येवदा में ‘एक गांव, एक दुर्गा’ उत्सव के 47 साल, हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल

शाम की महाआरती में उमड़ रही हजारों श्रद्धालुओं की भीड़

* धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में भी मंडल सक्रिय
येवदा /दि.14– जगह-जगह अलग-अलग दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना के बीच अमरावती जिले के येवदा गांव ने पिछले 47 वर्षों से ‘एक गांव, एक दुर्गा’ की परंपरा को कायम रखा है. इस वर्ष भी यहां दुर्गा उत्सव धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. शाम की आरती में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूरा परिसर भक्तिमय हो जाता है. इस उत्सव की विशेषता यह है कि इसमें सभी जातियों और धर्मों के लोग शामिल होकर सामाजिक सद्भाव और हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देते हैं.
* एक साथ गूंजती है महाआरती की आवाज
येवदा के सार्वजनिक दुर्गा उत्सव में हर दिन शाम को होने वाली आरती विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है. आरती में बड़ी संख्या में नागरिक शामिल होते हैं और एक साथ स्वर मिलाकर माता की आराधना करते हैं. गांव में वर्षों से चली आ रही इस परंपरा ने उत्सव को धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक एकता का प्रतीक भी बना दिया है. मंडल की एक अन्य विशेषता दुर्गा प्रतिमा का निर्माण है. पिछले करीब 40 वर्षों से कोलकाता के मूर्तिकार आचार्यजी को बुलाकर गंगा नदी के किनारे की मिट्टी से प्रतिमा तैयार कराई जाती है. इस परंपरा के माध्यम से उत्सव की धार्मिक और सांस्कृतिक विशेषता को बरकरार रखा गया है.
* धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक जागरूकता
दुर्गा उत्सव के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक और पर्यावरण संबंधी गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता है. इस वर्ष वरुड जालका के ह.भ.प. शेटे महाराज की मधुर वाणी में भगवत प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं. इसके अलावा मंडल और रामायण सेवा समिति की ओर से धार्मिक संस्कार शिविर, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण तथा जलसंचयन जैसे उपक्रम चलाए जाते हैं. मंडल ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए किल्लारी भूकंप से प्रभावित लोगों की सहायता भी की थी. धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सरोकारों को जोड़ने की यह पहल उत्सव की विशेष पहचान बन गई है.
* महाआरती का सम्मान
इस वर्ष महाआरती का सम्मान नैनेश ठाकुर एवं श्वेता ठाकुर तथा आशीष शर्मा एवं श्रद्धा शर्मा को प्रदान किया गया है. उत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए थानेदार प्रफुल्ल गाडेकर और उनकी टीम प्रयासरत है. मंडल के अध्यक्ष श्याम ठाकरे, विलास कैसर, कपिल काले, राजेश गणोरकर, राजेश मानकर, जगदीश अग्रवाल, पंकज हिरुलकर सहित मंडल के वर्तमान एवं पूर्व सदस्य आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं. श्री रामचंद्र संस्था के अध्यक्ष तारासिंह रघुवंशी भी सहयोग कर रहे हैं. येवदा का ‘एक गांव, एक दुर्गा’ उत्सव पिछले 47 वर्षों से धार्मिक परंपरा, सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता का संदेश दे रहा है.
* कोकर्ड़ा में ‘एक गांव, एक देवी’ की 46 साल पुरानी परंपरा कायम
दर्यापुर – तहसील के कोरर्ड़ा गांव में ‘एक गांव, एक देवी’ की 46 साल पुरानी परंपरा को इस वर्ष भी कायम रखा गया है. नवयुवक नवदुर्गा मंडल की ओर से दुर्गा माता की स्थापना पारंपरिक और अनुशासित तरीके से की गई. उत्सव को आकर्षक स्वरूप देने के लिए मंडल के युवाओं ने दिन-रात मेहनत की. इस मंडल की खासियत यह है कि वरिष्ठों द्वारा बनाई गई योजना और परंपराओं का आज भी सख्ती से पालन किया जाता है. बुजुर्गों के मार्गदर्शन में युवा सदस्य उत्सव की तैयारियों को अंजाम देते हैं. वरिष्ठों के अनुभव और युवाओं के उत्साह के समन्वय से कोकरड़ा में ‘एक गांव, एक देवी’ की परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है.

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