अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को ‘पवित्र’ पोर्टल से नियुक्तियां करना अनिवार्य नहीं
नागपुर खंडपीठ का महत्वपूर्ण फैसला, छह सप्ताह में निर्णय लेने के निर्देश

* कर्मचारियों की नियुक्तियों को मान्यता देने से इनकार करने वाला आदेश रद्द,
नागपुर /दि. 16– अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं में शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की नियुक्तियां पवित्र पोर्टल के माध्यम से करना और इसके लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य नहीं है. मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए संबंधित नियुक्तियों को मान्यता देने से इनकार करने वाला आदेश रद्द कर दिया. साथ ही, संस्था को सुनवाई का अवसर देकर छह सप्ताह के भीतर नियुक्तियों को मान्यता देने के संबंध में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं. न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फलके और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ ने यह फैसला भगवंतराव स्मृति शिक्षण संस्था की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया.
अहेरी के विधायक धर्मरावबाबा आत्राम सचिव वाली इस संस्था को अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था का दर्जा प्राप्त है. संस्था द्वारा संचालित भगवंतराव माध्यमिक आश्रमशाला, मुलचेरा और देवलमरी में शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की नियुक्तियां पवित्र पोर्टल की प्रक्रिया अपनाए बिना की गई थीं. इसके अलावा, नियुक्तियों के लिए पूर्व अनुमति भी नहीं ली गई थी. इस आधार पर एकात्मिक आदिवासी विकास परियोजना के परियोजना अधिकारी ने इन नियुक्तियों को मान्यता देने से इनकार कर दिया था.
* शासन निर्णयों का दिया हवाला
परियोजना अधिकारी के आदेश को चुनौती देते हुए संस्था ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की. सुनवाई के दौरान संस्था के अधिवक्ता राम कारोडे ने न्यायालय का ध्यान 13 जुलाई 2016 और 12 जून 2026 के शासन निर्णयों की ओर आकर्षित किया. उन्होंने दलील दी कि इन शासन निर्णयों के अनुसार अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं में शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की नियुक्तियों के लिए पूर्व अनुमति लेना और पवित्र पोर्टल के माध्यम से नियुक्तियां करना अनिवार्य नहीं है.
न्यायालय ने संस्था की दलीलों में तथ्य पाते हुए परियोजना अधिकारी का विवादित आदेश रद्द कर दिया. साथ ही, संस्था को सुनवाई का अवसर देने के बाद छह सप्ताह के भीतर कर्मचारियों की नियुक्तियों को मान्यता देने के संबंध में निर्णय लेने के निर्देश दिए. इस फैसले से संबंधित अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था को राहत मिली है.





