साढ़े 400 वर्षों से चांदूर रेल्वे की रक्षा कर रही जगदंबा देवी

प्राचीन जगदंबा माता मंदिर को ‘ब’ श्रेणी के तीर्थक्षेत्र का दर्जा देने की मांग तेज

श्रद्धा, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम
नवरात्रोत्सव में उमड़ता है भक्तों का सैलाब
चांदूर रेल्वे /दि.13- अमरावती जिले के चांदूर रेल्वे शहर के पुराने क्षेत्र डोंगरीपुरा में स्थित प्राचीन जगदंबा माता मंदिर साढ़े 400 वर्षों से अधिक समय से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. नवरात्रोत्सव के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. माता के प्रति अटूट श्रद्धा, वर्षों पुरानी परंपरा और ऐतिहासिक महत्व के बावजूद मंदिर में आवश्यक सुविधाओं का अभाव होने से अब इस मंदिर को ‘ब’ श्रेणी के तीर्थक्षेत्र का दर्जा देने की मांग जोर पकड़ रही है.
* सन 1570 के आसपास चांदूर रेल्वे की स्थापना से जुड़ा इतिहास
स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक चांदूर रेल्वे शहर की स्थापना के समय से ही जगदंबा माता की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व रहा है. बताया जाता है कि उस दौर में गांव की सुरक्षा और सुख-समृद्धि के लिए ग्रामीण माता पर निर्भर रहते थे. माता के मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक परंपराएं आज भी स्थानीय लोगों की आस्था का अभिन्न हिस्सा हैं. जानकारों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बैसवाड़ा क्षेत्र से आए भैंसे परिवार के सदस्यों को गांव में इनाम के रूप में जमीन प्रदान की गई थी. उस समय इस क्षेत्र में निजाम और भोंसले का शासन था. गांव के पांच एकड़ परिसर में बैस परिवार द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया था. इसी दौरान मंदिर की स्थापना हुई और तभी से यहां माता की पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है.
* बीमारी के संकट में भी माता पर अटूट विश्वास
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, लगभग 200 वर्षों तक बैस और भैंसे परिवारों के घरों में देवी की पूजा-अर्चना नियमित रूप से होती रही. एक समय गांव में हैजा जैसी बीमारी का प्रकोप फैलने से बड़ी संख्या में लोगों की मौत होने लगी थी. ऐसे कठिन समय में ग्रामीणों ने जगदंबा माता से मन्नतें मांगीं और माता की कृपा से संकट दूर होने की मान्यता आज भी लोगों के बीच प्रचलित है. इसी श्रद्धा के चलते जगदंबा माता को गांव की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है. पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा ने मंदिर को धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष पहचान दिलाई है.
* नवरात्रोत्सव में भव्य आयोजन, भक्तों की बढ़ती भीड़
जगदंबा माता मंदिर में प्रतिवर्ष नवरात्रोत्सव बड़े उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है. नौ दिनों तक मंदिर में धार्मिक कार्यक्रमों, पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. वर्षभर भी यहां भक्तों का आना-जाना जारी रहता है. मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. कई भक्त खुले हाथों से सेवा और सहयोग करते हैं. इसके कारण मंदिर परिसर में सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता भी पहले से अधिक महसूस की जा रही है.
* ‘ब’ श्रेणी का तीर्थक्षेत्र दर्जा कब मिलेगा?
साढ़े 400 वर्षों से अधिक की ऐतिहासिक परंपरा और हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होने के बावजूद मंदिर को अब तक अपेक्षित सुविधाएं मिलने की मांग उठ रही है. मंदिर संस्थान की ओर से इसे ‘ब’ श्रेणी के तीर्थक्षेत्र का दर्जा देने की मांग की जा रही है. यदि मंदिर को यह दर्जा मिलता है, तो यहां बुनियादी सुविधाओं के विकास, श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्था और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं. अब सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस प्राचीन मंदिर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसकी मांग पर गंभीरता से विचार करेगा? क्या जगदंबा माता के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे?
* मंदिर के विकास की प्रतीक्षा
मंदिर संस्थान के अध्यक्ष सचिन वर्मा के अनुसार, मंदिर में भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है. श्रद्धालुओं के सहयोग से सुविधाओं में वृद्धि हो रही है और भविष्य में मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू हो चुका है. इसके लिए भक्तों और संबंधित प्रशासन का सहयोग महत्वपूर्ण रहेगा.
* श्रद्धा का केंद्र, विकास की दरकार
चांदूर रेल्वे की पहचान से जुड़े इस प्राचीन जगदंबा माता मंदिर को बेहतर सुविधाओं से सुसज्जित करना समय की मांग है. साढ़े 400 वर्षों की विरासत को संजोए इस धार्मिक स्थल को ‘ब’ श्रेणी के तीर्थक्षेत्र का दर्जा मिलने से मंदिर के विकास को नई दिशा मिल सकती है. अब देखना यह है कि श्रद्धालुओं की इस मांग को शासन कब तक मंजूरी देता है और जगदंबा माता मंदिर के विकास का मार्ग कब प्रशस्त होता है.

 

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