शिक्षक बैंक के चार संचालकों की याचिका खारिज!
उच्च न्यायालय से भी नहीं मिली राहत

* अब निगाहें विभागीय सह-निबंधक की कार्रवाई पर
अचलपुर /दि.20– दस वर्षों का कार्यकाल पूरा कर चुके शिक्षक बैंक के संचालकों को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ से भी राहत नहीं मिली. ऐसे में अब विभागीय सह-निबंधक शिक्षक बैंक के इन चार संचालकों के संबंध में आगे क्या भूमिका अपनाते है, इस पर पूरे सहकार क्षेत्र की नजर टिकी हुई है.
विभागीय सह-निबंधक सहकारी संस्था अमरावती में 13 अप्रैल 2026 को शिक्षक बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पत्र भेजकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे. इस पत्र को लेकर बैंक के संचालक गोकुलदास राऊत तथा अन्य ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी. इस प्रकरण में न्यायालय ने हाल ही में अपना फैसला सुनाया है. न्यायालय ने कहा कि, याचिकाकर्ताओं को 7 दिनों की स्पष्ट नोटिस दिए बिना प्रतिवादी कोई कार्रवाई न करें. इसका अर्थ यह है कि, संबंधित संचालकों पर कानूनी कार्रवाई करने से पहले विभागीय सह-निबंधक द्वारा 7 दिन की नोटिस देना आवश्यक है.
उल्लेखनीय है कि, विभागीय सह-निबंधक ने 13 अप्रैल 2026 को शिक्षक बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को नोटिस जारी की थी. अब उस नोटिस को 7 दिन नहीं, बल्कि एक महिने से भी अधिक समय बीत चुका है. इसलिए अब कार्रवाई की गेंद विभागीय सह-निबंधक के पाले में है. प्रश्न यह उठ रहा है कि, क्या न्यायालय के आदेश का पालन किया जाएगा, या फिर कार्रवाई के लिए और देरी की जाएगी.
* क्या है मामला?
सहकारी बैंकों में वहीं लोग बार-बार चुनाव लडते है और साम, दाम, दंड, भेद जैसी नीतियों का उपयोग कर जीत जाते है, तथा वर्षों तक पद से चिपके रहते है. इससे एकाधिकारशाही शुरु होकर मनमाना प्रशासन चलता है. सहकार क्षेत्र में इस प्रकार के गोरखधंधे को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक कानून बनाया है. इस कानून के अनुसार, 10 वर्षों तक सत्ता में रहे संचालक दोबारा चुनाव नहीं लड सकते. यानि जिनका कार्यकाल 10 वर्ष पूरा हो गया है, उनका पद पर बने रहने का अधिकार इस कानून के तहत समाप्त हो जाता है. इसी कानून के क्रियान्वयन के तहत विभागीय सह-निबंधक द्वारा शिक्षक बैंक के 4 संचालकों पर कार्रवाई करने हेतु बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को नोटिस जारी की गई है. जिसमें गोकुलदास राऊत, अजय पवार, प्रफुल्ल शेंडे और राजेंद्र गावंडे का नाम शामिल है. नोटिस में स्पष्ट रुप से उल्लेख किया गया था कि, इन संचालकों पर कार्रवाई की जाए.





