राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सेवाग्राम यात्रा
बापू कुटी में महामहिम ने की प्रार्थना

* सरल व्यवहार से आश्रमवासी भावुक
वर्धा /दि.16- भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज सेवाग्राम आश्रम, बापू कुटी का दौरा किया. आदि निवास, बा कुटी, बापू कुटी और बापू के कार्यालय का निरीक्षण करते हुए उन्होंने जानकारी ली. प्रार्थना सभा में भाग लिया और वृक्षारोपण किया. साथ ही सूत कताई भी की. इस अवसर पर राज्यपाल जिष्णू देव वर्मा, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर, जिलाधिकारी वान्मथी सी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे. इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू के सरल व्यवहार ने आश्रमवासियों को भावुक कर दिया. छोटे-छोटे सवाल पूछकर उन्होंने हर बात की जानकारी ली.
* यह चिमटा किस लिए?
राष्ट्रपति मुर्मू ने यहां महात्मा गांधी के निवासकाल से जुड़ी सभी चीजों को ध्यान से देखा. यहां संरक्षित हर वस्तु के बारे में जानकारी ली. एक कोने में उन्हें एक चिमटा दिखाई दिया. यह चिमटा किस काम के लिए है, इस बारे में उन्होंने जिज्ञासा से पूछा. तब उन्हें बताया गया कि गांधीजी के समय यहां बहुत सांप होते थे. लेकिन उन्हें मारने से मना किया गया था. इसलिए कार्यकर्ता इस चिमटे की मदद से सांपों को पकड़कर टोकरी में रखते और बाद में जंगल में छोड़ देते थे. इस तरह अहिंसा के सिद्धांत का पालन किया जाता था. राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बात को सराहना के साथ याद रखा.
इस सेवाग्राम आश्रम यात्रा के दौरान श्रीमती मुर्मू ने सभी कुटियों को ध्यान से देखा. खास बात यह रही कि उन्होंने यहां लगे हर सूचना फलक को पढ़ा. आमतौर पर बड़े मेहमानों के पास समय नहीं होता, लेकिन मैडम ने हर सूचना पढ़ी, ऐसी प्रतिक्रिया आश्रम के विजय तांबे ने दी. वही राष्ट्रपति मुर्मू को जानकारी दे रहे थे. हर कुटी में प्रवेश करने से पहले उन्होंने अपने जूते उतारे और उनके लिए लाई गई बांस की चप्पल पहनकर भ्रमण किया. इस दौरान उन्होंने बापू द्वारा उपयोग किए गए हॉटलाइन फोन के बारे में भी विशेष जानकारी ली.
* बेल का पौधा लगाया
यहां आने वाले विशेष अतिथियों के हाथों आश्रम परिसर में वृक्षारोपण कराया जाता है. सारी तैयारी पहले से की गई थी. पौधा भी तय था. राष्ट्रपति को केवल पानी डालना था. पौधा देखते ही उन्होंने कहा, अरे यह तो बेल का पेड़ है ना? बहुत उपयोगी है. राष्ट्रपति महोदया को पेड़-पौधों की इतनी जानकारी देखकर उपस्थित लोग प्रभावित हुए. शांत और स्वच्छ वातावरण देखकर उन्हें आनंद हुआ. उन्होंने चरखे पर सूत कताई भी की. जाते समय उन्होंने कहा कि आपने इस परिसर को बहुत अच्छे से संभाला है, आगे भी इसे ऐसे ही बनाए रखें. साथ ही कुटी की पुरानी खपरैल देखकर भी उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया.





