ग्रीष्मलहर का प्राकृतिक आपदा में समावेश नहीं
विशिष्ट आपदा की श्रेणी में है शामिल

* नुकसान-भरपाई का प्रावधान नहीं
* संरक्षण नीतियों का अभाव
अमरावती/दि.29- राज्य में इस समय दिनोंदिन ग्रीष्मलहर की तीव्रता बढ रही है. लेकिन इसके बावजूद इसे प्राकृतिक आपदा के तौर पर अधिकृत मान्यता नहीं दी गई है. जिसके परिणामस्वरुप गर्मी की वजह से होनेवाली मौते, बीमारी व आर्थिक नुकसान के लिए नागरिकों को सीधे नुकसान भरपाई नहीं मिल रही, यह अपने-आप में चिंतावाली बात है.
बता दें कि, महाराष्ट्र में आपत्ति व्यवस्थापन कानून-2025 के अंतर्गत बाढ, भूकंप, चक्रवात व अकाल जैसी 16 तरह की प्राकृतिक आपदाओं का समावेश होता है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने हाल ही में ग्रीष्मलहर से संबंधित कृति प्रारुप तैयार किया है. जिसमें ग्रीष्मलहर की स्थिति को राज्य विशिष्ट आपत्ति के तौर पर प्राकृतिक आपदा में शामिल किया गया, परंतु इसके दुष्परिणामों पर किए जानेवाले उपाययोजनाओं के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है. जिसके चलते राज्य सरकार को राष्ट्रीय आपत्ति निवारण निधि अथवा राज्य आपत्ति निवारण निधि में से सीधे मदद देने में मर्यादाएं आती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक मौसम में बदलाव की वजह से ग्रीष्मलहर की निरंतरता और तीव्रता लगातार बढ रही है. ऐसी स्थिति में महाराष्ट्र द्वारा भी मध्यप्रदेश की तरह भीषण गर्मी के मौसम एवं ग्रीष्मलहर की स्थिति को प्राकृतिक आपदा का दर्जा देने पर विचार करना आवश्यक है. क्योंकि केवल इस जरिए ही नुकसान भरपाई दी जा सकती है तथा अधिक प्रभावी नियोजन व निधि उपलब्ध हो सकते है. इस समय भीषण गर्मी की स्थिति का सामना करनेवाले नागरिकों के लिए ठोस नीतियों का अभाव है, तथा सरकार द्वारा इस बार की ओर गंभीरतापूर्वक ध्यान दिए जाने की जरुरत है.
* मध्य प्रदेश में आर्थिक मदद का प्रावधान
इस समस्या की गंभीरता को पहचानते हुए अपनी ओर से पहल करनी शुरु की है. मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रीष्मलहर की स्थिति को स्थानीय प्राकृतिक आपदा घोषित किया है. इस निर्णय के चलते गर्मी एवं ग्रीष्मलहर की वजह से मौत होने पर संबंधित व्यक्ति के परिवार को आर्थिक मदद देने का प्रावधान किया गया है.
* हीट एक्शन प्लान केवल प्रतिबंधात्मक उपायों के लिए
गर्मी के मौसम दौरान तापमान के बढते ही ‘हीट स्ट्रोक’, निर्जलीकरण व अन्य उष्णताजन्य बीमारियों का प्रमाण बढ रहा है, ऐसी जानकारी स्वास्थ्य विभाग की आंकडेवारी से स्पष्ट होती है. राज्य सरकार द्वारा यद्यपि हीट एक्शन प्लान लागू किया गया है, परंतु वह केवल प्रतिबंधात्मक उपायों तक ही सीमित दिखाई देता है.





