नीट एक्जाम पेपर लीक मामला

नागपुर, गढचिरोली पहुंची सीबीआई जांच की आंच

* क्या अकोला, अमरावती का भी लग सकता नंबर!
* कोचिंग संस्थान के संचालकों के हाथ-पांव फूले
* गेस पेपर की आड में भयंकर गोरखधंधा?
* अकोला में आरसीसी पर प्रदर्शन, तोडफोड की कोशिश
अमरावती /दि.19- मेडिकल और डेंटल प्रवेश की परीक्षा नीट के पर्चे लीक होने से देशभर में शुरु हुई केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई की तहकीकात की टीम नागपुर और गढचिरोली पहुंच गई है. जिसके कारण अकोला और अमरावती में नीट की कोचिंग लेनेवाले संस्थाओं के संचालक घबरा उठें हैं. इस बीच नागपुर में किसी आलोक का नाम सामने आने का दावा खबर में किया गया है. सीबीआई की जांच में यह नाम आने की जानकारी देते हुए बताया गया कि, नांदेड़ की विद्युतनगर निवासी अश्विनी कदम नामक महिला ने अपनी बेटी के लिए 5 लाख रुपये में पेपर खरीदा. इसके लिए 25 हजार रुपये ऑनलाइन भुगतान किया गया. आलोक ने उन्हें 15 दिन तक पुणे में रुकवाया और वहीं पर पेपर दिया, ऐसी जानकारी सामने आई है. एक हजार लोगों तक पेपर बेचे जाने की आशंका और खबर ने अमरावती और अकोला में संस्था चालकों के हाथ-पांव फूल गए हैं. अकोला से मिले समाचार के अनुसार आरसीसी की शाखा पर अचानक विद्यार्थी और पालकों प्रदर्शन किया. वहां तोडफोड का भी प्रयत्न किए जाने की खबर है.
उल्लेखनीय है कि, अमरावती से करीब 5 हजार विद्यार्थियों ने नीट दी थी. यहां भी एक दर्जन के करीब संस्थान में नीट कोचिंग दी जाती है. इन्हीं के माध्यम से पेपर गेस पेपर के नाम से यहां पहुंचने की चर्चा सुनने मिल रही है. अभी तक किसी ने पुष्टि मात्र नहीं की है.
ऐसे में सीबीआई जांच की आंच अमरावती तक पहुंचने की आशंका बताई जा रही है. यहां के भी कोचिंग संस्थानों का लातूर और अन्य भागों की कोचिंग संस्थान से सीधा जुडाव रहा है. चर्चा है कि अमरावती में भी गेस पेपर देने की परंपरा रही है. बल्कि इसी गेस पेपर में पर्चे लीक की थोडी बहुत कहानी छिपी है.
* एक जैसे सवाल आने का दावा
नीट अर्थात डॉक्टरी पेशे की ओर कदम बढाते विद्यार्थियों को सबसे पहले टारगेट सेट करना होता है. इसके लिए वे कोचिंग क्लास की तलाश में रहते हैं. हाल के वर्षो में अमरावती, अकोला में नीट कोचिंग संस्थान पुणे, कोटा, नागपुर, जैसे शहरों समान बढे हैं. यह संस्थान विद्यार्थियों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए गेस पेपर का भी सहारा लेते हैं. संस्थान के गेस पेपर सर्वाधिक मात्रा में सटिक रहने का दावा किया जाता है. जिससे अभिभावक भी पाल्य के अच्छे स्कोर की खातिर संस्थान का चुनाव करते हैं. लाखों की फीस देने तैयार हो जाते हैं.
* कॉलेजेस से करार
एक- एक छात्र की कोर्स की फीस डेढ से तीन लाख वसूली जाती है. बेशक इसमें बडी स्पर्धा बनी हुई है. अधिकाधिक विद्यार्थियों को अपनी ओर खींचने के प्रयास कोचिंग संस्थान करते हैं. इस कडी स्पर्धा में उन्हें गेस पेपर वाली प्रणाली बडी उपयोगी लगती है. इसका असर भी होता है. विद्यार्थी गेस पेपर के चक्कर में कोचिंग संस्थान में लाखों की फीस देकर प्रवेश लेते हैं. कोचिंग संस्थानों का महाविद्यालयों से अघोषित टाय-अप होता है. जिससे कॉलेज अटेंड करे बगैर उनकी उपस्थिति भी दर्शा दी जाती है. कक्षा 12 वीं के एक्झाम की तैयारी करते हुए कोचिंग के माध्यम से नीट की तैयारी होती है.
कोचिंग संस्थानों के फ्रेंचाईजी भी होते है. उसी प्रकार संस्थान के आपस में दूसरे शहरों में भी लेन-देन होने की चर्चा इस क्षेत्र में सुनने मिली. यहीं से पेपर लीक की कहानी शुरु होती है. सीबीआई जांच में अब तक हुए खुलासे के अनुसार 10 लाख का पर्चा खरीदकर 15 लाख और आगे 25 लाख में बेचा गया. ऐसे में पर्चे के कुछ सवाल भी खरीदें जाते हैं. वे सवाल संबंधित कोचिंग संस्थान अपने गेस पेपर में देते हैं. विद्यार्थियों को दिए गए गेस पेपर के सवाल हकीकत नीट में उतरने पर संस्थान के विद्यार्थियों का न केवल स्कोर बढता है, बल्कि व्याप्त चर्चा और कयासों के अनुसार अगले वर्ष और अधिक विद्यार्थी उस कोचिंग क्लास की ओर आकर्षित होते हैं. करीब हजार विद्यार्थियों तक महाराष्ट्र में लीक पर्चा पहुंचने के दावे जांच में किए जा रहे है. पूछताछ के आधार पर यह दावे करते हुए सीबीआई नागपुर के आलोक को खोज रही है. ऐसा न हो कि, अमरावती, अकोला में जांच की आंच पहुंचे और केंद्रीय जांच ब्यूरो को यहां धडधडाते हुए आना पडे.

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