देवस्थान भूमि संरक्षण परिषद में

मंदिरों के सरकारीकरण और वक्फ बोर्ड के मुद्दे पर संघर्ष तेज करने का संकल्प

* विदर्भ के 150 से अधिक मंदिरों के प्रतिनिधि परिषद में हुए उपस्थित
अमरावती/दि.15 – शहर के रामदेव बाबा मंदिर परिसर में आयोजित ‘देवस्थान भूमि संरक्षण परिषद’ में मंदिरों की भूमि, सरकारीकरण और वक्फ बोर्ड से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई. परिषद में विदर्भ क्षेत्र के 150 से अधिक मंदिरों के न्यासी और प्रतिनिधि शामिल हुए. इस दौरान मंदिरों की भूमि और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित संघर्ष को और मजबूत करने का संकल्प लिया गया.
कार्यक्रम में अमरावती के सांसद डॉ. अनिल बोंडे, हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ संगठनकर्ता सुनील घनवट, देवस्थान सेवा समिति के अनूप जायसवाल तथा हिंदू जनजागृति समिति के विदर्भ समन्वयक श्रीकांत पिसोलकर प्रमुख रूप से उपस्थित थे. परिषद को संबोधित करते हुए सुनील घनवट ने कहा कि मंदिरों के न्यासियों के एकजुट होने से एक बड़ी संगठनात्मक शक्ति तैयार हुई है. उन्होंने दावा किया कि इसी एकजुटता के कारण शासन को प्रस्तावित ‘इनाम निर्मूलन अधिनियम’ के प्रारूप को स्थगित करना पड़ा. उन्होंने कहा कि यदि मंदिरों के न्यासी इसी तरह संगठित रहे, तो देश के लाखों मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने की दिशा में भी प्रयास सफल हो सकते हैं.
घनवट ने घोषणा की कि परिषद का अगला प्रमुख अभियान उन मंदिर भूमियों को मुक्त कराने के लिए होगा, जिन पर कथित रूप से वक्फ बोर्ड या अन्य संस्थाओं का नियंत्रण है. उन्होंने कहा कि मंदिर महासंघ इस विषय पर आगे आंदोलन चलाएगा. सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने अपने संबोधन में कहा कि मंदिरों की भूमि की रक्षा के साथ-साथ उनकी सुरक्षा और संरक्षण भी आवश्यक है. उन्होंने मंदिरों में युवाओं के लिए स्वसंरक्षण प्रशिक्षण, व्यायामशाला और गोशाला जैसे समाजोपयोगी उपक्रम शुरू करने का सुझाव दिया. उन्होंने आश्वासन दिया कि मंदिरों से संबंधित मांगों को शासन स्तर पर उठाया जाएगा.
अनूप जायसवाल ने कहा कि मंदिरों की भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कड़े कानून की आवश्यकता है. उन्होंने भूमाफियाओं और अतिक्रमणकारियों पर अंकुश लगाने के लिए ‘एंटी-लैंड ग्रैबिंग एक्ट’ लागू करने की मांग की. श्रीकांत पिसोलकर ने कहा कि वर्तमान समय में मंदिरों को केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित न रहकर संगठन, समन्वय और सांस्कृतिक संरक्षण के केंद्र के रूप में भी कार्य करना चाहिए. उन्होंने मंदिरों के माध्यम से सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर बल दिया. परिषद में अमरावती और जिले के विभिन्न मंदिरों के न्यासी एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा मंदिरों से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया.

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