अप्पर वर्धा के पहले आवर्तन से लाभक्षेत्र में 90 किमी तक पहुंचा पानी
80 हजार हेक्टेयर फसल को मिलेगा जीवनदान, कपास और तुअर की फसलों को मिलेगा सिंचाई का सहारा

अमरावती/दि. 10 – बारिश की लंबी खेंच और लौटते मानसून की बेरुखी से सूखने की कगार पर पहुंची कपास और तुअर की फसलों के लिए अप्पर वर्धा परियोजना का पहला सिंचाई आवर्तन राहत लेकर आया है. मोर्शी स्थित अप्पर वर्धा बांध से खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए पानी छोड़ा गया है. इस आवर्तन से अमरावती जिले के पांच और वर्धा जिले के दो तहसीलों में करीब 80 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है. अप्पर वर्धा परियोजना के कार्यकारी अभियंता श्रीकांत उमप के अनुसार, छोड़ा गया पानी लाभक्षेत्र में अंतिम छोर तक पहुंच चुका है. मांग के अनुसार पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि बारिश की कमी से संकट में आई फसलों को बचाया जा सके.
* दाहिनी और बायीं मुख्य नहर से नियंत्रित जलापूर्ति
परियोजना की दाईं मुख्य नहर से 25 घनमीटर प्रति सेकंड और बाईं मुख्य नहर से 6 घनमीटर प्रति सेकंड की दर से पानी छोड़ा जा रहा है. जलप्रवाह नियंत्रित रखकर नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है. इस आवर्तन से अमरावती जिले के मोर्शी, वरुड, तिवसा, चांदूर रेलवे और धामणगांव रेलवे तथा वर्धा जिले के आष्टी और आर्वी तहसीलों के किसानों को लाभ मिलेगा. खरीफ की फसलों को इस समय पानी मिलने से कपास और तुअर को बचाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
* रबी फसलों के लिए नवंबर में अगला आवर्तन
अमरावती जिले में कम बारिश के कारण अप्पर वर्धा बांध में फिलहाल करीब 56.62 प्रतिशत जलसंग्रह शेष है. जलसंपदा विभाग ने किसानों से पानी का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने की अपील की है. खरीफ के पहले आवर्तन के बाद रबी मौसम में चना और गेहूं की बुआई के लिए अगला नियोजित आवर्तन नवंबर 2026 से शुरू किया जाएगा.
* अप्पर वर्धा परियोजना की स्थिति
अप्पर वर्धा परियोजना की कुल जलसंग्रह क्षमता 564.05 दशलक्ष घनमीटर है. 2 अक्टूबर 2026 तक बांध में 319.35 दशलक्ष घनमीटर यानी 56.62 प्रतिशत जलसंग्रह उपलब्ध था. इसमें से 200 दशलक्ष घनमीटर पानी सिंचाई के लिए आरक्षित है, जबकि अमरावती शहर की जलापूर्ति के लिए करीब 56.62 दशलक्ष घनमीटर पानी आरक्षित रखा गया है. फिलहाल किसी भी श्रेणी के जलआरक्षण में कटौती नहीं की गई है.
जिले के अन्य जलस्रोतों में भी जलसंग्रह की स्थिति अलग-अलग है. सात मध्यम परियोजनाओं में 59.12 प्रतिशत और 48 लघु परियोजनाओं में 68.25 प्रतिशत पानी उपलब्ध है. जिले की कुल 56 परियोजनाओं में औसतन 59.75 प्रतिशत जलसंग्रह शेष बताया गया है.





