सूखे के बीच चारे की किल्लत, पशुपालकों और गौशालाओं ने प्रशासन से राहत की मांग की

युनायटेड रिपब्लिकन फोरम ने जिलाधीश को सौंपा ज्ञापन

अमरावती /दि.8- जिले में सूखे की स्थिति के चलते पशुपालकों, किसानों, गौशालाओं और गौ रक्षा संगठनों के सामने पशुओं के चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. इस समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन से चारे के परिवहन पर लगाई गई पाबंदियों में तत्काल ढील देने तथा पशुओं के लिए आवश्यक चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग युनायटेड रिपब्लिकन फोरम ने जिलाधीश के नाम उपजिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में की है.
इस संबंध में युनायटेड रिपब्लिकन फोरम के अध्यक्ष डॉ. अलिम पटेल के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय को दिए गए निवेदन में कहा गया है कि महाराष्ट्र सहित अमरावती जिले में सूखे की स्थिति के कारण पशुओं के लिए सोयाबीन, तुअर और अन्य फसलों से मिलने वाला कुटार बेहद महत्वपूर्ण हो गया है. ऐसे समय में चारे की आपूर्ति और परिवहन पर प्रतिबंध लगाए जाने से पशुपालकों तथा गौशालाओं के सामने परेशानी और बढ़ गई है.
* चारा परिवहन को आवश्यक अनुमति देकर प्रतिबंध से मुक्त करने की मांग
निवेदन में मांग की गई है कि पशुपालकों, गौशालाओं तथा गौ रक्षा संगठनों को चारा उपलब्ध कराने वाले व्यापारियों को आवश्यक अनुमति प्रदान की जाए और पशुओं के लिए चारे के परिवहन को प्रतिबंध से छूट दी जाए. प्रशासन द्वारा चारे की आवाजाही पर लगाई गई पाबंदी के कारण चारे की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की बात भी निवेदन में कही गई है. निवेदनकर्ताओं के अनुसार, सूखे के दौरान पशुओं की सुरक्षा और उनके लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. इसलिए चारे की उपलब्धता को प्राथमिकता देते हुए उसकी आपूर्ति पशुपालकों और गौशालाओं तक सुचारु रूप से पहुंचाना आवश्यक है.
* चारे का औद्योगिक और ईंधन के रूप में उपयोग रोकने की मांग
निवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सोयाबीन और तुअर कुटार का एक हिस्सा पशुओं के बजाय औद्योगिक उपयोग में जा रहा है. तैयार गट्टुओं का बाहरी बाजार में ईंधन के रूप में उपयोग किए जाने की शिकायत भी सामने आई है. इसे देखते हुए सूखे की अवधि में सोयाबीन और तुअर कुटार खरीदकर गट्टू तैयार करने वाली कंपनियों पर अस्थायी रोक लगाने तथा संबंधित सप्लायर और ट्रेडरों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की गई है.
* 30 सितंबर के आदेश में संशोधन की मांग
निवेदन में अमरावती जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा 30 सितंबर को जारी जिले से बाहर चारे की आवाजाही पर रोक संबंधी आदेश को रद्द करने अथवा उसमें आवश्यक ढील देने की मांग की गई है. निवेदनकर्ताओं का कहना है कि प्रतिबंध लगाते समय पशुओं के लिए आवश्यक चारे और औद्योगिक अथवा ईंधन के लिए इस्तेमाल होने वाले चारे के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पशुओं के लिए आवश्यक चारे के परिवहन को प्राथमिकता दी जाए और ऐसे व्यापारियों को आवश्यक अनुमति देकर आपूर्ति जारी रखने की व्यवस्था की जाए. साथ ही चारे की कालाबाजारी या औद्योगिक उपयोग की शिकायतों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए. निवेदन में कहा गया है कि चारे को संरक्षित करने और जरूरतमंद पशुपालकों तक उसे पहुंचाने के बीच संतुलन बनाते हुए प्रशासन को तत्काल निर्णय लेना चाहिए, ताकि सूखे की स्थिति में पशुधन को चारे के अभाव में संकट का सामना न करना पड़े.

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