खतरे की घंटी! अमरावती जिले में भूजल स्तर में भारी गिरावट
सितंबर के अंत तक औसत जलस्तर 0.90 मीटर नीचे

वरुड में 3.05 और मोर्शी में 2.41 मीटर की कमी, जनवरी के बाद गहरा सकता है जलसंकट
अमरावती/दि.13 – जिले में औसत से कम बारिश और लंबे समय तक बारिश का खंड पड़ने के कारण भूजल स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है. अचलपुर और चांदूर बाजार को छोड़कर जिले की 12 तहसीलों में भूजल स्तर पिछले पांच वर्षों के औसत से नीचे चला गया है. वरुड और मोर्शी तहसीलों में स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है. यहां भूजल स्तर में क्रमशः 3.05 मीटर और 2.41 मीटर की गिरावट दर्ज की गई है. भूजल स्तर में आई इस कमी से आने वाले महीनों में पेयजल संकट गहराने और रबी फसलों की सिंचाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.
भूजल सर्वेक्षण एवं विकास यंत्रणा (जीएसडीए) की ओर से जिले के 63 लघु जलग्रहण क्षेत्रों में स्थित 136 निरीक्षण कुओं के जलस्तर का सर्वेक्षण किया गया. सितंबर 2026 के अंत तक के आंकड़ों की पिछले पांच वर्षों के औसत से तुलना करने पर जिले में भूजल की स्थिति सामने आई है. इस संबंध में जीएसडीए ने जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंप दी है.
* पांच साल के औसत से 0.90 मीटर नीचे पहुंचा जलस्तर
जीएसडीए की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में पिछले पांच वर्षों के दौरान सितंबर महीने में भूजल स्तर का औसत 5.26 मीटर था. सितंबर 2026 में यह बढ़कर 6.16 मीटर तक पहुंच गया. यानी भूजल स्तर में औसतन 0.90 मीटर की गिरावट दर्ज की गई है. जलस्तर की गहराई बढ़ने का अर्थ है कि पानी पहले की तुलना में अधिक नीचे चला गया है. जिले में औसत से कम बारिश होने के कारण जमीन में पानी का पुनर्भरण पर्याप्त मात्रा में नहीं हो सका. वहीं, भूजल का लगातार दोहन भी जलस्तर में गिरावट का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है.
* वरुड और मोर्शी में सबसे ज्यादा गिरावट
भूजल स्तर में गिरावट के मामले में वरुड तहसील सबसे आगे है. यहां जलस्तर में 3.05 मीटर की कमी दर्ज की गई है. इसके बाद मोर्शी में 2.41 मीटर की गिरावट सामने आई है. इन दोनों तहसीलों में भूजल की स्थिति को लेकर विशेष चिंता जताई गई है. इसके अलावा भातकुली, धारणी, तिवसा, नांदगांव खंडेश्वर और धामणगांव रेलवे तहसीलों में भूजल स्तर एक से दो मीटर तक नीचे गया है. वहीं, अमरावती, चिखलदरा, चांदूर रेलवे, अंजनगांव सुर्जी और दर्यापुर तहसीलों में जलस्तर में शून्य से एक मीटर तक की गिरावट दर्ज की गई है. इसके विपरीत अचलपुर और चांदूर बाजार तहसीलों में भूजल स्तर में एक मीटर तक की वृद्धि दर्ज की गई है. इससे स्पष्ट है कि जिले की सभी तहसीलों में भूजल की स्थिति एक जैसी नहीं है.
* औसत बारिश में करीब 39 प्रतिशत की कमी
जिले में सितंबर 2026 के अंत तक औसतन 800.52 मिमी बारिश होने की अपेक्षा थी, लेकिन वास्तविक वर्षा केवल 487.59 मिमी दर्ज की गई. इस तरह जिले में करीब 39 प्रतिशत बारिश की कमी रही. कम बारिश के कारण जलस्रोतों और भूजल के पुनर्भरण पर असर पड़ा है. बारिश की कमी के साथ ही लंबे समय तक वर्षा नहीं होने से जमीन में नमी और पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई है. इसका असर पेयजल स्रोतों के साथ-साथ खेती पर भी पड़ने की आशंका है.
* वरुड-मोर्शी में नए कुओं और बोरवेल पर नियंत्रण की सिफारिश
भूजल स्तर में लगातार हो रही गिरावट को देखते हुए जीएसडीए ने वरुड और मोर्शी तहसीलों में नए कुओं तथा बोरवेल के निर्माण पर रोक लगाने और भूजल के दोहन पर सख्त नियंत्रण रखने की सिफारिश की है. यदि समय रहते जलस्रोतों के संरक्षण और भूजल के नियोजित उपयोग के लिए कदम नहीं उठाए गए, तो आगामी गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता को लेकर मुश्किलें बढ़ सकती हैं. ऐसे में भूजल का अनावश्यक दोहन रोकना और उपलब्ध जलस्रोतों का उचित प्रबंधन करना आवश्यक होगा.
* रबी की सिंचाई पर मंडराया संकट
रबी सीजन में फसलों की सिंचाई के लिए भूजल का उपयोग बढ़ जाता है. ऐसे में आने वाले महीनों में कुओं और बोरवेल से पानी निकालने की मात्रा बढ़ने पर जलस्तर में और गिरावट आने की आशंका है. इसका सीधा असर किसानों की सिंचाई व्यवस्था पर पड़ सकता है. विशेष रूप से वरुड और मोर्शी तहसीलों में भूजल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए किसानों की चिंता बढ़ गई है. जनवरी के बाद जलस्तर में और गिरावट आने पर पेयजल और सिंचाई, दोनों के लिए पानी की उपलब्धता चुनौती बन सकती है. जीएसडीए के वरिष्ठ भूवैज्ञानिक राजेश सावले के अनुसार, औसत से कम बारिश के कारण जिले में भूजल स्तर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. इस संबंध में रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी गई है.





