बौध्दधर्मिय अल्पसंख्यक संस्थाओं के अनुदान का मसला हल
निधी वितरण हेतु जिलाधीश ने दिया सकारात्मक आश्वासन

* सांसद बलवंत वानखडे की मध्यस्थता व प्रयास रहे सफल
अमरावती/दि.9 – बौध्दधर्मिय अल्पसंख्यक संस्थाओं में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु दिए जानेवाले अनुदान की निधी तुरंत वितरीत करने की मांग को लेकर जिलाधीश कार्यालय के समक्ष किए जा रहे धरना आंदोलन को आखिरकार सफलता प्राप्त हुई है. इस आंदोलन की दखल लेते हुए जिलाधीश ने पात्र संस्थाओं को जल्द ही निधी वितरीत करने के संदर्भ में सकारात्मक भूमिका के साथ आश्वासन दिया है. खास बात यह रही कि इस आंदोलन को जिले के सांसद बलवंत वानखडे ने भी अपना समर्थन घोषित किया था. साथ ही मामले में हस्तक्षेप करते हुए जिलाधीश को इस संदर्भ में आवश्यक कदम उठाने हेतु दिशानिर्देश भी दिए.
महाराष्ट्र सरकार के अल्पसंख्यक विकास विभाग द्वारा बौध्द अल्पसंख्यक संस्थाओं हेतु मंजूर मुलभूत सुविधा अनुदान की निधी का अब तक वितरण नहीं किया गया है. जिसे लेकर बौध्दधर्मिय अल्पसंख्यक संस्था कृति समिती द्वारा जिलाधिश को निवेदन सौंपा गया था. परंतु इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं होने के चलते समिती के पदाधिकारियों ने धरना आंदोलन करना शुरू किया था. समिती के पदाधिकारी का कहना रहा कि 7 अक्टूबर 2024 के शासन निर्णय अनुसार धर्मादाय आयुक्त के पास पंजिकृत तथा 51 फीसद से अधिक बौध्द विश्वस्त या सदस्य रहनेवाली पात्र बौध्द संस्थाओं में मूलभुत सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु 10 लाख रूपये तक अनुदान देने की योजना मंजूर की गई है. इस योजना के अंतर्गत पात्र रहनेवाली राज्य की कई संस्थाओं ने अपने-अपने जिले के जिलाधिश कार्यालय मार्फत आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रस्ताव पेश किया था. जिन्हें सरकार के पास भेजा गया. परंतु शासन निर्णय होने के बाद भी काफी अधिक कालावधी बित जाने के बावजूद अब तक निधी वितरीत नहीं हुई है. जिसके चलते कई संस्थाओं के विकास कार्य तथा सामाजिक, शैक्षणिक व सांस्कृतिक उपक्रम अधर में लटके हुए है. जिसके चलते सरकार की लापरवाही व अनदेखी के खिलाफ बौध्द अल्पसंख्यक संस्था कृति समिती द्वारा आंदोलन करना शुरू किया गया. जिसका समर्थन करते हुए सांसद बलवंत वानखडे ने इस मुद्दे को विधान भवन के पावस सत्र में उठाने हेतु दर्यापुर निर्वाचन क्षेत्र के विधायक गजानन लवटे से संपर्क व आग्रह किया. इसी दौरान आंदोलन की गंभीर दखल लेते हुए जिलाधीश आशिष येरेकर ने अनुदान की निधी जल्द से जल्द वितरीत करने की कार्रवाई का आश्वासन दिया. जिसके चलते समिती ने अपने आंदोलन को एक बडी सफलता मिलने का दावा किया है.
इस आंदोलन को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संघर्ष समिती के समाधान वानखडे द्वारा खुला समर्थन दिया गया था. साथ ही इस आंदोलन में वसंतराव गवई, राहुल खंडारे, कैलास मोरे, रामभाऊ पाटिल, अरूण मोहोड, सुनंदा शेलके, सुभाष गावंडे, आनंद खातरकर, देवेंद्र रामटेके, दुर्योधन धनगर, सुभाष नांगले, श्रीनिवास मनोहरे, सुनंदा बोधिले, रामदास इंगोले, विमल गवई, प्रतिभा गोविंदराव, सिध्दार्थ थोरात, रविंद्र डोंगरे, सिकंदर मनोहरे, देवयानी आठवले, बी. एस. रामटेके, धर्मदास वाघमारे, तुलसीराम हिरूलकर, रामदास आडे, दिपक डांगे, सुबोध दामोधरे, शरद वानखडे, नामदेव सोनुले व सुरेंद्र कोर आदि सहित अन्य पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया.
* निधी नहीं मिलने पर 15 अगस्त से राज्यव्यापी बेमुदत अनशन
जिलाधिश के आश्वासन पश्चात अपना धरना प्रदर्शन पिछे लेते हुए कृती समिती की ओर से चेतावनी दी गई कि यदि सरकार द्वारा जल्द से जल्द निर्णय लेकर पात्र बौध्द संस्थाओं को निधी वितरीत नहीं की गई तो महाराष्ट्र की सभी पात्र बौध्द संस्थाओं के पदाधिकारियों द्वारा 15 अगस्त से लोकतांत्रिक मार्ग का अवलंब करते हुए आमरण अनशन किया जाएगा और उस आंदोलन के चलते निर्माण होनेवाली स्थिती की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर रहेगी.





