सहकारी पतसंस्था में 88 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी का मामला

12 लोगों पर मामला दर्ज

अमरावती /दि.1– शहर की एक सहकारी कामगार पतसंस्था में कर्ज वितरण और वित्तीय लेन-देन में अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है. लेखा परीक्षण (ऑडिट) के दौरान संस्था को 88 लाख 11 हजार रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाने की बात उजागर होने पर सिटी कोतवाली पुलिस ने 12 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.
जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता नरेंद्र बोबडे (56) लेखा परीक्षण विभाग से जुड़े अधिकारी हैं. वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर उन्होंने अमरावती स्थित एक सहकारी कामगार पतसंस्था के वित्तीय अभिलेखों का परीक्षण किया था. जांच के दौरान 1 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2023 तक के वित्तीय लेन-देन और कर्ज वितरण मामलों की समीक्षा की गई. ऑडिट रिपोर्ट में संस्था के तत्कालीन पदाधिकारियों, संचालकों और संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए कर्ज वितरण में अनियमितताएं किए जाने के आरोप सामने आए.
शिकायत के अनुसार आरोपियों ने कथित रूप से आपसी मिलीभगत कर निजी आर्थिक लाभ के उद्देश्य से संस्था के नियमों का उल्लंघन किया और विभिन्न वित्तीय अनियमितताओं के माध्यम से संस्था को 88.11 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया. जांच में संबंधित राशि के दुरुपयोग और गबन की आशंका भी व्यक्त की गई है. मामले में तत्कालीन सचिव मनोज सिरसिया, तत्कालीन अध्यक्ष के. एम. संघले (मृतक), तत्कालीन संचालक बाबूलाल गोहर, मंडल सदस्य आनंद अशोक डागोर, संदीप सिरसिया, संतोष चावरे, लक्ष्मण जाधव, दो महिला आरोपियों सहित लेखा परीक्षण से जुड़े अधिकारी तथा संबंधित सनदी लेखापाल एवं संस्था से जुड़े अन्य व्यक्तियों को मिलाकर कुल 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है. लेखा परीक्षण रिपोर्ट में वित्तीय गड़बड़ियां सामने आने के बाद शिकायतकर्ता ने 30 मई को सिटी कोतवाली पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और सामूहिक आपराधिक कृत्य से संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया है.
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. संस्था के वित्तीय दस्तावेजों, कर्ज वितरण अभिलेखों और संबंधित लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है. जांच अधिकारियों का मानना है कि आगे की पड़ताल में और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं. पुलिस के अनुसार मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. साथ ही यह भी ध्यान देने योग्य है कि आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं और अंतिम जिम्मेदारी का निर्धारण जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा.

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