बडनेरा तालाब में दो बच्चों की मौत पर प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

शिवसेना नेता प्रविण हरमकर ने जिम्मेदार अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग उठाई

अमरावती /दि.3- बडनेरा क्षेत्र स्थित तालाब में दो बच्चों की डूबने से हुई मौत के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के शहर प्रमुख प्रविण हरमकर ने इस घटना के लिए संबंधित सिंचन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने तथा निलंबन की मांग की है.
शिवसेना उबाठा के शहर प्रमुख प्रविण हरमकर ने जारी बयान में कहा कि इससे पहले मार्डी रोड स्थित गोडे मेडिकल कॉलेज के समीप तालाब में चार लोगों की डूबने से मौत हुई थी. उस घटना के बाद 16 जून 2026 को उन्होंने संबंधित विभागों को ज्ञापन देकर सभी तालाबों और जलाशयों के आसपास सुरक्षा उपाय करने, चेतावनी फलक लगाने तथा आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की थी. उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में उर्ध्व वर्धा सिंचन मंडल द्वारा सितंबर 2026 में संबंधित विभागों को पत्र जारी कर अपने अधिकार क्षेत्र के सभी प्रकल्पों और जलाशयों पर खतरे के संकेतक फलक लगाने तथा सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे. इसके बावजूद बडनेरा तालाब परिसर में न तो पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई, न ही सुरक्षा घेरा अथवा चेतावनी बोर्ड लगाए गए.
पूर्व पार्षद प्रविण हरमकर का आरोप है कि विभागीय निर्देशों का पालन नहीं किए जाने के कारण तालाब आज भी असुरक्षित बना हुआ है. उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए गए होते तो दो बच्चों की जान बचाई जा सकती थी. उन्होंने यह भी कहा कि जिले में जलसंकट की स्थिति बनी हुई है और शहर में दो से तीन दिन के अंतराल से पानी की आपूर्ति हो रही है. ऐसे समय में जलाशयों और तालाबों की सुरक्षा की अनदेखी करना नागरिकों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है. उन्होंने यह मांग भी की है कि जिले के सभी तालाबों, जलाशयों और सिंचन प्रकल्पों के आसपास तत्काल सुरक्षा घेरा, चेतावनी फलक और निगरानी व्यवस्था स्थापित की जाए. साथ ही इस मामले में कथित लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए.
उल्लेखनीय है कि बडनेरा तालाब में दो बच्चों की डूबने से हुई मौत के बाद स्थानीय नागरिकों में भी गहरा रोष व्याप्त है तथा तालाबों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

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