दलितेतर योजना में 2 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग
विशेष ऑडिट कराने की उठी आवाज

मोर्शी /दि.1- नगरसेवक नितिन भीमराव पन्नासे ने जिला कलेक्टर आशीष येरेकर को ज्ञापन सौंपकर दलितेतर योजना के अंतर्गत ठोस कचरा प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) और जलापूर्ति योजना के कार्यों में लगभग 2 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग की है.
ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2024-25 के लिए दलितेतर योजना के तहत सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एवं जलापूर्ति योजना के कार्यों हेतु 11 अक्टूबर 2024 को निविदाएं आमंत्रित की गई थीं. जबकि संबंधित कार्यों का अनुमानित बजट 20 फरवरी 2025 को तैयार किया गया और तकनीकी स्वीकृति मार्च 2025 में प्रदान की गई. इसके बाद 17 मार्च 2025 को जिला कलेक्टर द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति नगर परिषद को दी गई. नगरसेवक पन्नासे ने सवाल उठाया है कि जब कार्य की लागत और तकनीकी स्वीकृति ही बाद में मिली, तो उससे पहले निविदा प्रक्रिया कैसे शुरू की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और कई दस्तावेजों में विसंगतियां पाई गई हैं.
ज्ञापन के अनुसार, जारी किए गए बिल, मजदूरों की सूची, ईपीएफ संबंधी दस्तावेज, भुगतान रसीदें, मस्टर रोल पर सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर तथा लॉगबुक की प्रविष्टियों में भी कई खामियां सामने आई हैं. इसके अलावा फायर ब्रिगेड वाहन संचालन से संबंधित ऐसे बिल भी जारी किए जाने का आरोप है, जिनका इस योजना के बजट में कोई उल्लेख नहीं था.
आरोप है कि पूरी निविदा प्रक्रिया और भुगतान संबंधी दस्तावेज संदिग्ध प्रतीत होते हैं तथा मामले में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की आशंका है. उन्होंने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और नगर परिषद मोर्शी का विशेष ऑडिट (स्पेशल ऑडिट) कराने की मांग की है. नगरसेवक ने अपने ज्ञापन में कहा है कि यदि मामले की गहन जांच की जाती है तो कथित वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है. उन्होंने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि नगर परिषद के कार्यों का विशेष लेखा परीक्षण कराकर दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या नगर परिषद प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. मामले की जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी.





