महिला से नजदीक आओ कहना विनयभंग नहीं

नागपुर हाईकोर्ट ने रद्द की एफआईआर

* गाडगे नगर थाने का केस
नागपुर/ दि.25- बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने अमरावती के एक सेवानिवृत्त क्लर्क पर दायर विनयभंग की केस को खारिज करते हुए फैसले में कहा कि महिला को मेरे करीब आओ कहना छेडछाड की श्रेणी में नहीं आता और यौन इच्छा भी नहीं माना जा सकता. न्या. उर्मिला जोशी फालके ने 59 वर्ष के याचिकाकर्ता की अपील को मंजूर करते हुए भादंवि की धारा के तहत मामला नहीं बनने का फैसला सुनाया. अमरावती के गाडगे नगर थाने मेें 2023 में महिला के विनयभंग का एफआइआर दर्ज किया गया था. 2025 में आरोपपत्र दायर किए गये थे.
न्यायाधीश ने निर्णय में कहा कि याचिकाकर्ता पर केवल इतना आरोप है कि उसने महिला को करीब आने कहा. यह शब्द उस समय की परिस्थिति में उच्चारे जब बिलों का खुलासा किया जाना था. उसकी कोई यौन इच्छा नहीं प्रकट होती. अभियोजन पक्ष के अनुसार महिला पेंशन संबंधी मुद्दों को लेेकर उक्त लिपिक के पास गई थी. महिला के दिवंगत पति की पेंशन और मेडिकल बिलों को क्लीयर करने वह उक्त क्लर्क से मिली. महिला ने याचिकाकर्ता के कमेंट को आपत्तिजनक और शर्मनाक निरूपित करते हुए पुलिस में अपराध दर्ज करवाया था. जिसे याचिकाकर्ता ने अपने वकील शशिभूषण वाहने के जरिए उच्च न्यायालय में चुनौती दी.
हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस की जांच और पूछताछ में ऐसा कोई घटक नहीं दिखाई दे रहा कि याचिकाकर्ता ने विनयभंग किया हो. कोर्ट ने भादंवि धारा 354 और 509 रद्द कर दिए. विधि सूत्रों ने बताया कि कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के मार्गदर्शक मापदंडों का हवाला दिया. जो भजन लाल प्रकरण में जारी किए गये थे. आगे मामला जारी रखना कानून प्रक्रिया को आहत करना होगा.

Back to top button