‘बोलावा विठ्ठल, पहावा विठ्ठल, कळावा विठ्ठल देवभावे…’

सर्वत्र विठ्ठल-विठ्ठल-विठ्ठला की गूंज

* आषाढी एकादशी पर श्रद्धालुओं में उत्साह
* विठ्ठल मंदिरों में सुंदर, नयनरम्य सजावट
* कई मंदिरों में बडे सबेरे दुग्धाभिषेक, उमडे श्रद्धालु
* घर-घर फराली व्यंजनों की मेजवानी
* सेवाभाव रहा चरम पर, मंदिरों में साबूदाना खिचडी, राजगिरा हलवा और आलू चिप्स का भोग और वितरण
अमरावती/दि.24- महाराष्ट्र के वारकरियों के आराध्य पांडुरंग विठ्ठला की आषाढी एकादशी पर विशेष पूजा-अर्चना और व्रत-उपवास की परंपरा रही है. आज 25 जुलाई को यह त्यौहार उत्साहपूर्वक मनाते हुए अंबानगरी विठ्ठल भक्ति में आकंठ डूबी. अंबागेट स्थित विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर से लेकर शहर के सभी प्रमुख देवालयों में आषाढी एकादशी उपलक्ष्य न केवल नयनरम्य साजसज्जा की गई. अपितु भाविकों का उत्साह देखते ही बन रहा है. सर्वत्र संत तुकाराम के अभंग गूंज रहे हैं. उसी प्रकार ज्ञानोबा तुकाराम और विठ्ठल नामाचा रेट्टा हो… जैसे सर्व प्रिय कीर्तन वातावरण को आषाढीमय और अंबानगरी को पंढरी का स्वरुप दे दिया था.
* हिंगासपुरे करेंगे अभिषेक
शहर के पुरातन विठ्ठल मंदिर में गिने जाते अंबागेट के देवालय में सबेरे 5 बजे शंकरराव हिंगासपुरे और परिवार द्वारा एवं उसी प्रकार विठ्ठल मंदिर ट्रस्टीयों द्वारा विशेष पूजन और अभिषेक किया गया. इस समय भाविकों के लिए साबूदाना खिचडी और फराल के अन्य व्यंजनों को प्रसाद के रुप में वितरित किया गया. यहां सर्वाधिक भाविक उमडे. अत: पंडाल और पेयजल का भी प्रबंध विठ्ठल मंदिर ट्रस्टीयों ने सहर्ष किया. अनेकानेक मान्यवरों ने यहां विठ्ठल-रुख्माई के दर्शन किए. उनमें युवा स्वाभिमान प्रमुख संजय हिंगासपुरे, संस्थान अध्यक्ष प्रा. अजय गुल्हाने, प्रा. डॉ. संजय तिरथकर, प्रा. सुनील जयसिंगपुरे, कोषाध्यक्ष अविनाश गुल्हाने, सहसचिव अशोक गुल्हाने, विश्वस्त शंकरराव हिंगासपुरे, संजय पिंपले, मनोहर गुल्हाने, सोनाल गुरुजी, पद्माकर गुल्हाने और अन्य विश्वस्त उपस्थित थे. पूर्व महापौर विलास इंगोले, नगरसेवक सुनीता भेले, नगरसेवक प्रा. डॉ. संजय शिरभाते, चंद्रशेखर पिंपले, प्रमोद इंगोले सहित अनेकानेक भाविकों का समावेश रहा. विठ्ठल भगवान को तुलसी दल की मालाएं अर्पित की. आषाढी एकादशी इस मंदिर का प्रमुख पर्व है. शहर के अन्य विठ्ठल मंदिरों शारदा नगर, दहीसाथ, साई नगर, सच्चिदानंद कॉलोनी, विवेकानंद कॉलोनी, राजापेठ, पार्वती नगर में भी लाइटिंग और फूल की लडियों से आकर्षक सजावट करने के साथ महिला भजनी मंडल कीर्तनों में व्यस्त नजर आई. विठ्ठल कीर्तन सर्वत्र सुनाई पड रहे हैं.

* दहीसाथ के मंदिर में उमडे श्रद्धालु
दहीसाथ के प्राचीन विठ्ठल-रुख्मिणी मंदिर में सबेरे से ही श्रद्धालुओं का रेला उमडा. दर्शनार्थियों की कतारे लग गई थी. यहां साबूदाना उसल के साथ ही केले और फलों का प्रसाद के रुप में सहर्ष वितरण किया गया. मंदिरों में गुब्बारों के साथ-साथ गुलदस्तों और फूलों के लडियों से चाव से सजाया गया था. सजावट भी सभी को बरबत आकर्षित कर रही थी. वहीं विठ्ठल भगवान की भक्ति सभी पर छायी थी. लोगों ने माथे पर पांडुरंग विठ्ठल का पसंदीदा बुक्का और काला का तिलक सजाया.

* भगवान जगन्नाथ की वापसी रथ यात्रा
भगवान जगन्नाथ की वापसी रथ यात्रा भी आज आषाढी एकादशी पर रहती है. आचार्य निवास मोर्शी रोड पर अपनी मौसी के घर भगवान गत दूज को पधारे. उनके साथ बडे भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भी है. तीनों ही भाई-बहनों को जगन्नाथ भक्त कल पारंपरिक लकडी के रथ में सवार कर रस्सी से रथ खींचकर जवाहर के भीतर स्थित मंदिर ले ज रहे हैं. दोपहर 4 बजे रथ यात्रा का आचार्य निवास कबूतर खाना से मंगल प्रारंभ होने की जानकारी है. रथ यात्रा का भाविकों ने जगह-जगह फूलमालाओं और आरती उतारकर स्वागत किया. रथ यात्रा में सहभागी सैकडों श्रद्धालुओं के लिए भगवान जगन्नाथ के भक्त अण्णाा पुरोहित, पवन पितलिया, सुशील ओझा, श्याम टोनपे, गिरीराज पुरोहित गोलूभाई, आशुतोष शर्मा, कृणाल जोशी, शंकर नाचनकर, अनुज मोर, जिज्ञांश ज्योति, मनीष बोहरा, राजेश छांगानी, गोपाल दायमा, सुनील छांगानी, प्रफुल्ल भडके, घनश्याम वर्मा, कमल पनिया, राजेंद्र निर्मल राजू, ललित शर्मा सहित अनेकानेक ने फराली चिवडा और राजगिरा लाडू का सहर्ष वितरण किया. उल्लेखनीय है कि, एकादशी के बावजूद मान्यता के अनुरुप भगवान जगन्नाथ को भात अर्थात चावल अर्पित किए जाते हैं. भात की प्रसादी भी रथ यात्रा खींचनेवाले भाविकों ने वितरित की.

* राधाकृष्ण मंदिर में विशेष दर्शन
रंगारी गली स्थित माहेश्वरी राधाकृष्ण मंदिर में विशेष दर्शन और महाआरती का आयोजन आज सबेरे किया गया है. भगवान राधाकृष्ण को विठ्ठल-रुख्माई का स्वरुप दिया गया, जिसे हर भक्त देर तक देखता रहा. अपनी आंखों में यह दर्शन संजो लेने का प्रयत्न भाविकों का रहा. उसी प्रकार मंदिर की भी सुरुचि पूर्ण सजावट की गई थी. माई अर्थात रामप्रियाश्रीजी के मुखारविंद से आषाढी एकादशी का महात्म्य वर्णित किया गया. राधाकृष्ण सेवा समिति के प्रयासों को तीन वर्ष पूर्ण हो जाने उपलक्ष्य समिति सदस्यों और भाविकों ने एक-दूसरे को बधाई और शुभकामनाएं दी. आज समिति सभासदों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया.

* फराल के अनेक व्यंजनों के लिए स्वाद
शहर के प्रसिद्ध रघुवीर, धोराजीवाला, वल्लभ भवन, दुग्धपूर्णा, भोलाजी हलवाई, रामजी मिठाईयां सहित सभी प्रमुख मिष्ठान्न प्रतिष्ठानों में आषाढी एकादशी उपलक्ष्य नाना प्रकार के फराली व्यंजन तैयार किए गए आलू पेटीस, खवा जलेबी, आलू सेव, साबूदाना खिचडी, साबूदाना वडे, भगर के ढोकले और नए दौर के अनुसार गीला कलाकंद, पनीर जलेबी, पंचरतन मिक्स आदि का व्रतियों ने स्वाद लिया. सभी आयु वर्ग के लोग आषाढी एकादशी का उपवास रखते हैं. अत: फराली व्यंजनों की जमकर विक्री शहर में हुई. फिर वह रवि नगर चौक हो या जवाहर गेट अथवा श्याम चौक, गाडगे नगर, राजापेठ, कंवर नगर. अनेक हलवाईयों ने विभिन्न भागों, चौक पर कढाई लगाकर गरमागर्म फराली व्यंजन तैयार किए और ग्राहकों ने भी उनका बडा आस्वाद लिया. सर्वाधिक डीमांड खवा जलेबी और भगर के ढोकलों की रही. उसी प्रकार मिल्क केक, कलाकंद भी काफी मात्रा में सेल आउट होने की जानकारी दुग्धपूर्णा के संचालक योगेश पाण्डेय ने दी.

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