18 को दूरबीन से देखिए चंद्रमा के वीवर ‘’

मराठी विज्ञान परिषद का उपक्रम और आवाहन

अमरावती/दि.13 – मराठी विज्ञान परिषद ने आगामी रविवार 18 अक्तूबर को शाम 7 से 9 बजे दौरान दूरबीन से चंद्रमा के गढ्ढे देखने का आयोजन किया है. वडाली के पंचशील ग्राउंड के सामने स्थित शौकिया खगोल निरीक्षक विजय गिरूलकर के निवास पर 6 इंच व्यास की हाई रेंज दूरबीन से चंद्र के निरीक्षण का अवसर मिलनेवाला है. उन्होंने लोगों से अवश्य अंतरिक्ष के बारे में जिज्ञासा रखनेवालों से उक्त समय पधारने का आवाहन किया है.
गिरूलकर ने बताया कि हम पृथ्वी पर रहते हैं. पृथ्वी अवकाश में अकेली नहीं हैं. उसका एक छोटा मित्रमंडल है. वह मित्र अर्थात चंद्र. जिसकी पृथ्वी से दूरी 384402 किमी हैं. चंद्र से निकली प्रकाश किरणों को पृथ्वी तक पहुंचने में मात्र 1.3 सेकंद लगते हैं. चंद्र का अपना उजाला नहीं है. वह सूर्य से प्रकाश ग्रहण करता है. दूरबीन से चंद्र का निरीक्षण करने पर देखा जाता है कि उस पर दरारे, शलाका, वीवर स्पष्ट नजर आते हैं. चंद्र पर वातावरण न होने से वहां की कई सूक्ष्म बातें दिखाई पडती है. चंद्र पर 30 हजार से अधिक गढ्ढे हैं. 12 पर्वत श्रृंखला है. सबसे बडे गढ्ढे का नाम न्यूटन वीवर रखा गया है. सबसे बडे पर्वत का नाम लीबनिट्स हैं. चंद्र पर गिरनेवाली उलकाएं जल नहीं जाती. वे पृष्ठभाग पर धडकती है. जिससे यह वीवर अर्थात गढ्ढे बनने का वैज्ञानिकों का अंदाज है. जिसे देखने आगामी रविवार शाम 7 से 9 बजे दौरान अवश्य आने का आवाहन विजय गिरूलकर ने किया है.

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