दिवाली की छुट्टियों के बाद विद्यार्थियों को देनी होगी परीक्षा

कक्षा 2 से 8 तक के करीब 1.37 लाख विद्यार्थियों के लिए नवंबर के अंत में ‘पेट’ कराने की तैयारी

 छुट्टियों में घूमने-फिरने के साथ पढ़ाई की भी रहेगी चिंता
अमरावती/दि.14 – दिवाली की छुट्टियों में ननिहाल और चाचा के गांव जाकर मौज-मस्ती करने, रिश्तेदारों के साथ समय बिताने तथा दोस्तों के साथ खेलने की योजना बना रहे विद्यार्थियों को इस बार छुट्टियों के तुरंत बाद परीक्षा की तैयारी करनी होगी. शिक्षा विभाग ने स्थानीय निकायों और अनुदानित स्कूलों में कक्षा 2 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए नवंबर के अंत तक आवधिक मूल्यांकन परीक्षा आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है. ऐसे में दिवाली की छुट्टियों के बाद विद्यार्थियों को पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर भी ध्यान देना होगा.

* जिले के 1.37 लाख विद्यार्थी देंगे परीक्षा
जिले में करीब 1,571 स्कूल हैं. इनमें कक्षा 2 से 8 तक पढ़ने वाले लगभग 1 लाख 37 हजार विद्यार्थी पेट परीक्षा में शामिल होंगे. इस परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति का आकलन करना और यह पता लगाना है कि उन्होंने पाठ्यक्रम के विभिन्न विषयों तथा अवधारणाओं को कितनी अच्छी तरह समझा है. इस बार पहले सत्र का मूल्यांकन दिवाली की छुट्टियों के बाद नवंबर के अंतिम सप्ताह में कराने की तैयारी है. इसके चलते विद्यार्थियों की पढ़ाई की योजना में बदलाव होने की संभावना है. वहीं, छुट्टियों में अपने गांव जाने और रिश्तेदारों के साथ समय बिताने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी के लिए समय निकालना पड़ेगा.

* छुट्टियों में मौज-मस्ती के साथ पढ़ाई की चिंता
दिवाली की छुट्टियां बच्चों के लिए घूमने-फिरने, रिश्तेदारों से मिलने और खेलकूद का आनंद लेने का अवसर होती हैं. कई विद्यार्थी छुट्टियों में अपने पैतृक गांव या रिश्तेदारों के यहां जाने की योजना बनाते हैं. लेकिन छुट्टियों के तुरंत बाद परीक्षा होने से उन्हें अपनी पढ़ाई की तैयारी भी जारी रखनी पड़ सकती है. ऐसे में बच्चों के लिए छुट्टियों का आनंद लेने और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

* शिक्षकों पर भी बढ़ेगा काम का दबाव
पहले सत्र का पाठ्यक्रम पूरा करने के साथ विद्यार्थियों का दोहराव करवाना, परीक्षा की तैयारी कराना, उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन करना और नियमित शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखना शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है. परीक्षा की तैयारी और नियमित पढ़ाई की दोहरी जिम्मेदारी के कारण शिक्षकों का समय-सारिणी भी प्रभावित होने की आशंका है.

* दिवाली से पहले परीक्षा कराने की मांग
प्राथमिक शिक्षक समिति के राज्य प्रतिनिधि राजेश सावरकर ने कहा कि शिक्षा विभाग ने पेट परीक्षा दिवाली के बाद आयोजित करने की घोषणा की है. हालांकि, दिवाली की छुट्टियों के दौरान कई विद्यार्थी अपने गांव या रिश्तेदारों के यहां चले जाते हैं. छुट्टियों के कारण उनकी नियमित पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है. इसलिए यह परीक्षा दिवाली की छुट्टियों से पहले अक्टूबर में या नवंबर के पहले सप्ताह में आयोजित करना उचित रहेगा.

* पेट परीक्षा का क्या है उद्देश्य?
पेट यानी आवधिक मूल्यांकन परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों का आकलन किया जाता है. इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के कौन-से हिस्से समझने में कठिनाई हो रही है और किन विषयों में उन्हें अतिरिक्त मार्गदर्शन की आवश्यकता है. परीक्षा का मुख्य उद्देश्य पढ़ाई में मौजूद कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करना है.

* विद्यार्थियों को कैसे करनी चाहिए तैयारी?
विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए अंतिम समय तक इंतजार करने के बजाय प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा अध्ययन करना चाहिए. कक्षा में पढ़ाए गए पाठों का नियमित दोहराव, पाठ्यपुस्तकों के उदाहरणों का अभ्यास और कठिन विषयों के बारे में शिक्षकों से मार्गदर्शन लेना उपयोगी रहेगा. साथ ही, छुट्टियों में पढ़ाई, खेलकूद और आराम के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है. अब सवाल यह है कि दिवाली की छुट्टियों में गांव जाकर मौज-मस्ती करने की योजना बना रहे विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी के लिए कितना समय मिल पाएगा और क्या शिक्षा विभाग परीक्षा की तारीखों पर पुनर्विचार करेगा?

 

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