नामस्मरण किया और लौट आई पति की दिल की धडकने

अंबादेवी मंदिर की विश्वस्त मीना पाठक ने सुनाया भावुक अनुभव

अमरावती/दि.14 – आदिशक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्रि पर यहां स्थित अंबादेवी-एकवीरा देवी मंदिरों की भारी भीड उमड रही है. मंदिर में काम करनेवाले तथा मंदिर में माता के दर्शन करनेवालों के मंदिर को लेकर अपने-अपने दृष्टांत है. देवी चमत्कारों को अनुभव करनेवालों की अपनी-अपनी कहानी है, इन्हीं में से एक है मंदिर में पिछले 25 वर्ष से विश्वस्थ के रूप में काम करनेवाली मीना पाठक ने मीडिया को बताया कि ढाईदशक से कई ऐसे दृष्टांत मेरे सामने हुए, जिसमें में सीधे तौर पर मां का ही चमत्कार मानती है. पाठक ने बताया कि एक बार मेरे पति दीपक पाठक बहुत बीमार थे. अस्पताल में ले जाने से पहले ही उनकी हृदय की धडकने बंद हो गई हैं, ऐसा अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया. इसलिए अब कुछ नहीं किया जा सकता, आप इन्हें यहां से ले जाइए. मैंने डॉक्टरों से अनुरोध किया कि आप इन्हें भर्ती करके इलाज तो करिए और मैंने अंबा माता का नाम स्मरण शुरू किया. कुछ देर बाद डॉक्टरों की ओर से जानकारी दी गई कि मरीज के दिल की धडकन शुरू हो गई है. डॉक्टर भी चकित थे कि ऐसा कैसे हो गया. लेकिन मुझे पूरा भरोसा था कि यह सब माता के नामस्मरण के कारण ही संभव हुआ है. मीना पाठक ने बताया कि मेरे पति का इलाज कर रहे डॉ. देशपांडे, डॉ. स्वप्निल शिरभाते तथा डॉ. पांढरीकर को बडा आश्चर्य हुआ. मीना पाठक ने बताया कि मैं पिछले 25 वर्षो से मंदिर से जुडी हूं और इन 25 वर्षो में मुझे अनेक बार ऐसा अनुभव हुआ है. माता का मेरे और मेरे परिवार के लोगों पर वरदस्त है. मां ने मेरे पति को मौत से बाहर निकाला है और मेरे तथा मेरे परिवार की प्रसन्नता को बरकररार रखा. मैं अंबानगरी के हर माता भक्तों से अपील करती हूं कि वे माता के प्रति अपनी आस्था को बनाए रखे. मीना पाठक ने बताया कि माता के नामस्मरण में बहुत ताकत है. शक्ति की आराधना करनेवाला कभी दुखी नहीं होता, ऐसा दावा करते हुए मीना पाठक ने कहा कि भक्ति में भाव बहुत जरूरी है.

सच्चे मन से मां को पुकारो, हर संकट होगा दूर
उन्होंने कहां कि शुध्द भाव से भक्त मां से जो कुछ भी मांगता हैं. उसे मां अवश्य पूरा करती है. मां को प्रसन्न करने के लिए विशाल मंडप, बडी-बडी झांकिया तथा डीजे पर नृत्य करने की जरूरत नहीं है. अगर उसका नामस्मरण संकट के समय जो भी पूरी निष्ठा से करता हैं. मां उसके सभी दुख दूर कर देती है. मेरे जीवन का अधिकांश समय माता के मंदिर में ही व्यतीत होता है. इसे मैं अपने जीवन का सौभाग्य मानती हूं. वर्तमान में शारदीय नवरात्र का पर्व चल रहा है. माता के तीसरे रूप की आराधना करते वक्त सभी भक्तों को माता को जयकारे लगाते हुए उसकी पूजा पूरी निष्ठा करने का संकल्प भी लेना होगा. तभी मां अपने भक्तों को सभी संकटों से दूर करेगी. सभी लोग ‘या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमों नम:’ कहे और देवी का नामस्मरण करे हर भक्त की मनोकामना दुर्गा माता जरूर पूरी करेगी.

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