन्ट्रैक्ट पर काम देने का निर्णय लिया गया. फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर ने ग्रामीणों को लिखित पत्र भी सौंपा. इस पत्र पर अमरावती के उपवन संरक्षक के हस्ताक्षर बताए गए हैं. लिखित आश्वासन मिलने के बाद दिनेश आवारे का शव अचलपुर उपजिला अस्पताल से शिरजगांव कस्बा ले जाया गया. इसके बाद पुलिस सुरक्षा के बीच उनका अंतिम संस्कार किया गया. अंतिम संस्कार में सुरेखा ठाकरे के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और परिसर के नागरिक उपस्थित रहे.
* वनपाल का अलग कार्यालय नहीं
वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं. वनरक्षक पूरे सर्कल का प्रभारी होता है, लेकिन उसके मुख्यालय पर अलग आवास और कार्यालय की व्यवस्था नहीं है. वन अधिकारियों के अनुसार वनरक्षक अपने घर से ही कामकाज देखता है. परतवाड़ा वनरक्षक का भी स्वतंत्र कार्यालय नहीं है. बताया गया कि परतवाड़ा वनरक्षक का कार्यालय वन मजदूरों के लिए बनाए गए शेड पर कब्जा कर तैयार किया गया है.





