जनगणना की ड्यूटी बनी जानलेवा !

45 डिग्री तापमान में काम पर निकले शिक्षक की हृदयाघात से मौत

* आदर्श शिक्षक प्रदीप गणोरकर के निधन से शोक की लहर,
* शिक्षक संगठनों ने सरकार से आर्थिक सहायता और विशेष राहत की मांग की
अमरावती/दि.6 – भीषण गर्मी के बीच जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अमरावती जिले के वरूड तहसील अंतर्गत करजगांव में जनगणना ड्यूटी पर तैनात एक शिक्षक की हृदयाघात से मौत हो जाने की दुखद घटना सामने आई है. मृतक शिक्षक प्रदीप गणोरकर जिला आदर्श शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित थे. घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है, वहीं शिक्षक संगठनों ने इसे अत्यधिक गर्मी में कराए जा रहे सरकारी कार्य का दुष्परिणाम बताते हुए मृतक के परिवार को विशेष आर्थिक सहायता देने की मांग की है.
जानकारी के अनुसार प्रदीप गणोरकर करजगांव स्थित जिला परिषद पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत थे. उन्हें राष्ट्रीय जनगणना अभियान के तहत प्रगणक (एन्यूमरेटर) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इन दिनों वरूड तहसील सहित पूरे विदर्भ क्षेत्र में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है. ऐसे में घर-घर जाकर जनगणना का कार्य करना शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है. बताया गया है कि गणोरकर ने एक दिन पहले भी जनगणना का कार्य किया था. शनिवार सुबह लगभग सात बजे वे पुनः अपने कर्तव्य के लिए निकले थे. रास्ते में उन्हें अचानक अस्वस्थता महसूस हुई. तबीयत बिगड़ने पर वे वापस गांव लौटने लगे और उपचार के लिए एक निजी अस्पताल पहुंचे. जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें हृदयाघात का तीव्र दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया.
प्रदीप गणोरकर अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य बताए जा रहे हैं. उनके आकस्मिक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. शिक्षा जगत में भी इस घटना से गहरा शोक व्याप्त है. सहकर्मियों और ग्रामीणों ने उन्हें एक समर्पित शिक्षक तथा समाज के प्रति जिम्मेदार व्यक्तित्व के रूप में याद किया. घटना के बाद विभिन्न शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर वरूड तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार के नाम ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में मांग की गई कि जनगणना ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले शिक्षक के परिवार को विशेष आर्थिक सहायता, सरकारी राहत तथा आश्रितों को आवश्यक सुविधाएं तत्काल प्रदान की जाएं. साथ ही भीषण गर्मी के दौरान शिक्षकों से लिए जा रहे मैदानी कार्यों की समीक्षा कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की गई.
नायब तहसीलदार पंकज चव्हाण ने शिक्षक प्रतिनिधिमंडल से चर्चा करते हुए आश्वासन दिया कि यह मांगपत्र तत्काल जिला प्रशासन और जिलाधिकारी को भेजा जाएगा, ताकि शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके.शिक्षक संगठनों ने कहा कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में शिक्षक हमेशा जिम्मेदारी से भागीदारी निभाते हैं, लेकिन भीषण गर्मी और प्रतिकूल परिस्थितियों में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त व्यवस्था होना भी उतना ही आवश्यक है. संगठनों ने सरकार से मांग की है कि प्रदीप गणोरकर के निधन को ड्यूटी के दौरान हुई मृत्यु मानते हुए उनके परिवार को विशेष अनुग्रह सहायता प्रदान की जाए.
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रकाश विंचूरकर, महेश्वर पवार, संजय बेले, विजय खोडस्कर, संजय कुंभारे, नंदकिशोर पाटील, रंजनकुमार राठोड़, विलास टाकरखेडे, राजेंद्र बांबल, चंद्रकांत धार्मिक, जगदीश वानखड़े, नरेश देउलकर, प्रभाकर टाकरखेडे, दीपेश वानखड़े, किशोर भडांगे, संजय घोरपड़े, रमेश सहारे, अमोल खासबागे, श्रीकांत खटाळे, शैलेश श्रीराव, गजानन चेपटे सहित बड़ी संख्या में शिक्षक संगठन के पदाधिकारी उपस्थित थे.
यह घटना केवल एक शिक्षक की मौत नहीं, बल्कि भीषण गर्मी में सरकारी कर्मचारियों से लिए जा रहे मैदानी कार्यों की परिस्थितियों पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता का संकेत भी है. शिक्षकों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपायों पर ध्यान नहीं दिया गया तो ऐसी घटनाएं भविष्य में और भी गंभीर रूप ले सकती हैं.

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