महावितरण के संचालन बने धनंजय औंढेकर

29 वर्षों के अनुभव का मिलेगा लाभ

अमरावती/दि.20- महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड में वरिष्ठ अधिकारी धनंजय औंढेकर ने गुरुवार 18 जून को संचालक पद का कार्यभार संभाल लिया. उनकी नियुक्ति प्रत्यक्ष चयन प्रक्रिया के माध्यम से की गई है. इससे पहले वे महावितरण में कार्यकारी संचालक के पद पर कार्यरत थे. औंढेकर पिछले 29 वर्षों से महावितरण में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं.
मूल रूप से औंढा नागनाथ के निवासी धनंजय औंढेकर ने विद्युत अभियांत्रिकी में स्नातक के साथ एमबीए की शिक्षा प्राप्त की है. उन्होंने एनर्जी ऑडिटर की योग्यता हासिल करने के साथ-साथ नई दिल्ली से पावर डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट में एडवांस सर्टिफिकेट कोर्स भी विशेष प्रावीण्य के साथ पूरा किया है. उन्होंने वर्ष 1997 में तत्कालीन महाराष्ट्र राज्य विद्युत मंडल में कनिष्ठ अभियंता के रूप में बीड़ जिले के माजलगांव से अपने करियर की शुरुआत की थी. वर्ष 2006 में वे प्रत्यक्ष चयन से कार्यकारी अभियंता बने, जबकि 2016 में अधीक्षक अभियंता और 2019 में पदोन्नति के जरिए मुख्य अभियंता नियुक्त हुए. अपने सेवाकाल में उन्होंने बीड़, परभणी, छत्रपति संभाजीनगर, नाशिक, पुणे, सोलापुर, कल्याण और मुंबई मुख्यालय सहित कई स्थानों पर कार्य किया है.
वर्ष 2024 से कार्यकारी संचालक के रूप में कार्यरत रहते हुए औंढेकर ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों में योगदान दिया. उनके कार्यकाल में महावितरण ने ‘मागेल त्याला सौर कृषीपंप’ योजना के तहत देश में प्रथम स्थान हासिल किया. एक ही महीने में 45,911 सौर कृषि पंप स्थापित कर महावितरण ने विश्व रिकॉर्ड बनाया, जिसे जिनियस वर्ल्ड रिकॉर्ड ने मान्यता दी. इसके अलावा, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत घरों की छतों पर सौर ऊर्जा परियोजनाओं में महावितरण ने देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया. इसी योजना के लिए फेसलेस और पेपरलेस ऑनलाइन सुविधा शुरू करने वाली महावितरण देश की पहली बिजली वितरण कंपनी बनी. नए बिजली कनेक्शन, नाम परिवर्तन और लोड वृद्धि जैसे कार्यों के लिए स्वचालित ऑनलाइन मंजूरी प्रणाली लागू करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही.
नवनियुक्त संचालक धनंजय औंढेकर ने कहा कि अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) आभा शुक्ला तथा महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र के मार्गदर्शन में कंपनी को और अधिक सक्षम, ग्राहक-अनुकूल तथा हरित ऊर्जा आधारित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि नई बिजली कनेक्शन प्रक्रिया को पूरी तरह फेसलेस और पेपरलेस बनाया जाएगा. साथ ही निर्बाध विद्युत आपूर्ति, गुणवत्तापूर्ण ग्राहक सेवा, बिजली हानि में कमी और राजस्व वृद्धि को प्राथमिकता दी जाएगी. महावितरण को तकनीकी रूप से और अधिक आधुनिक तथा उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में भी कार्य जारी रहेगा.

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