अगली बार आऊंगा, सबका मनपसंद बन कर

अकोला में कक्षा 10 वीं के छात्र ने उठाया आत्मघाती कदम

* परीक्षा में कम अंक मिलने से निराश होकर बांध में कूदकर दी जान
* पूरे राज्य में 10 वीं के नतीजे पश्चात तीन छात्र कर चुके आत्महत्या
अकोला/दि.9- अपेक्षा के अनुरूप कम अंक मिलने के कारण नागपुर, संभाजीनगर और धारावी के बाद अब अकोला जिले में भी एक स्कूली छात्र ने आत्महत्या कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली है.
बता दें की राज्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित दसवीं की परीक्षा का परिणाम कल शुक्रवार 7 मई को घोषित किया गया. इस वर्ष राज्य का दसवीं का परिणाम 92.9 प्रतिशत रहा है. ऐसे में परीक्षा का मतलब हर किसी को सफलता मिले ही, ऐसा भी नहीं है. कई लोगों को इसमें असफलता भी मिलती है. लेकिन फिर से परीक्षा की तैयारी करके उसमें सफलता पाने की गारंटी निश्चित रूप से होती है. पर उसके लिए खुद पर विश्वास और पढ़ाई की तैयारी उतनी होनी चाहिए. हालांकि, अस्थायी असफलता को इतना बड़ा मानकर कुछ विद्यार्थी बेहद चरम और दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय ले लेते हैं. ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला अकोला शहर से सामने आया है. अपेक्षा के अनुरूप कम अंक मिलने के कारण नागपुर, संभाजीनगर और धारावी के बाद अब अकोला जिले में भी एक स्कूली छात्र ने आत्महत्या कर अपनी जीवन यात्रा समाप्त कर ली है.
मिली जानकारी के अनुसार, दसवीं की परीक्षा में कम अंक मिलने के कारण अकोला में एक छात्र ने आत्मघाती कदम उठाया है. आत्महत्या करने वाले छात्र का नाम विठ्ठल संतोष बोर्डे है और वह मूल रूप से अकोला जिले के शिंगोली गांव का निवासी है. उसने कारंजा रमजानपुर स्थित बांध (डैम) में कूदकर आत्महत्या कर ली. विठ्ठल ने सोशल मीडिया पर ’अगली बार आऊंगा, सबका मनपसंद बन कर’ जैसा स्टेटस रखते हुए यह चरम निर्णय लिया. इस घटना से अकोला जिले में भारी हड़कंप मच गया है.
अब तक राज्य में दसवीं की परीक्षा में कम अंक मिलने के कारण 4 छात्रों ने आत्महत्या की है, जिसमें 3 लड़के और एक लड़की शामिल है. प्राथमिक जानकारी के अनुसार विठ्ठल को 69 प्रतिशत अंक मिलने की जानकारी है. इस घटना के बाद अकोला सहित पूरे राज्य में सनसनी फैल गई है. दसवीं के परिणाम में सोलापुर की एक छात्रा वर्तमान में विशेष चर्चा में आई है. क्योंकि इस छात्रा को प्रत्येक विषय में सटीक 35 अंक मिले हैं. इस छात्रा का नाम निकिता कुचेकर है और उसके इस अनोखे परिणाम की पूरे शहर में चर्चा हो रही है. विशेष बात यह है कि निकिता ने यह सफलता अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में हासिल की है. कई दिनों से वह स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रही थी. साथ ही घर की आर्थिक स्थिति भी बहुत दयनीय है. उसके माता-पिता मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते हैं. चंडक स्कूल के शिक्षकों ने उसे शिक्षा का महत्व समझाते हुए परीक्षा देने के लिए प्रोत्साहित किया. परीक्षा के समय तबीयत ठीक न होने के बावजूद निकिता ने हर पेपर दिया. आखिरकार सभी विषयों में 35 अंक प्राप्त कर उसने दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की. प्रत्येक विषय में समान यानी 35 अंक मिलने के कारण निकिता कुचेकर के परिणाम की फिलहाल सोलापुर में जोरदार चर्चा हो रही है.

Back to top button