रास-गरबा के लिए पारंपरिक परिधानों के साथ आधुनिक फैशन का भी चलन
केडिया-धोती और चनिया-चोली के साथ युवाओं को पसंद आ रहे फ्यूजन परिधान, बुजुर्गों में भी नौ रंगों का उत्साह

अमरावती/दि. 14 – नवरात्रोत्सव में रास-गरबा, डांडिया और नौ रंगों का संगम अब केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें आधुनिक फैशन का रंग भी घुल गया है. शहर में नवरात्रोत्सव के दौरान पारंपरिक परिधानों के साथ इंडो-वेस्टर्न और फ्यूजन स्टाइल का चलन बढ़ा है. युवा ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों में भी नौ दिनों के नौ रंगों के अनुसार कपड़े पहनने को लेकर खास उत्साह दिखाई दे रहा है. कपड़ा बाजार में बढ़ी चहल-पहल के बीच इस वर्ष खरीदारी का उत्साह पिछले दो वर्षों की तुलना में दोगुना होने की बात व्यापारियों ने कही है.
पहले नवरात्रि के निर्धारित रंग के अनुसार साड़ी या पारंपरिक पोशाक पहनने पर अधिक जोर रहता था. अब महिलाएं साड़ी, पंजाबी ड्रेस, कुर्ती, अनारकली और इंडो-वेस्टर्न परिधानों के जरिए भी इन रंगों को अपने पहनावे में शामिल कर रही हैं. इसके साथ आकर्षक झुमके, नेकलेस, चूड़ियां और अन्य आभूषण पहनकर अपने लुक को खास बनाया जा रहा है.
नौ दिनों के लिए अलग-अलग पोशाकें खरीदने के बजाय उपलब्ध कपड़ों का रचनात्मक इस्तेमाल करने का चलन भी बढ़ा है. पुरानी साड़ी को गुजराती, बंगाली या मारवाड़ी शैली में पहनकर उसके साथ नए आभूषणों का मेल किया जा रहा है. वहीं, साधारण कुर्ती को अलग-अलग सजावटी सामग्री और आकर्षक आभूषणों के साथ नया रूप दिया जा रहा है. एक ही पोशाक को अलग-अलग अंदाज में पहनकर नया लुक तैयार करने पर भी जोर है.
* गरबा के लिए फ्यूजन लुक की मांग
युवाओं में पारंपरिक केडिया-धोती और चूड़ीदार की लोकप्रियता बरकरार है. इसके साथ कढ़ाईदार कुर्ते, सीधे कट वाले पतलून और रंगीन स्टोल जैसे फ्यूजन विकल्प भी पसंद किए जा रहे हैं. गरबा करते समय आसानी से घूमने और नृत्य करने के साथ आकर्षक दिखने के लिए हल्के और आरामदायक परिधानों को प्राथमिकता दी जा रही है. महिलाओं और युवतियों में चनिया-चोली, रंग-बिरंगे घाघरे, कढ़ाईदार ओढ़नियों और पारंपरिक आभूषणों की मांग बनी हुई है. पारंपरिक पहनावे के साथ आधुनिक स्टाइल का मेल उत्सव की रौनक बढ़ा रहा है. साड़ी, पंजाबी ड्रेस, कुर्ती, अनारकली और इंडो-वेस्टर्न परिधानों में भी महिलाएं डांडिया और गरबा का आनंद ले रही हैं.
* धार्मिक परंपरा के साथ फैशन का संगम
श्री शिवाजी महाविद्यालय की छात्रा रुतुजा हेंबरे ने बताया कि नवरात्रि के नौ रंगों के कारण रोजाना क्या पहनना है, यह तय करना आसान हो जाता है. महाविद्यालय में भी किसी एक दिन सभी विद्यार्थियों के एक ही रंग के कपड़े पहनकर आने की योजना बनाई जाती है. इससे नवरात्रोत्सव के दौरान अलग ही उत्साह का माहौल बनता है. उनके अनुसार, फैशन के साथ धार्मिक परंपरा का जुड़ाव इस उत्सव को और आनंददायी बनाता है.
* इस वर्ष नौ दिनों के नौ रंग
नवरात्रि के प्रत्येक दिन का रंग हर वर्ष बदलता है. इसलिए महिलाएं पिछले वर्ष की रंग-सूची के बजाय इस वर्ष निर्धारित रंगों के अनुसार अपने परिधानों का चयन कर रही हैं. इस वर्ष नवरात्रोत्सव की शुरुआत 11 अक्टूबर को नारंगी रंग से हुई. इसके बाद 12 अक्टूबर को सफेद, 13 अक्टूबर को लाल, 14 अक्टूबर को रॉयल ब्लू, 15 अक्टूबर को पीला, 16 अक्टूबर को हरा, 17 अक्टूबर को धूसर, 18 अक्टूबर को बैंगनी और 19 अक्टूबर को मोरपंखी रंग के परिधान पहनने की योजना है.
* 1,200 से 4,500 रुपये तक के गरबा परिधान
कपड़ा व्यापारी प्रज्ञा बोडखे के अनुसार, इस वर्ष गरबा के लिए सूती, बांधनी और शीशे की कढ़ाई वाले परिधानों को अधिक पसंद किया जा रहा है. बाजार में चनिया-चोली और केडिया-धोती के सेट 1,200 से 4,500 रुपये तक उपलब्ध हैं. वहीं, कम बजट में खरीदारी करने वालों के लिए हल्की डिजाइन वाले कुर्ते और फ्यूजन परिधान 600 से 1,800 रुपये तक मिल रहे हैं. बोडखे ने बताया कि पिछले दो वर्षों की तुलना में इस बार बाजार में भीड़ और खरीदारी का उत्साह दोगुना दिखाई दे रहा है. पारंपरिक परिधानों के साथ आधुनिक स्टाइल के विकल्प उपलब्ध होने से ग्राहकों को अपनी पसंद और बजट के अनुसार खरीदारी करने का अवसर मिल रहा है.





