अमरावती जिले के सभी बड़े प्रतिष्ठानों का होगा फायर ऑडिट

डफरिन अस्पताल हादसे के बाद पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के सख्त निर्देश

* एक माह में अग्निसुरक्षा जांच और फायर ड्रिल अनिवार्य
अमरावती/दि.29– अमरावती के जिला स्त्री अस्पताल (डफरिन) के नवजात शिशु अतिदक्षता विभाग में हुई आग की घटना के बाद प्रशासन ने जिले में अग्निसुरक्षा को लेकर व्यापक अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है. राजस्व मंत्री तथा अमरावती के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जिले के सभी बड़े प्रतिष्ठानों की फायर ऑडिट और फायर ड्रिल एक माह के भीतर पूरी करने के सख्त निर्देश दिए हैं.
डफरिन अस्पताल में 24 अगस्त को तड़के करीब 3.30 बजे प्रथमदृष्टया वेंटिलेटर में विस्फोट के बाद आग लग गई थी. इस दर्दनाक हादसे में तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी. घटना की जानकारी मिलते ही पालकमंत्री बावनकुले ने सुबह करीब 4 बजे से ही संबंधित सभी विभागों से संपर्क कर आवश्यक निर्देश दिए थे.
* 36 नवजातों को सुरक्षित स्थानांतरित किया गया
घटना के बाद नवजात शिशुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कुल 36 बच्चों को अन्य अस्पतालों में उपचार के लिए स्थानांतरित किया गया. इनमें से 29 बच्चों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका निःशुल्क उपचार किया जा रहा है. शेष सात नवजात अपने माताओं के साथ जिला स्त्री अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में सुरक्षित हैं. प्रशासन के अनुसार, स्थानांतरित बच्चों में डॉ. पंजाबराव देशमुख मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, अमरावती में 11, डॉ. मुरके अस्पताल में 8, होप अस्पताल में 8 और पारिजात अस्पताल में 2 नवजातों का उपचार चल रहा है. इनके उपचार का खर्च निःशुल्क रखने के निर्देश दिए गए हैं.
* मृत बच्चों के परिजनों को 5-5 लाख की सहायता
हादसे में जान गंवाने वाले तीन नवजातों के परिजनों को सरकार की ओर से प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता घोषित की गई है.
* सात दिन में आएगा जांच समिति का रिपोर्ट
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना का गंभीर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर और स्वास्थ्य विभाग के सचिव को तत्काल घटनास्थल का निरीक्षण करने के लिए भेजा था. अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया. घटना की गहन जांच के लिए स्वास्थ्य आयुक्त की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय समिति गठित की गई है. समिति को घटना की वास्तविक स्थिति और कारणों का पता लगाकर सात दिनों के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.
* डफरिन मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
पालकमंत्री बावनकुले ने स्पष्ट किया है कि डफरिन अस्पताल की घटना में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. घटना की जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
* बड़े प्रतिष्ठानों की अग्निसुरक्षा व्यवस्था की होगी जांच
डफरिन हादसे से सबक लेते हुए जिले के सभी बड़े प्रतिष्ठानों की अग्निसुरक्षा व्यवस्था का परीक्षण किया जाएगा. इसमें अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, सार्वजनिक भवन और अन्य बड़े प्रतिष्ठान शामिल होंगे. प्रशासन को एक माह के भीतर फायर ऑडिट पूरा करने के साथ ही फायर ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं. इस अभियान का उद्देश्य केवल कागजी जांच तक सीमित न रहकर आपात स्थिति में संबंधित संस्थानों की वास्तविक तैयारी सुनिश्चित करना है. आग लगने जैसी घटनाओं के दौरान लोगों को सुरक्षित निकालने, अग्निशमन उपकरणों के उपयोग और तत्काल बचाव कार्यों की क्षमता का भी परीक्षण किया जाएगा. प्रशासन का मानना है कि समय पर अग्निसुरक्षा जांच और नियमित फायर ड्रिल से भविष्य में इस तरह की घटनाओं में जान-माल के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.

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