पहली ही कोशिश में मिली ‘खाकी’ और स्टीयरिंग की कमान!
आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं छोड़ा सपना

अमरावती पुलिस में ड्राइवर बनकर बनाई अलग पहचान
अमरावती/दि.14 – घर की आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं, लेकिन मन में खाकी वर्दी पहनने का सपना हमेशा जीवित था. माता-पिता बडनेरा में जीरी मंदिर के पास चाय की दुकान चलाते थे. भाई-बहन की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी परिवार पर थी. ऐसे मुश्किल हालात में सिविल सर्विस में जाने का सपना पूरा नहीं हो सका, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. वर्ष 2023 में पहली ही कोशिश में पुलिस भर्ती में सफलता हासिल कर खुशी प्रेमचंद चौहान ने पुलिस ड्राइवर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की.
पुलिस विभाग में कार्यरत अपने चाचा से प्रेरणा लेकर खुशी ने खाकी वर्दी पहनने का सपना देखा था. दृढ़ इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने इस सपने को साकार किया. आज वह अमरावती शहर पुलिस मुख्यालय में कार्यरत हैं और डायल 112 की गाड़ी चलाकर आपातकालीन परिस्थितियों में पुलिस की सहायता व्यवस्था का हिस्सा बनी हुई हैं.
* पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में बनाई पहचान
वर्ष 2023 की पुलिस भर्ती में खुशी चौहान अमरावती शहर पुलिस मुख्यालय में चयनित चार महिला पुलिस ड्राइवरों में से एक हैं. वाहन चलाने की जिम्मेदारी को अक्सर पुरुषों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन खुशी ने अपने आत्मविश्वास और मेहनत से इस धारणा को चुनौती दी है. खुशी चौहान का कहना है कि मुश्किल हालात के बावजूद मजबूत इरादों और निरंतर मेहनत से खाकी वर्दी पहनने का सपना पूरा किया जा सकता है. ड्यूटी के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण होता है, जिससे जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाने में मदद मिलती है.
* स्टीयरिंग के साथ जीवन को भी मिली नई दिशा
आज डायल 112 की गाड़ी चलाते हुए खुशी चौहान को महसूस होता है कि उन्होंने अपने जीवन में सही निर्णय लिया. उनके लिए पुलिस की नौकरी केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि समाज की सेवा करने का अवसर भी है. उनका मानना है कि परिस्थितियां भले ही इंसान के सपनों के रास्ते में बाधाएं खड़ी करें, लेकिन दृढ़ संकल्प और मेहनत से सफलता हासिल की जा सकती है. पुलिस सेवा में आने के बाद उन्हें अपनी एक अलग पहचान मिली है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है.
* रात की गश्त से लेकर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों तक
पुलिस ड्राइवर की ड्यूटी में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. दिन हो या रात, गश्त के दौरान वाहन चलाना हो या आपातकालीन स्थिति में घटनास्थल तक पहुंचना, हर परिस्थिति में सतर्कता और सूझबूझ जरूरी होती है. अंधेरे में और कठिन परिस्थितियों में वाहन चलाना भी इस जिम्मेदारी का हिस्सा है. खुशी चौहान के अनुसार, खाकी वर्दी पहनने से उनके भीतर डर के बजाय आत्मविश्वास और जिम्मेदारी का एहसास मजबूत हुआ है. वह हर चुनौती का सामना पूरी तत्परता से करने का प्रयास करती हैं.
* महिला ड्राइवरों के प्रति बदल रहा नजरिया
आपातकालीन परिस्थितियों में महिला पुलिसकर्मी सुरक्षित और कुशलतापूर्वक वाहन चला सकती हैं या नहीं, इस तरह के सवाल आज भी समाज में उठते हैं. महिला ड्राइवरों को लेकर बनी धारणाओं के बावजूद खुशी चौहान अपनी जिम्मेदारी निभाकर यह साबित कर रही हैं कि क्षमता का संबंध महिला या पुरुष होने से नहीं, बल्कि कौशल, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास से है. उनकी सफलता उन युवतियों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो आर्थिक कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ने के बारे में सोचती हैं. खुशी चौहान की कहानी संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादों और मेहनत के दम पर सफलता की राह बनाई जा सकती है. खाकी वर्दी और स्टीयरिंग की कमान संभालकर उन्होंने साबित किया है कि हौसलों के आगे मुश्किलें भी छोटी पड़ जाती हैं.





