850 वर्ष पुराना ऐतिहासिक आशा-मनीषा मंदिर आज भी भक्तों का श्रध्दास्थान
नवरात्रोत्सव की तैयारी पूर्ण

दर्यापुर /दि.14- चंद्रभागा नदी के किनारे आशा-मनीषा माता मंदिर है. जो वर्हाड में प्रसिध्द है. लगभग 850 वर्ष पुराना ऐतिहासिक मंदिर है. यह मंदिर आज भी भक्तों के लिए श्रध्दास्थान है. इस माता को पूर्वज हंसापुरी मनसापुरी माता के नाम से ही पहचानते थे. कालांतर से यह मंदिर आशा-मनीषा मंदिर के नाम से ही पहचाना जाता है. बढे-बुढे आज भी हंसापुरी-मनसापुरी इस देवस्थान के नाम से ही उच्चारण करते हैं. कहा जाता है यह देवी शुरूआत से राजपूत की है और पेंढारी जमाती के एक भक्त के साथ वह दर्यापुर में आयी व मूर्ति रूप से चंद्रभागा के किनारे बस गई.
उस काल में देवी के भक्तों ने इस मंदिर को बनाया था. लगभग 850 वर्ष पहले बनाया हुआ मंदिर आज भी सुस्थितीत है. माता मंदिर के आसपास कोट व बुरूज को सुधारा गया है. चंद्रभागा नदी के किनारे मंदिर को 7 जुलाई 2007 को चंद्रभागा नदी में आयी बाढ के कारण इस मंदिर को भी फटका बैठा था. किंतु अब मंदिर का पूरी तरह से सुधार किया गया है. चंद्रभागा ने आशा-मनीषा माता का दर्शन लेने के बाद यह बाढ का पानी अपने आप कम हो गया था. ऐसी लोगों की श्रध्दा है. वर्हाड के तीसरे स्वतंत्र राजा दर्या इमाद शहा ने 1529 में शहर घोषित करने का उल्लेख इतिहास में मिलता है. 1529 से 1560 तक इस राजा ने राज्य किया. उनके नाम से ही इस शहर का नामकरण दर्यापुर हुआ. दर्यापुर की पुरानी बस्ती में खोलापुरी वेश और देशमुख का पुराना वाडा आज भी साक्ष देता है. वतनदारी पध्दत बंद होने के बाद यहां जटाले इस गुरव परिवार के पास मंदिर की व्यवस्था का अधिकार आया. कैं. बाबासाहेब देशमुख के वाडे से देवी मंदिर तक आज भी भुयारी मार्ग होने का अनेक लोगों का कहना है. उस काल में देशमुख घराने की महिला देवी के दर्शन के लिए भुयारी मार्ग से जाती थी. 1870 तब की हैदराबाद संस्था द्बारा कै. रामा जटाले को देवी मंदिर की पूजा अर्चना करने का व व्यवस्थापन करने का ईनाम पत्र मिला. वह वंश परंपरा आज भी शुरू है. नवरात्रोत्सव उत्साह से मनाया जाता है. सुबह 5 बजे व सायंकाल 7 बजे यहां नियम से आरती होती है. इस समय भक्तों की बडी संख्या में भीड बनी रहती है. यहां भक्तों का सालभर आना जाना लगा रहता है. हाल ही में इस मंदिर का ट्रस्ट निर्माण हुआ है. उसमें संजय भारसाकले, उमेश ताडे, निलेश जटाले, प्रवीण धनसक, अॅड रमण जयस्वाल, हेमंत सत्यदेव गडकरी ने परिश्रम से इस मंदिर का पुननिर्माण कर सुविधा निर्माण की है. आज भी यहां निर्माण कार्य शुरू है.
आशा-मनीषा देवी को सोना चढाने के बाद दशहरे की शुरूआत हुई.
दशहरे को देवी को सोना चढाने के बाद दशहरे की शुरूआत होती है. ऐसी जानकारी वहां पुजारी ने दी. भक्तों के संकट दूर करनेवाली देवी के रूप में परिसर में श्रध्दा है. दशहरे को बडी संख्या में भक्त देवी को सोना देते हैं. उसके बाद एकदूसरे को सोना देते हैं. ऐसी प्रथा है.
मंदिर के प्रवेशद्बार के पास रास्ते के लिए मंदिर ट्रस्ट ने अनेक बार प्रशासन से विनती करने के बाद भी प्रशासन ने रास्ते का सुधार नहीं किया. आखिर मंदिर के ट्रस्ट ने लोगों की सुविधा के लिए मंदिर खर्च की रकम से मुख्य प्रवेशद्बार के पास का सीमेंट का रास्ता बनाया.
1008 दीपक का अखंड दीप ज्योति महायज्ञ
नवरात्रोत्सव में भक्तों द्बारा 1008 दिपक का अखंड दीप महायज्ञ किया गया. यह दीप महायज्ञ नवरात्रोत्सव में अखंड रूप से 24 घंटे शुरू रहेगा. मंदिर प्रशासन ने इसके लिए तैयारी की है.





