किसानों को बोरवेल और कुएं खोदने की अनुमति दें, प्रतिबंधों में मिले छूट

मोर्शी और वरुड में सूखे जैसे हालात से संतरे-मोसंबी के बागों पर संकट

* युवासेना जिलाप्रमुख उमेश शहाणे ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
मोर्शी /दि.13– मोर्शी और वरुड तहसील में सूखे जैसी स्थिति के कारण किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं. पानी की कमी से संतरे, मोसंबी, आम सहित अन्य फलों के बागों को बचाना किसानों के सामने बड़ी चुनौती बन गया है. ऐसे में किसानों को बोरवेल और कुएं खोदने की तत्काल अनुमति देने तथा इस संबंध में लागू प्रतिबंधों में नियमानुसार छूट प्रदान करने की मांग युवासेना के जिलाप्रमुख उमेश प्रल्हादराव शहाणे ने जिलाधिकारी से की है. इस संबंध में उन्होंने ज्ञापन सौंपकर प्रशासन से तत्काल राहत देने की अपील की है.
* पानी की कमी से फलोद्यानों पर संकट
मोर्शी और वरुड तहसील संतरा उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हैं. यहां बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका संतरे और मोसंबी सहित अन्य फलों के बागों पर निर्भर है. किसानों ने वर्षों की मेहनत और भारी निवेश से अपने फलोद्यान तैयार किए हैं. लेकिन, वर्तमान में पानी की कमी के कारण इन बागों के सूखने का खतरा बढ़ गया है. इससे पहले भी सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था. इसके दुष्परिणामों से किसान अब तक उबर नहीं पाए हैं. ऐसे में दोबारा पैदा हुए जलसंकट ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है.
* बोरवेल और कुएं खोदने के प्रतिबंधों में छूट की मांग
ज्ञापन में कहा गया है कि पानी की कमी के बीच किसानों के लिए अपने फलोद्यानों को बचाने के उद्देश्य से पानी के वैकल्पिक स्रोत तैयार करना आवश्यक हो गया है. हालांकि, बोरवेल और कुएं खोदने से संबंधित प्रतिबंधों के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसलिए प्रशासन को किसानों की गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए. मोर्शी और वरुड तहसील के किसानों को बोरवेल और कुएं खोदने की तत्काल अनुमति देने के साथ ही मौजूदा नियमों के तहत प्रतिबंधों में छूट अथवा विशेष रियायतें प्रदान की जानी चाहिए.
* स्थायी समाधान के लिए संबंधित विभागों की बैठक बुलाएं
उमेश शहाणे ने मांग की है कि पानी की कमी से नुकसान के खतरे का सामना कर रहे संतरे, मोसंबी और अन्य फलोद्यानों को बचाने के लिए तत्काल उपाय किए जाएं. इसके अलावा किसानों की जलसमस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए संबंधित विभागों की बैठक बुलाकर शीघ्र निर्णय लिया जाए. शहाणे ने कहा कि किसानों ने वर्षों की मेहनत से फलोद्यान तैयार किए हैं. इन्हें बचाना समय की आवश्यकता है. यदि समय रहते पानी की वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई, तो किसानों को होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान को टाला जा सकता है.
* आंदोलन की चेतावनी
उमेश शहाणे ने प्रशासन से ज्ञापन में की गई मांगों पर तत्काल ध्यान देने और किसानों को राहत प्रदान करने की अपील की है. साथ ही चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो उनके न्यायोचित अधिकारों के लिए किसानों को साथ लेकर लोकतांत्रिक तरीके से तीव्र आंदोलन किया जाएगा.

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