दिल्ली की राह पर छगन भुजबल!
राज्यसभा की दावेदारी लगभग तय

* समीर भुजबल को मिल सकता है मंत्री पद
* सीएम फडणवीस के साथ राकांपा नेताओं की अहम बैठक
* महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े फेरबदल के संकेत
मुंबई./ दि. 6 – महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलावों की आहट सुनाई देने लगी है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की ओर से रिक्त हुई राज्यसभा सीट पर वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार में मंत्री छगन भुजबल का नाम लगभग तय माना जा रहा है. वहीं, उनके दिल्ली जाने की स्थिति में राज्य की राजनीति में भी बड़ा फेरबदल हो सकता है. राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, छगन भुजबल के मंत्री पद और राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र में उनके भतीजे एवं पूर्व सांसद समीर भुजबल को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी, यहां तक कि मंत्रिपद दिए जाने की संभावना पर भी गंभीर चर्चा चल रही है.
आज राष्ट्रवादी कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके सरकारी निवास ‘वर्षा’ पर मुलाकात की. इस महत्वपूर्ण बैठक में सांसद पार्थ पवार, प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे, वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल तथा मंत्री छगन भुजबल शामिल थे. बैठक के बाद सभी नेता भुजबळ के सरकारी निवास ‘सातपुड़ा’ पहुंचे, जहां देर तक मंथन चला. माना जा रहा है कि इसी बैठक में राज्यसभा उम्मीदवार के नाम पर अंतिम सहमति बनाने का प्रयास किया गया.
* सुनेत्रा पवार के इस्तीफे से खाली हुई सीट
राष्ट्रवादी कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार द्वारा उपमुख्यमंत्री पद संभालने के बाद राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के कारण यह सीट रिक्त हुई थी. तभी से इस सीट के लिए छगन भुजबल का नाम सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था. हालांकि बीच में भाजपा नेता नवनीत राणा के नाम की भी चर्चा सामने आई थी, जिससे राजनीतिक अटकलें तेज हो गई थीं. लेकिन हालिया बैठकों के बाद संकेत मिल रहे हैं कि महायुति के भीतर सहमति बन चुकी है और छगन भुजबळ की उम्मीदवारी को लेकर सकारात्मक माहौल है.
* केंद्र में छगन व राज्य में समीर भुजबल?
सूत्रों के अनुसार, छगन भुजबल ने राज्यसभा में जाने की स्थिति में अपने राजनीतिक क्षेत्र और संगठनात्मक प्रभाव को बनाए रखने के लिए समीर भुजबल को अवसर देने की इच्छा जताई है. चर्चा है कि समीर भुजबल को मंत्रिपद अथवा अन्य महत्वपूर्ण राजनीतिक जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ हुई बैठक में इस विषय पर भी विस्तार से चर्चा हुई है.यदि यह राजनीतिक फार्मूला लागू होता है, तो एक ओर छगन भुजबल राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते दिखाई देंगे, वहीं दूसरी ओर समीर भुजबल राज्य की सत्ता में नई भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं. इससे विशेष रूप से उत्तर महाराष्ट्र और ओबीसी राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं.
* समय कम, फैसला जल्द
राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून है. उम्मीदवारों को सोमवार दोपहर 3 बजे तक नामांकन पत्र जमा करना होगा. ऐसे में अगले 48 घंटों के भीतर राष्ट्रवादी कांग्रेस की ओर से आधिकारिक घोषणा होने की पूरी संभावना है. हालांकि पार्टी के भीतर प्रमोद हिंदुराव, अविनाश आदिक और समीर भुजबल जैसे अन्य नामों पर भी चर्चा हुई है, लेकिन वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम और शीर्ष नेताओं की सक्रियता को देखते हुए छगन भुजबल की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है.
* महाराष्ट्र की राजनीति में नया अध्याय?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि छगन भुजबल राज्यसभा पहुंचते हैं, तो यह केवल एक संसदीय नियुक्ति नहीं होगी, बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस और महायुति की भविष्य की राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी. इससे ओबीसी नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व मिलेगा, वहीं राज्य में नए नेतृत्व को आगे लाने का रास्ता भी खुलेगा. अब पूरे महाराष्ट्र की नजर राष्ट्रवादी कांग्रेस की आगामी घोषणा पर टिकी हुई है. यदि चर्चाएं हकीकत में बदलती हैं तो आने वाले दिनों में राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों पर भुजबळ परिवार की भूमिका पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली दिखाई दे सकती है.





