राज्यसभा की उम्मीदवारी नहीं मिलने पर नवनीत राणा का बड़ा बयान,
पद के लिए विचारधारा नहीं बदलूंगी

* राष्ट्रवादी में शामिल होने की शर्त स्वीकार नहीं की
मुंबई/अमरावती/दि.9 – महाराष्ट्र की रिक्त राज्यसभा सीट को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच पूर्व सांसद और भाजपा नेता नवनीत राणा ने पहली बार अपनी भूमिका स्पष्ट की है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के कोटे से राज्यसभा भेजे जाने की संभावनाओं पर विराम लगाते हुए उन्होंने कहा कि वह किसी भी पद के लिए अपनी राजनीतिक विचारधारा नहीं बदलेंगी और भाजपा की निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में काम करती रहेंगी.
बता दे कि, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद रिक्त हुई सीट के लिए कई नामों पर चर्चा चल रही थी. इनमें नवनीत राणा, वरिष्ठ नेता छगन भुजबल, अमरसिंह पंडित और राजेंद्र जैन के नाम प्रमुख थे. अंततः राष्ट्रवादी कांग्रेस ने राजेंद्र जैन को उम्मीदवार बनाया. राज्यसभा की उम्मीदवारी नहीं मिलने के बाद नवनीत राणा ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर अपनी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी की एक ईमानदार और निष्ठावान कार्यकर्ता हैं. उन्होंने लिखा कि किसी भी पद या अवसर के लिए वह अपनी विचारधारा से समझौता नहीं करेंगी और भविष्य में भी भाजपा के लिए कार्य करती रहेंगी.
पूर्व सांसद नवनीत राणा ने दावा किया कि सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार ने उन्हें राज्यसभा भेजने की इच्छा जताई थी. उन्होंने कहा कि उनकी कार्यक्षमता पर विश्वास जताने के लिए वह दोनों नेताओं की आभारी हैं, लेकिन राज्यसभा की उम्मीदवारी स्वीकार करने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस में प्रवेश करने की शर्त उन्हें स्वीकार नहीं थी. राणा के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सुझाव पर उन्होंने स्वयं सुनेत्रा पवार से मुलाकात कर राष्ट्रवादी कांग्रेस के हिस्से की राज्यसभा सीट भाजपा को देने का अनुरोध किया था, लेकिन विभिन्न कारणों से यह संभव नहीं हो सका.
* फडणवीस और पवार परिवार का जताया आभार
अपनी पोस्ट में नवनीत राणा ने देवेंद्र फडणवीस, सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि राज्यसभा के लिए उनके नाम पर विचार किया जाना भी उनके लिए सम्मान की बात है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नवनीत राणा ने इससे पहले भी भाजपा के माध्यम से राज्यसभा में जाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिला था. इस बार राष्ट्रवादी कांग्रेस के कोटे से भी उनकी उम्मीदवारी साकार नहीं हो सकी.
* भुजबल का नाम भी रहा चर्चा में
इस बीच राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रवादी कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता छगन भुजबल को राज्यसभा भेजने के पक्ष में थे. हालांकि बताया जा रहा है कि राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उनके भतीजे समीर भुजबल को मंत्रिमंडल में स्थान देने की मांग को भाजपा नेतृत्व की सहमति नहीं मिली. इसके बाद उनकी दावेदारी कमजोर पड़ गई और अंततः राजेंद्र जैन के नाम पर सहमति बनी.
* महायुति की राजनीति में नए संकेत
राज्यसभा सीट को लेकर हुई यह पूरी कवायद महायुति के भीतर सीटों के बंटवारे और सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक संतुलन की जटिलता को भी उजागर करती है. नवनीत राणा की टिप्पणी से यह स्पष्ट संकेत गया है कि वह फिलहाल भाजपा में ही अपनी राजनीतिक पारी आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं और किसी अन्य दल में जाने की अटकलों को उन्होंने खारिज कर दिया है.





