मालखेड़ तालाब में 81.23% पानी, रबी सिंचाई पर सवालिया निशान
खरीफ में नुकसान के बाद अब गेहूं और चने की फसल की चिंता

पेयजल का आरक्षित भंडार बचाकर सिंचाई के लिए पानी देने की चुनौती
चांदूर रेलवे /दि.14- मानसून के दौरान कम बारिश का असर अब खेती और जलस्रोतों पर दिखाई देने लगा है. चांदूर रेलवे शहर और आसपास के कृषि क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मालखेड़ तालाब में फिलहाल 81.23 प्रतिशत जलभंडार उपलब्ध है. ऐसे में खरीफ सीजन में बारिश की कमी से नुकसान झेल चुके किसानों के सामने अब रबी फसलों की सिंचाई का सवाल खड़ा हो गया है. किसान गेहूं और चने की बुआई करें या नहीं, और यदि बुआई करते हैं तो सिंचाई के लिए झील से पानी मिलेगा या नहीं, इसे लेकर असमंजस में हैं.
* चार माइनरों से होती है खेतों की सिंचाई
मालखेड़ तालाब से हर साल रबी सीजन में चांदूर पार्ट नंबर-1, सांजरखेड़, बसलापुर, धनोरा म्हाली, शिवनी सहित आसपास के क्षेत्रों में खेती के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है. तालाब से चार माइनरों के माध्यम से सिंचाई की जाती है. हालांकि, जलाशय पूरी क्षमता से नहीं भरने पर उपलब्ध जलभंडार के अनुसार केवल दो या तीन माइनरों के जरिए पानी छोड़ने की व्यवस्था पहले अपनाई जाती रही है. इस वर्ष बारिश की कमी और सूखे जैसी स्थिति के कारण सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का निर्णय महत्वपूर्ण हो गया है. किसानों को आशंका है कि यदि पर्याप्त पानी नहीं मिला, तो रबी फसलों की बुआई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
* सिंचाई के संबंध में स्पष्ट निर्देशों का इंतजार
मालखेड़ तालाब में उपलब्ध पानी और क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए रबी सिंचाई के संबंध में वरिष्ठ स्तर पर निर्णय लिए जाने की संभावना है. हालांकि, संबंधित अधिकारियों को अभी तक इस बारे में स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं. झील के जलभंडार से शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करना भी जरूरी है. ऐसे में पीने के पानी के लिए आवश्यक भंडार सुरक्षित रखने के बाद रबी फसलों की सिंचाई के लिए कितना पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है. यदि सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है, तो कितने गांवों और कृषि क्षेत्रों को इसका लाभ मिलेगा, कितने माइनरों के माध्यम से पानी वितरित किया जाएगा और कितने समय तक सिंचाई संभव होगी, इन सवालों के जवाब का किसानों को इंतजार है.
* तहसील के अन्य जलाशयों की स्थिति भी चिंताजनक
जलाशय उपलब्ध जलभंडार
मालखेड़ झील 81.23%
बासलापुर 49.36%
जलका 0.00%
भिवापुर 69.35%
जलाशयों में पानी की अलग-अलग स्थिति के कारण आगामी रबी सीजन में सिंचाई की योजना बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. विशेष रूप से जलका जलाशय में शून्य प्रतिशत जलभंडार दर्ज होने से जल उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है.
* कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दें
सिंचाई विभाग के उपविभागीय अधिकारी विनय मुन्ने के अनुसार, मालखेड़ तालाब से रबी फसलों को पानी उपलब्ध कराने की योजना पर विचार किया जा रहा है. हालांकि, जलाशय में उपलब्ध सीमित भंडार को देखते हुए किसानों की मांग के आधार पर ही पानी छोड़ने का निर्णय लिया जा सकता है. उन्होंने किसानों को कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों का चयन करने की सलाह दी है.
* किसानों के सामने दोहरी चुनौती
खरीफ सीजन में बारिश की कमी से पहले ही नुकसान झेल चुके किसानों के लिए रबी की फसल आर्थिक सहारे का महत्वपूर्ण माध्यम है. लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा या नहीं, इस अनिश्चितता के कारण किसान गेहूं और चने की बुआई को लेकर निर्णय नहीं ले पा रहे हैं. अब सबकी निगाहें सिंचाई विभाग के निर्णय पर टिकी हैं. किसानों को उम्मीद है कि पेयजल की जरूरतों को सुरक्षित रखते हुए रबी फसलों के लिए भी पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि खरीफ में हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो सके.





