श्रीमद भागवत कथा में सभी वेदों का सार है
पं. बलदाउ त्रिपाठी का प्रतिपादन

सतीधाम मंदिर में पितृ पक्ष निमित्त श्रीमद भागवत कथा
अग्रवाल परिवार का आयोजन
अमरावती/ दि. 6- श्रीमद्बागत कथा सुनने से मुत्यु का भय दूर होता है. वह हदय को जागृत कर मोक्ष का मार्ग दिखाती है. मनुष्य को मोक्ष व शांति की प्राप्ति होती है. इसलिए श्रीमद भागवत को सभी वेदों का सार कहा गया है. यह ऐसा वृक्ष है, जो हमें वेद रूपी छांव दे रहा है. जिसके सानिध्य में निरंतर आने से हमें मोक्ष की अनुभूति का एहसास होता है. यह आते कथावाचक चित्रकूट के ओजस्वी कथा प्रवक्ता भागवताचार्य पं. बलदाउ त्रिपाठी ने कही. स्थानीय रायली फ्लॉट स्थित सतीधाम मंदिर में रविवार 4 अक्तुबर से पितृपक्ष निमित्त प्रतिष्ठित करोबारी स्व. अमरचंद मिचीलाल अग्रवाल की स्मृति में अग्रवाल परिवार द्बारा श्रीमद भागवत कथा का 10 अक्तुबर तक आयोजन किया है. भक्त कथावाचक चित्रकूट के ओजस्वी कथा प्रवक्ता भागवताचार्य पं. बलदाउ त्रिपाठी के मुखारविंद से कथा श्रवण कर रहे है. कथा के पहले दिन की शुरूआत भव्य शोभायात्रा व कलंश यात्रा से की गई. इस अवसर पर कथा के यजमान सुनील मदनलाल अग्रवाल, दीपक अमरचंद अग्रवाल, नताशा अग्रवाल विजया अग्रवाल की उपस्थिति में तथा कथावाचक चित्रकुट के ओजस्वी कथा प्रवक्ता भागवताचार्य पं. बलदाउ त्रिपाठी के मार्गदर्शन में यह आयोजन किया गया. सुबह 9 बजे सतीधाम मंदिर परिसर में सैंकडों महिलाओं ने कलश लेकर इस शोभायात्रा में सहभाग लिया था. पश्चात सतीधाम मंदिर में यात्रा का समापन किया गया. दोपहर 2.30 बजे से कथा की शुरूआत की गई. हर दिन दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक चलनेवाली इस कथा में कथावाचक चित्रकूट के ओजस्वी कथा प्रवक्ता भागवताचाय्र पं. बलदाउ त्रिपाठी ने पहले दिन भागवत कथा का महात्म, मंगलाचार, शुक्रदेव आगमन एवं चतुत्श्लोक भागवत का वर्णन किया. इस समय उन्होंने कथा की शुरूआत भागवत के मंगलाचरण ,प्रथ श्लोक सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादि हेतवे..से की. जिसमें भगवान के सच्चिदानंद स्वरूप और उनके गुणों को नमन किया गया. तुंगभद्रा नदी के किनारे बसे एक नगर की कथा आती है. जिसमें आत्मदेव नामक ब्राम्हण उसकी बुरी पत्नी धुंधली और उसके दुष्ट पुत्र धुंधकारी का प्रसंग सुनाया. इसी प्रसंग में ज्ञानी पुत्र गोकर्ण और धुंधकारी के प्रेत योनि में जाने की कथा आती है. जिसके उध्दार के लिए सात दिवसीय भागवत कथा का महत्व बताया गया. भागवत कथा सुनने के फल, उसके महत्व और महिला का वर्णन किया गया. उन्होंने यह भी बताया कि कलियुग में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की स्थिति तथा देवार्षि नारद और भक्ति के मिलन की कथा सुनाई जाती है.
जो हमें भक्ति से मुक्ति तक का मार्ग दिखाता है. निकुंज में बिराजे घनश्याम राधे-राधे .. जैसे भजनों के साथ पहले दिन के कथा समापन किया गया. आयोजनक परिवार सुनील मदनलाल अग्रवाल, दिपक अमरचंद अग्रवाल, पंकज अमरचंद अग्रवाल के साथ डिंपल अग्रवाल, सचिन अग्रवाल, मधुकर राणे, श्रीचंद पंजाबी, अनिल बजाज, गोपाल भागचंदानी, हरेश सोमैय्या , दिलीप छाबरिया, वर्षा भागचंदानी, किरण बजाज, निलीमा राणे, रमेश जयपुरिा, स्वप्निल अग्रवाल, राहुल ढोक, विश्वास ढोक, निलेश शिरभाते, दिलीप बजाज, नेहा शिरभाते, शिखा ढोक, प्रिती ढोक, निकिता बजाज, श्रृति अग्रवाल, संगीता अग्रवाल, पुनम अग्रवाल, संकेत अग्रवाल, अंजु चौधरी, अनुराधा गाडोदिया, उषा निर्बाण, संतोष पडियार, सरोज जयपुरिया, नेहा कुलटे, पंकज लोया, विजु अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, कन्नु पोदार, ज्योति पोदार, आरती अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, सुनीता झुनझुनवाला, कीर्ति सेतिया, मंजु केडिया, ममता जयपुरिया, प्रीती जयपुरिया, शोभा वेलकर, बिमला गोयल, राजेश गोयल, सुधा गोयल, अनिल गोयल, आदित्य राजपुरिया, इशिका राजपुरिया, कविता खेतान, मनीष बाछुका, रीना बाछुका, मनीष सराफ, काजल देवडा, आदिती गोयल, सविता गोयल, प्रभा अग्रवाल के साथ बडी संख्या में भक्त उपस्थित थे.





