महाराष्ट्र में बनेंगे आठ नए वन्यजीव बचाव केंद्र
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने और उपचार-पुनर्वास की सुविधाएं बढ़ाने की योजना

* पुणे जिले में तेंदुओं के लिए पांच केंद्र, चंद्रपुर में बाघों के लिए विशेष केंद्र
नागपुर/पुणे/दि. 10- महाराष्ट्र में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष और जंगली जानवरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग की वन्यजीव शाखा ने राज्य में आठ नए वन्यजीव बचाव केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है. वर्ष 2026 में प्रस्तावित इस विस्तार का उद्देश्य वन्यजीवों के बचाव, उपचार और पुनर्वास की सुविधाओं को मजबूत करना है. प्रस्तावित योजना के तहत पुणे जिले में पांच तेंदुआ बचाव केंद्र, नासिक वन विभाग के अंतर्गत म्हसरूल में एक केंद्र, अहिल्यानगर वन विभाग के अंतर्गत बारागांव नांदूर में एक केंद्र तथा चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी वन विभाग के अंतर्गत मालडोंगरी में बाघों के लिए विशेष बचाव केंद्र स्थापित किया जाएगा.
* पुणे जिले में तेंदुओं के लिए पांच केंद्र
पुणे जिले में तेंदुओं की बढ़ती संख्या और गन्ने के खेतों के कारण मानव-तेंदुआ संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए विशेष ध्यान दिया जा रहा है. जुन्नर वन विभाग के अंतर्गत खानापुर, सावंतवाड़ी, शिरूर तहसील के न्हावरे और पिंपलखेड़ तथा आंबेगांव तहसील के कलंब में तेंदुआ बचाव केंद्र प्रस्तावित हैं. वहीं, विदर्भ में बाघों की मौजूदगी और हमलों की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए चंद्रपुर जिले के ब्रह्मपुरी वन विभाग के अंतर्गत मालडोंगरी में विशेष बाघ बचाव केंद्र बनाया जाएगा. नासिक के म्हसरूल और अहिल्यानगर के बारागांव नांदूर में भी वन्यजीवों के उपचार की सुविधाओं को गति मिलने की उम्मीद है.
* पहले से मौजूद केंद्रों का होगा विस्तार
वर्ष 2025 तक राज्य में जुन्नर वन विभाग के माणिकडोह स्थित तेंदुआ बचाव केंद्र और नागपुर के गोरेवाड़ा स्थित वन्यजीव बचाव केंद्र जैसी सरकारी सुविधाएं उपलब्ध थीं. इसके अलावा वर्धा में पीपल फॉर एनिमल्स का बचाव केंद्र भी संचालित था. नई योजना से राज्य में वन्यजीवों के बचाव और उपचार की व्यवस्था का विस्तार होगा.
* वन्यजीवों को समय पर उपचार देना प्राथमिकता
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एम.एस. रेड्डी के अनुसार, वन्यजीवों को समय पर उपचार मिलना उनका अधिकार है. बढ़ते शहरीकरण के कारण जंगली जानवर मानव बस्तियों की ओर आ रहे हैं. ऐसे में नए केंद्र वन्यजीवों की जान बचाने के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं से निपटने में वन विभाग की क्षमता बढ़ाने में सहायक होंगे.





