न्या. गौतम पटेल के परिवार को मिली धमकियां

बॉम्बे बार एसोसिएशन ने की कड़ी निंदा

* विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग
मुंबई/दि.9 – मुंबई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गौतम एस. पटेल और उनके परिवार को कथित रूप से मिल रही धमकियों तथा हिंसक हमलों की घटनाओं पर बॉम्बे बार एसोसिएशन (बीबीए) ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसकी कड़ी निंदा की है. एसोसिएशन ने केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप कर ब्रिटेन में न्यायमूर्ति पटेल के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.
मुंबई उच्च न्यायालय के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित अधिवक्ता संगठनों में से एक बॉम्बे बार एसोसिएशन ने सोमवार को एक विशेष प्रस्ताव पारित कर कहा कि न्यायमूर्ति पटेल और उनके परिवार को कथित रूप से दाऊदी बोहरा समुदाय के धार्मिक नेतृत्व से जुड़े विवाद पर वर्ष 2024 में दिए गए न्यायिक निर्णय के कारण निशाना बनाया जा रहा है. संगठन ने कहा कि ऐसी घटनाएं न केवल एक व्यक्ति विशेष पर हमला हैं, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कानून के शासन पर सीधा आघात हैं.
बीबीए द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि किसी न्यायाधीश या उनके परिवार को केवल उनके न्यायिक कर्तव्यों के निर्वहन के कारण धमकाना, डराना, उत्पीड़ित करना, हमला करना या किसी भी प्रकार से निशाना बनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूरी तरह अस्वीकार्य है. प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया कि न्यायमूर्ति पटेल के परिवार के एक सदस्य को कथित रूप से शारीरिक चोट पहुंचने की खबरें सामने आई हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है. प्रस्ताव में कहा गया है कि न्यायाधीशों और उनके परिवारों के खिलाफ हिंसा या हिंसा की धमकियां न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर प्रत्यक्ष हमला हैं. यह केवल किसी एक न्यायाधीश पर आक्रमण नहीं, बल्कि संपूर्ण न्याय व्यवस्था और उस संवैधानिक विश्वास पर प्रहार है जिसके तहत न्यायालय भय, दबाव, पक्षपात, प्रेम या द्वेष से मुक्त होकर निष्पक्ष न्याय प्रदान करते हैं.
बार एसोसिएशन ने संबंधित अधिकारियों से मामले की तत्काल, निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने की मांग की है. संगठन ने कहा कि किसी न्यायिक निर्णय से असहमति होने पर उसकी आलोचना करना, उस पर प्रश्न उठाना अथवा उसे चुनौती देना कानून और संविधान द्वारा उपलब्ध वैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जा सकता है, लेकिन न्यायाधीशों या उनके परिवारों के विरुद्ध धमकी, दबाव, उत्पीड़न या हिंसा का सहारा लेना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता.
बीबीए ने केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह इस गंभीर मामले को तत्काल ब्रिटिश अधिकारियों के समक्ष उठाए और इंग्लैंड में रह रहे न्यायमूर्ति पटेल के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए. संगठन ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की आधारशिला है और न्यायाधीशों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की धमकी या हिंसा को किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं किया जा सकता.
बार एसोसिएशन ने अपने प्रस्ताव में कहा कि न्यायाधीशों और उनके परिवारों के खिलाफ धमकी, दबाव, जबरदस्ती अथवा हिंसक कृत्यों के प्रति किसी प्रकार की सहनशीलता नहीं दिखाई जानी चाहिए. ऐसी घटनाएं कानून के शासन और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती हैं तथा न्यायिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को प्रभावित करती हैं. संगठन ने विधि समुदाय, प्रशासन और सरकार से न्यायपालिका की गरिमा, स्वतंत्रता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए एकजुट होकर आवश्यक कदम उठाने का आह्वान किया है.

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